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हैकर्स ने ATM इस्तेमाल करने के बाद मशीन से 100 लोगों की डिटेल चुराकर उड़ा दिए 15 लाख रुपये

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 July 2018, 12:21 IST
(सांकेतिक फोटो)

गुड़गांव के सेक्टर-45 स्थित एचडीएफसी बैंक की शाखा के एटीएम से छेड़छाड़ कर 100 लोगों के अकाउंट से करीब 15 लाख रुपये निकालने का मामला सामने आया है. एचडीएफसी ने अकाउंट हैक कर पैसे निकालने की शिकायत पुलिस को दी है. पुलिस मामले की जांच कर रही है.

एचडीएफसी बैंक के अमित साहनी ने पुलिस शिकायत में बताया कि बैंक के ग्राहकों ने पैसे निकलने की शिकायत दी है. बैंक खाताधारकों का कहना है कि एटीएम उनके पास होने के बाद भी उनके अकाउंट से पैसे निकाल लिए गए हैं.

बैंक ने शिकायत में कहा कि ग्राहकों के खातों से पैसे निकलने की शिकायत मिलने के बाद बैंक ने अपने स्तर पर मामले की जांच की. जांच में पता चला कि 1 मई 2018 से रुपये ट्रांसफर होने शुरू हुए. सभी के खातों में एक बात समान थी कि सबके खातों से मार्च व अप्रैल महीने में सेक्टर-45 स्थित बैंक शाखा के एटीएम से ट्रांजैक्शन किया गया है.

बैंक की तरफ से शिकायत में कहा गया है कि मार्च में 12, 23 व अप्रैल महीने में 6, 8, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 23, 26 और 29 तारीख को एटीएम से किसी ने छेड़छाड़ कर ग्राहकों का डेटा चुराया गया है. इन दिनों जिन ग्राहकों ने सेक्टर-45 स्थित एचडीएफसी बैंक के एटीएम से ट्रांजैक्शन किया है. उनके खाते से बाद में पैसा निकाला गया है.

बैंक इस पूरे मामले के सीसीटीवी फुटेज निकाल रही है. उसकी जांच के बाद मामले से पर्दा उठने की उम्मीद है. पुलिस ने धोखे से खाते से रुपये चुराने व आईटी एक्ट के आरोप में अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है. पुलिस जांच कर ठग की पहचान करने का प्रयास रही है.

ऐसे होती है धोखाधड़ी

साइबर क्राइम मामलों के जानकारों का कहना है कि एटीएम में कार्ड डालने वाले स्लॉट के ऊपर उसी तरह का एक स्कीमर (एटीएम कार्ड का डेटा चोरी करने वाली मशीन) लगा दिया जाता है. इस मशीन में एक चुप होती है. वहीं, पिन नंबर डालने वाली जगह पर एक एचडी कैमरा लगा दिया जाता है. जब कोई अपना एटीएम कार्ड एटीएम में डालता है, तो स्कीमर में लगी चिप में एटीएम का डेटा सेव हो जाता है. जबकि कैमरे में पिन सेव हो जाता है.

एक बार एटीएम में चिप व कैमरा लगाने के बाद कई दिनों तक ठग उसे नहीं हटाते. जब काफी डेटा एकत्र होने के बाद चिप को हटा लिया जाता है. इसके बाद मशीन से क्लोन कार्ड बना लिए जाते हैं. इस मशीन में किसी भी एटीएम कार्ड में सेव डाटा को डिलीट कर दिया जाता है.

उसकी जगह पर एटीएम मशीन में स्कीमर चिप से चुराए गए एक कार्ड के डेटा को इस खाली एटीएम कार्ड में रीड कर दिया जाता है. इस तरह से ठगों द्वारा एटीएम से पैसा निकाल लिया जाता है. साइबर जानकारों का कहना है कि एटीएम का नंबरल बदलते रहना चाहिए.

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First published: 12 July 2018, 12:08 IST
 
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