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इस बड़ी बीमारी से हर तीन मिनट में होती है एक व्यक्ति की मौत, ये है कारण

न्यूज एजेंसी | Updated on: 28 April 2018, 12:38 IST

आरामतलब जीवन शैली, मोटापा, जंक फूड का सेवन और तनाव के कारण युवाओं में भी ब्रेन स्ट्रोक के मामले में वृद्धि हो रही है. लेकिन इसका इलाज नहीं कराने पर दिमागी कोशिकाओं और आवाज को नुकसान हो सकता है. जिससे मरीज जीवन भर के लिए विकलांग बन सकता है.

फोर्टिस अस्पताल (नोएडा) में न्यूरोसर्जरी विभाग के अतिरिक्त निदेशक एवं वरिष्ठ न्यूरो एवं स्पाइन सर्जन डॉ. राहुल गुप्ता ने अस्पताल द्वारा आयोजित एक विशेष सत्र में कहा, "कुछ समय पहले तक युवाओं में स्ट्रोक के मामले सुनने में नहीं आते थे, लेकिन अब युवाओं में भी ब्रेन स्ट्रोक अपवाद नहीं है.

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युवाओं में स्ट्रोक के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, ब्लड शुगर, उच्च कोलेस्ट्रॉल, शराब, धूम्रपान और मादक पदार्थों की लत है. युवा रोगियों में यह अधिक घातक साबित होता है, क्योंकि यह उन्हें जीवन भर के लिए विकलांग बना सकता है."

वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ज्योति बाला शर्मा ने कहा, "देश में हर साल ब्रेन स्ट्रोक के लगभग 15 लाख नए मामले दर्ज किए जाते हैं. स्ट्रोक भारत में समय से पहले मृत्यु और विकलांगता का एक महत्वपूर्ण कारण बनता जा रहा है. दुनिया भर में हर साल स्ट्रोक से 2 करोड़ लोग पीड़ित होते हैं, जिनमें से 50 लाख लोगों की मौत हो जाती है और अन्य 50 लाख लोग अपाहिज हो जाते हैं."

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफार्मेशन (एनसीबीआई) के अनुसार, कोरोनरी धमनी रोग के बाद स्ट्रोक मौत का सबसे आम कारण है. इसके अलावा यह 'क्रोनिक एडल्ट डिसएबिलिटी' का एक आम कारण है. 55 वर्ष की आयु के बाद 5 में से एक महिला को और 6 में से एक पुरुष को स्ट्रोक का खतरा रहता है. भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान संस्थान परिषद (ICMR) के एक अध्ययन के अनुसार, हमारे देश में हर तीन सेकेंड में किसी न किसी व्यक्ति को ब्रेन स्ट्रोक होता है और हर तीन मिनट में ब्रेन स्ट्रोक के कारण किसी न किसी व्यक्ति की मौत होती है.

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डॉ. राहुल गुप्ता ने कहा, "ब्रेन अटैक के नाम से भी जाना जाने वाला ब्रेन स्ट्रोक भारत में कैंसर के बाद मौत का दूसरा प्रमुख कारण है. मस्तिष्क के किसी हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित होने या गंभीर रूप से कम होने के कारण स्ट्रोक होता है. मस्तिष्क के ऊतकों में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की कमी होने पर कुछ ही मिनटों में मस्तिष्क की कोशिकाएं मृत होने लगती हैं जिसके कारण मृत्यु या स्थायी विकलांगता हो सकती है."

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डॉ. ज्योति बाला शर्मा ने कहा, "इलाज में देरी होने पर लाखों न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं और मस्तिष्क के अधिकतर कार्य प्रभावित होते हैं. इसलिए रोगी को समय पर चिकित्सा सहायता प्रदान करना महत्वपूर्ण है क्योंकि स्ट्रोक होने पर शीघ्र बहुआयामी उपचार की आवश्यकता होती है."उन्होंने कहा, "स्ट्रोक का इलाज किया जा सकता है. स्ट्रोक के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात समय का सदुपयोग है. एक स्ट्रोक के बाद हर दूसरे स्ट्रोक में अत्यधिक मस्तिष्क कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है. इसलिए स्ट्रोक होने पर रोगियों को निकटतम स्ट्रोक उपचार केंद्र में जल्द से जल्द ले जाया जाना चाहिए."

First published: 28 April 2018, 12:38 IST
 
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