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अशोक खेमका ने क्यों भेजा WhatsApp पर समन?

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 April 2017, 13:15 IST

अपनी ईमानदारी के लिए देश में मशहूर आईएएस अधिकारी अशोक खेमका ने एक बार फिर नई मिसाल कायम की है. जिस कारण वो फिर सुर्खियों में आ गए हैं. लोग उनके इस काम की पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया पर जोर से देख रहे हैं. हरियाणा के वित्त आयुक्त की कोर्ट  ने ज़मीन विवाद में एक पक्ष को व्हाट्सऐप के जरिए समन भेजा है. उस कोर्ट के मुख्य अधिकारी आईएस अशोक खेमका हैं.

मामला हरियाणा के हिसार जिले में एक गांव का है. यहां लंबे समय से तीन भाइयों के बीच संपत्ति का विवाद चल रहा है. ये मामला वित्त आयुक्त की कोर्ट में पहुंचा था. आईएएस अशोक खेमका की कोर्ट ने व्हाट्सऐप के जरिए इस मामले के एक पक्ष को पेशी के लिए समन भेजा था. क्योंकि वो व्यक्ति जिस गांव में रहता था, उसे छोड़कर वो काठमांडू चला गया है. उसका स्थानीय पता अदालत के पास नहीं था और किसी भी दूसरे पक्ष को उसके नए पते की जानकारी भी नहीं थी.

कोर्ट के पास था तो सिर्फ उसका मोबाइल फोन. उस व्यक्ति का मोबाइल नंबर होने की वजह से कोर्ट ने उसे व्हाट्सऐप के जरिए समन भेजा. कोर्ट का समन मिलने के बाद उस व्यक्ति ने कोर्ट में पेश होने से न सिर्फ इनकार कर दिया, बल्कि अपना काठमांडू का पता भी देने से मना कर दिया.

अशोक खेमका की कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि स्थानीय पता जरूरी नहीं कि हमेशा स्थानीय रहे, लेकिन ई-मेल और मोबाइल फोन नंबर इसकी तुलना में ज्यादा स्थायी होते हैं. ऐसे में फोन या ईमेल से भी किसी को समन भेजा जा सकता है. कोर्ट अब तक समन रजिस्टर्ड डाक से भेजता था.

जब इस केस की सुनवाई कर रहे अशोक खेमका से इसके बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "टेक्नोलॉजी के इस युग में हमें कानूनी  कार्यवाही को भी इस ओर ले जाना होगा. कोर्ट ने आदेश दिया कि कोर्ट की सील के साथ समन की तस्वीर को उसके नंबर पर भेजा जाए और व्हाट्सऐप पर की डिलीवरी रिपोर्ट को सबूत के तौर पर माना जाएगा."

अशोक खेमका वो ही अधिकारी हैं, जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के कथित जमीन घोटाले का पर्दाफाश किया था.

First published: 10 April 2017, 12:31 IST
 
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