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यूरो कप 2016 में हुई हिंसा के लिए रूस पर लगा मोटा जुर्माना, बाहर होने के कगार पर

रंजन क्रास्टा | Updated on: 20 June 2016, 13:37 IST

यूईएफए ने मंगलवार को रूस के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए संदेश दिया कि अगर अब दर्शकों की भीड़ में कोई भी हिंसा हुई तो रूस को यूरो कप 2016 से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा. 

यूईएफए ने न केवल इसे निलंबित अयोग्यता करार दिया बल्कि यह भी कहा कि अगर आगे रूसी प्रशंसकों द्वारा जरा सी भी हिंसा की गई तो उन्हें तत्काल प्रभाव से टूर्नामेंट से बाहर का रास्ता दिखा दिया दिया जाएगा. इसके साथ ही रसियन फुटबॉल एसोसिएशन पर 1 लाख 50 हजार यूरो का जुर्माना भी लगाया गया है.

घटना

यह दंड ग्रुप बी में इंग्लैंड और रूस के बीच हुए मैच के दौरान हुई हिंसा के कुछ दिन बाद आया है. रविवार को दोनों टीमों के बीच खेले गए मैच के दौरान हुए ड्रॉ के बाद दोनों देशों के प्रशंसकों के बीच हिंसा भड़क उठी थी. 

रूसी प्रशंसकों की इस हिंसा से टेलीविजन पर मैच देखने वाले दर्शक भी सिहर उठे थे. उन्होंने देखा कि कैसे वे इंग्लैंड के प्रशंसकों यहां तक महिलाओं और बच्चों को भी पीट रहे थे.

इतना ही नहीं मैच के बाद यह हिंसा मर्सिले की गलियों तक पहुंच गई और यहां रूसी और अंग्रेज प्रशंसकों के बीच जमकर मारपीट हुई. इस हिंसा की तस्वीरें और वीडियो ने दुनिया भर में दहशत का वह नजारा पहुंचाया.

केवल रूस ही क्यों?

फ्रांसीसी पुलिस ने इस घटना का आरोप 150 'पूर्णतया प्रशिक्षित' रूसी बदमाशों पर लगाया है. 29 रूसी 'प्रशंसकों' को फ्रांस से बाहर निकाल दिया गया है जबकि कई अन्य को जल्द ही बाहर निकालने की तैयारी है.

जहां एक फ्रांसीसी अदालत ने रूसी और इंग्लैंड के 10 लोगों को एक साल तक की जेल की सजा सुनाई है, यूईएफए की कार्रवाई केवल रूस के लिए ही है.

इस झड़प में दोनों देशों के प्रशंसकों के शामिल होने के बावजूद स्टेडियम के भीतर हुई हिंसा के लिए रूस को ही यूईएफए की अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ा. 

रूसी प्रशंसक स्टेडियम के भीतर आतिशबाजी और फुलझड़ी भी ले गए थे. वे नस्लीय टिप्पणियां भी कर रहे थे जिसने रूसी फुटबॉल क्लब को बदनाम कर दिया.

जुर्माने और निलंबित अयोग्यता के अलावा रूस के सामने यूरो 2020 की क्वॉलीफाइंग कैंपेन में अंक कटौती की भी संभावना है. 

खतरे में रूस 2018?

सोवियत राष्ट्र के लिए सबसे ज्यादा गंभीर बात यह है कि रूस में होने वाले 2018 फीफा वर्ल्ड कप की भी अब समीक्षा की जाएगी. जिस आयोजन की भारी सफलता को लेकर रूस को काफी उम्मीदें थी, उस पर अब सुरक्षा संबंधी खतरा मंडराने लगा है.

इस घटना के बारे में ब्रिटिश होम सेक्रेटरी थेरेसा मे ने कहा, "हमारा ध्यान फिलहाल 2016 पर ही केंद्रित है. इसके बाद की चीजों को भी हम गंभीरता से देखेंगे (विश्वकप के बारे में). किसी का भी समर्थन करने वाले कोई भी प्रशंसक जो इन खेलों के दौरान हिंसा में लिप्त रहे, वे न केवल खुद को नीचा दिखा रहे हैं बल्कि कानून की इज्जत करने वालों को भी (नीचा दिखा रहे हैं)."

First published: 20 June 2016, 13:37 IST
 
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