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बागपत के मुद्दे पर एनजीटी ने यूपी सरकार से कहा- ‘आपको इंसानी जीवन की कद्र नहीं है’

निहार गोखले | Updated on: 9 September 2016, 8:03 IST

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बागपत जिले के गांवों को साफ पीने का पानी उपलब्ध नहीं कराने को लेकर बुधवार को उत्तरप्रदेश प्रशासन की जबरदस्त खिंचाई की. हिंडन नदी के प्रदूषित जल से उसके आसपास के पानी के स्रोत दस साल से भी ज्यादा समय सेे दूषित हैं. इसी पानी के कारण इलाके के सैकड़ों लोग शारीरिक और मानसिक बीमारियों से ग्रस्त हैं. बागपत की एक एनजीओ ने इससे राहत पाने के लिए नवंबर 2014 में एनजीटी से संपर्क किया था.

एनजीटी ने अपने एक अध्ययन से पुख्ता किया कि अधिकांश हैंडपंपों का पानी भारी धातुओं से दूषित है और संदेह है कि साहरनपुर, शामली और मेरठ जिले के लगभग 45 तरह के उद्योग नदी के जल में ये धातु डाल रहे हैं.एनजीटी ने इस मुद्दे को उठाया, फिर भी यूपी सरकार ने इन गांवों में टैंकर या बोतलों से साफ पानी पहुंचाने और आगे कोई नुकसान ना हो, इसके लिए दूषित हैंडपंपों को सील करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया, एनजीटी के आदेश के बावजूद.

कैच ने पहले भी अपनी एक रिपोर्ट में कहा था कि किस तरह मानकों के अभाव में गांव के लोग दूषित हैंडपंपों से पानी पीने को मजबूर हो रहे हैं.अंतत: एनजीटी की मुख्य न्यायपीठ ने उत्तर प्रदेश जल निगम के प्रबंध निदेशक को आदेश दिए कि वे बागपत जिले के जिला मजिस्ट्रेट और मुख्य चिकित्सा अधिकारी के साथ सात सितंबर को उसके सम्मुख पेश हों.

छुट्टी पर होने के कारण जिला मजिस्ट्रेट को छोडकर सब उपस्थित थे. जिला मजिस्ट्रेट का प्रतिनिधित्व सहायक जिला मजिस्ट्रेट ने किया. जब इन अधिकारियों से गांवों में साफ पानी मुहैया कराने के मानकों, सील हैंडपंप और दूषित पानी से प्रभावित लोगों के बारे में पूछा, तो इन अधिकारियों की ओर से कोई साफ जवाब नहीं मिला.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने तो इससे इनकार ही कर दिया कि रोग पानी की वजह से हैं, या उस क्षेत्र में सेहत की कोई समस्या है. इस पर एनजीटी सदस्य बिक्रम सिंह साजवान ने कड़ाई से कहा, ‘एक गांव में 119 चर्म रोग होने की रिपोर्ट है. यह कैसे संभव है? इससे हम हैरान हैं.’

एक आवेदक ने कहा कि 2014 में पानी की गुणवत्ता को लेकर हुए एक अध्ययन के बारे में एनजीटी को नहीं बताया गया था, पर उसे पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय को सौंपा गया था. अध्ययन से सामने आया कि पानी में सुरक्षित पानी से 4000 गुना ज्यादा भारी धातु- आर्सेनिक था.

कैच ने पेयजल के संकट से गुजर रहे बागपत के गांव पर पहले भी एक स्टोरी लिखी थी

उक्त रिपोर्ट को अपने सामने पेश करने का आदेश देते हुए एनजीटी अध्यक्ष ने उत्तरप्रदेश सरकार को कहा, ‘आर्सेनिक से क्या हो सकता है? क्या आपने चर्म रोग से ग्रसित 119 लोगों सहित किसी रोगी के खून के सेंपल लिए? क्या आपको लोगों की मदद नहीं करनी चाहिए? आपको इंसानी जीवन की कोई कद्र नहीं है.’

उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी के इनकार को लक्षित करते हुए आगे कहा, ‘यह जानते हैं कि पानी दूषित है. यदि लोग उसे पी रहे हैं, तो जाहिर है कि वे पानी से होने वाली बीमारियों से ही ग्रसित होंगे.’ एनजीटी की न्यायपीठ ने सभी दूषित हैंडपंपों को हटाने और प्रभावित गांवों को साफ पेयजल मुहैया कराने के आदेश दिए हैं. उसने यूपी सरकार को यह आदेश भी दिया कि क्षेत्र में ‘बीमारियों के कारण का पूरा जवाब वैज्ञानिक दें.’

उसने राज्य प्रशासन को सारे तथ्य रिकार्ड पर लाने के लिए एक आम हलफनामा पेश करने को कहा. अगली सुनवाई की तारीख 21 अक्टूबर है. एनजीटी के बाहर यूपी जल निगम के प्रबंध निदेशक प्रेम असुदानी ने कैच को बताया कि उन्होंने बागपत के 6 गांवों में पानी के टैंकर भेजने शुरू कर दिए हैं. दूषित पानी से प्रभावित बाकी के 51 गांवों में से 21 को पाइप से पानी दिया जा रहा है. शेष 30 गांवों में जल आपूर्ति के लिए राज्य सरकार से निगम को 40 करोड़ रुपए मिले हैं.

छह गांव जहां टैंकर भेजे जा रहे हैं, सितंबर के अंत तक निगम की ओर से वहां सोलर ट्यूबवेल लगवाए जाएंगे. उन्होंने आगे कहा कि निगम को राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम से राशि मिलती थी. यह वह योजना है, जिसे आंशिक रूप से केंद्र सरकार राशि देती है, पर यह राशि कम पड़ रही थी, इसलिए उन्होंने राज्य के कोष से पैसा लेना तय किया है.

असुदानी ने कहा, ‘हमारी सबसे पहली प्राथमिकता दूषित जल से प्रभावित गांव हैं.’

कैच ने पेयजल के संकट से गुजर रहे बागपत के गांव पर पहले भी एक स्टोरी लिखी थी. स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत शौचालय के लिए राशि उपलब्ध होने के बावजूद राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के प्रोजेक्ट्स सुस्त पड़ रहे हैं. दोनों प्रोजेक्ट्स पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के अधीन आते हैं. एनडीए सरकार के अधीन मंत्रालय ने पेयजल की योजना से ज्यादा स्वच्छ भारत कार्यक्रम को प्राथमिकता दी है.

First published: 9 September 2016, 8:03 IST
 
निहार गोखले @nihargokhale

Nihar is a reporter with Catch, writing about the environment, water, and other public policy matters. He wrote about stock markets for a business daily before pursuing an interdisciplinary Master's degree in environmental and ecological economics. He likes listening to classical, folk and jazz music and dreams of learning to play the saxophone.

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