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खट्टर सरकार में IAS खेमका का 6वीं बार तबादला, अरावली में निर्माण पर उठाये थे सवाल

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 March 2019, 13:10 IST

हरियाणा सरकार ने रविवार को नौ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के लिए तत्काल प्रभाव से स्थानांतरण और पोस्टिंग के आदेश जारी किए, जिसमें 1991-बैच के वरिष्ठ नौकरशाह अशोक खेमका शामिल है. मंत्री अनिल विज की अध्यक्षता में खेमका खेल और युवा मामलों के विभाग के प्रधान सचिव थे. अब खेमका को विज्ञान और टेक्नोलॉजी का प्रधान सचिव बनाया गया है. 2014 में वर्तमान भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से खेमका का छह बार तबादला हो चुका है. उनकी 27 वर्षों की सक्रिय सेवा में, उनका 50 से अधिक बार स्थानांतरण हो चुका है.

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार मुख्य सचिव डीएस ढेसी द्वारा जारी किए गए स्थानांतरण आदेश में कोई तबादले का कारण नहीं बताया गया है. हरियाणा भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता रमन मलिक ने कहा, “वह (खेमका) एक अच्छे इंसान हैं. मुझे उम्मीद है कि वह राज्य में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के नए आयाम लाएंगे.” रिपोर्ट के अनुसार खेमका का तबादला इसलिए किया गया क्योंकि उन्होंने राज्य सरकार के उस कदम की आलोचना की थी जिसमे अरावली पहाड़ियों में निर्माण की अनुमति के नियमों को बदलाव किया गया था.

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को फैसले को चौंकाने वाला बताते हुए संशोधनों को पारित करने के लिए राज्य सरकार की आलोचना की थी. हरियाणा सरकार ने हाल ही में खेमका द्वारा जारी एक आदेश को भी रद्द कर दिया था जिसमें उन्होंने फरीदाबाद के कोट गांव में 3,184 एकड़ जमीन की समेकन प्रक्रिया को वापस ले लिया था, जिसमें एक जांच के बाद पता चला था कि 2,565 एकड़ जमीन अरावली घाटी क्षेत्र में थी.

खेमका ने कहा था कि राज्य सरकार का निर्णय समेकन के नाम पर अरावली की पहाड़ियों और जंगलों को नष्ट कर देगा. रिपोर्ट के अनुसार "उन्होंने कहा कि अरावली के इको-सेंसटिव क्षेत्र में समेकन की कार्यवाही कृषि उत्पादकता में वृद्धि नहीं करेगी. खेमका ने पहली बार 2012 पहली बार तब सुर्ख़ियों में आयी थे जब उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की फर्म और रियल एस्टेट दिग्गज डीएलएफ से जुड़े एक भूमि सौदे को रद्द कर दिया था. हरियाणा में कांग्रेस शासित सरकार ने खेमा के खिलाफ इस सौदे को गलत तरीके से रद्द करने के लिए आरोप पत्र दायर किया था, लेकिन 2014 में राज्य की सत्ता में आने पर भाजपा सरकार ने आरोप पत्र को हटा दिया था.

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First published: 4 March 2019, 13:11 IST
 
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