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खुशखबरी : भारत में पैदा होने वाले ज्यादातर बच्चे अब ढाई किलो से ज्यादा वजन वाले हैं

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 February 2018, 15:53 IST

भारत अब जन्म के समय शिशुओं का वजन पहले के मुकाबले बढ़ा है. इसका मतलब यह है कि लोग अब गर्भवती महिलाओं के स्वस्थ्य को लेकर जागरूक हो रहे हैं. इसके पीछे एक वजह बढ़ती शिक्षा और समृद्धि भी है. इंडिया स्पेंड की रिपोर्ट के अनुसार राष्ट्रीय स्वास्थ्य के आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच साल वर्षों (2010-15) में केवल 18 फीसदी जीवित बच्चों का वजन जन्म के समय कम था. ये आंकड़े एक दशक पहले के आंकड़ों की तुलना में 22 फीसदी कम हैं.

अक्सर 2.5 किलो से कम वजन वाले शिशु को बचपन की बीमारी और मृत्यु दर के प्रारंभिक जोखिम के रूप में देखा जाता है. जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों की सबसे ज्यादा प्रतिशत दिल्ली की राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से रिपोर्ट की गई है, जैसा कि 12 जनवरी, 2018 को जारी गई राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण, 2015-16 (एनएफएचएस -4) की अंतिम रिपोर्ट से पता चलता है.

एनएफएचएस -4 की रिपोर्ट में कहा गया है, “जिन बच्चों का वजन जन्म के समय 2.5 किलो से भी कम है, उनकी बचपन में मृत्यु का सबसे ज्यादा जोखिम होता है.” 1992 में शुरू किया गया एनएफएचएस परिवार कल्याण, मातृ एवं बाल स्वास्थ्य, पोषण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों जैसे संकेतकों पर राष्ट्रीय आंकड़ों का एक महत्वपूर्ण स्रोत है.

ऐसी माताओं के साथ बच्चों का जन्म के समय वजन बढ़ने का मां की शिक्षा और समृद्दि से जुड़ा है. एनएफएचएस -4 सर्वेक्षण से पहले पांच साल (2010-15) में 249, 949 जीवित जन्मों में से, 78 फीसदी या 194,833 जन्मों में जन्म के समय बच्चे के वजन का एक लिखित रिकॉर्ड था या माता बच्चे के वजन को याद करने में सक्षम थी। यह आंकड़े एनएफएचएस -3 (2005-06) के आंकड़ों से 34 फीसदी ज्यादा है और यह बढ़ती जागरूकता का संकेत है.

12 या उससे अधिक वर्षों की शिक्षा वाली मांओं में केवल 15 फीसदी बच्चों का जन्म के समय कम वजन था, जबकि बिना किसी शिक्षा वाली माताओं में ये आंकड़े 20 फीसदी थे.

शिक्षित माताओं से जन्म होने वाले बच्चों के जीवित रहने की संभावना अधिक होती है. ऐसी माताएं जिन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं, उनके बीच पांच वर्षों से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर( पांच वर्ष की आयु के भीतर प्रति 1,000 जीवित जन्मों पर मौत की संख्या ) 67.5 रहा है जबकि 12 या अधिक सालों तक शिक्षा प्राप्त मांओं के बीच ये आंकड़े आधे ( 26.5) रहे हैं। इस संबंध में इंडियास्पेंड ने 16 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में विस्तार से बताया है.

भारत की आबादी का लगभग एक-तिहाई या 33.6 फीसदी किशोर गर्भधारण से पैदा होता है, जैसा कि इंडियास्पेंड ने 12 जनवरी, 2018 की रिपोर्ट में बताया है.

First published: 13 February 2018, 15:53 IST
 
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