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ज्यादा पानी पीने से जा सकती है आपकी जान, रिसर्च में हुआ ये बड़ा खुलासा

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 April 2019, 13:12 IST

हम बचपन से सुनते आ रहे हैं ''जल ही जीवन है'' इसलिए ज़्यादा पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है. आज सिर्फ भारत ही नहीं अमेरिका और ब्रिटेन के लोग भी ख़ूब पानी पी रहे हैं. लोगों को ज्यादा से ज्यादा पानी पीने की सलाह दी जा रही है कहीं इसे चमकीली त्वचा का राज बताया जा रहा है तो कहीं वज़न घटाने के नुस्ख़े के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है. लेकिन कई रिसर्च में ये प्रूफ हो चुका है कि ज्यादा पानी पीना घातक हो सकता है और यहां तक कि जान भी जा सकती है.

8 गिलास यानी 2 लीटर पानी का भ्रम

पूरी दुनिया में रोजाना 8 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है लेकिन साइंस के मुताबिक ये भ्रम है. जानकार मानते हैं कि हमें पानी की उतनी ही ज़रूरत है, जितना शरीर मांगे. पानी हमारे शरीर के लिए जरुरी है यह हमारे बॉडी के तापमान को नियंत्रित करने के साथ-साथ शरीर के भीतर होने वाले बहुत से केमिकल रिएक्शन को भी अंजाम देता है. शरीर में 1-2 प्रतिशत पानी कम हो जाता है तो हम डिहाइड्रेशन के शिकार हो जाते हैं.

ज्यादा पानी हो सकता है जानलेवा

जो लोग दिन भर में 8 ग्लास (240ML-1 ग्लास) पानी पीते हैं, उन्हें कोई नुक़सान नहीं है. लेकिन बगैर प्यास के हमेशा पानी पीते रहने के कुछ गंभीर नुक़सान ज़रूर हो सकते हैं. ज्यादा पानी पीने से शरीर में सोडियम की कमी हो जाती है. सोडियम की कमी होने से दिमाग़ और फेफड़ों में सूजन आ जाती है. कई डॉक्टर कहतें हैं कि हम शरीर के संकेतों को दरकिनार कर अपने मन से पानी पीने लगते हैं, तो ये हानि कर सकता है.

ज्यादा पानी पीकर एथलीट हुई थीं बेहोश

ज्यादा पानी पीने से क्या समस्या उत्पन्न हो सकती है इसके लिए अगर देखें तो उदाहरण के तौर पर ब्रिटेन की एथलीट जोहाना पैकेनहैम ने साल 2018 की लंदन मैराथन में भाग लिया था. उस दौरान भयंकर गर्मी की वजह से उन्होंने ख़ूब पानी पिया. दौड़ ख़त्म होने के बाद भी उनके सहकर्मियों ने उन्हें खूब पानी पिला दिया. फिर वो पानी ज़्यादा होने की वजह से बेहोश हो गईं और उन्हें तत्काल हॉस्पिटल ले जाना पड़ा जहां 2 दिन तक बेहोश रही थीं. जोहाना ने बताया कि उनका हरेक परिचित मैराथन दौड़ने के लिए एक ही सलाह देता था-ढेर सारा पानी पियो लेकिन ये बिन मांगे मशविरे की तरह जानलेवा हो सकते हैं.

कितना पानी पिएं

अमरीका की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ इर्विन रोज़ेनबर्ग के मुताबिक पानी की मात्रा के संतुलन को बनाना इंसान के शरीर ने हज़ारों साल की विकास प्रक्रिया में सीखा है. इसलिए जब प्यास लगे तब पानी पिएं, इसकी कोई मात्रा निर्धारित नहीं की गई है न ही अब तक साइंस ने कोई ऐसा पैमाना बनाया है.

किसी भी स्वस्थ शरीर को अगर पानी की ज़रूरत होती है तो तुरंत दिमाग़ को पता चल जाता है. दिमाग इंसान को प्यास लगने का संकेत देता है इसके अलावा दिमाग से ऐसा हारमोन निकलता है जो किडनी (गुर्दों) को निर्देश देता है कि वह पेशाब को गाढ़ा करे और शरीर से पानी निकालना कम कर पानी बचाए.

First published: 21 April 2019, 13:11 IST
 
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