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कैंसर नहीं मानसिक रोग बन रहे हैं दुनियाभर के लिए मुसीबत, खर्चा 80,000 करोड़ के पार

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 March 2019, 17:18 IST

ऐसे समय में जब भारत जैसा विकासशील देश कैंसर, हृदय संबंधी विकारों, मधुमेह और मोटापे के बढ़ते मामलों से प्रभावित हैं, ऐसे में मनोभ्रंश और अल्जाइमर जैसे मामले विकसित यूरोपीय देशों के बीच चिंता का कारण बन रहे हैं. यूरोपीय देशों में संज्ञानात्मक विकारों का कुल रोग भार लगभग 800 बिलियन यूरो (80,000 करोड़ रुपये) है, जबकि हृदय संबंधी विकार 200 बिलियन यूरो (20,000 करोड़ रुपये) और कैंसर का 100 बिलियन यूरो (10,000 करोड़ रुपये) आंका गया है.

दुनिया में चालीस मिलियन लोग वर्तमान में अल्जाइमर के साथ रह रहे हैं और यह आंकड़ा 2050 तक 150 मिलियन को छूने की संभावना है. अल्जाइमर विश्व स्तर पर संज्ञानात्मक-संबंधित मामलों के 50 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार है और जर्मनी में मनोभ्रंश का प्रमुख कारण है. ऐसे मामलों में स्पाइक के साथ, जर्मन शोधकर्ता अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और संबद्ध उन्नत तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं ताकि बिगड़ते मानसिक स्वास्थ्य के संकेतों का पता लगाने के लिए उपकरण विकसित किए जा सकें.

 

जर्मनी के सारब्रुकन में वैज्ञानिकों की एक टीम ने विशेष रूप से बुजुर्ग लोगों के लिए एक व्यापक फ्रंटलाइन स्क्रीनिंग टूल, डेल्टा तैयार किया है. उपकरण भाषण-आधारित तकनीकों का उपयोग करता है.

भारत में मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों में भर्ती होने वाले कम से कम 14 प्रतिशत रोगियों को पांच साल से अधिक समय तक चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि अन्य 24 प्रतिशत को 1 से 5 साल के बीच इसी तरह की देखभाल की आवश्यकता होती है.

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First published: 18 March 2019, 17:19 IST
 
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