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Fact Check: क्या गौमूत्र से संभव है सभी तरह के कैंसर का इलाज?

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 April 2019, 16:41 IST

बीजेपी की लोकसभा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा ने कहा था कि गौमूत्र पीने की वजह से मेरे कैंसर का इलाज हुआ है. इस बयान के बाद से साध्वी कई नेताओं के निशाने पर आए.  लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या गौमूत्र से सच में कैंसर का इलाज संभव है. चलिए इस विषय पर विस्तृत रूप से चर्चा करते हैं.

सबसे पहले हम आपको बता दें कि साध्वी के बयान की हम बात करते हैं, तो उनके इस बयान के बाद साध्वी प्रज्ञा के इलाज का दावा करने वाले डॉ. एसएस राजपूत ने एक निजी वेबसाइट को इंटरव्‍यू देते हुए बताया कि साध्‍वी प्रज्ञा ठाकुर के ब्रेस्‍ट कैंसर का इलाज गोमूत्र से नहीं बल्कि सर्जरी से किया गया.

क्‍या है कैंसर

हमारा शरीर कई तरह की कोशिकाओं से मिलकर बना होता है. इन कोशिकाओं में वृद्धि और नियंत्रित रूप से विभाजित होना ये दर्शाता है कि हमारा शरीर स्वस्थ्य है. जब पुरानी कोशिकाएं मर जाती हैं, तो नई कोशिकाएं अपने आप बनने लगती हैं. लेकिन कभी-कभी ये प्रक्रियाएं अव्यवस्थित भी होती हैं. जब हमारे कोशिकाओं की आनुवंशिक सामग्री (डीएनए) क्षतिग्रस्त होने लगती हैं या फिर ये बदलने लगती हैं, तो इसमें उससे उत्परिवर्तन (म्युटेशन) पैदा होने लगता है, जो कोशिकाओं के विकास और विभाजन बाधा डालने लगता है.

कभी-कभी इन कोशिकाओं में ऐसा होता है कि पुरानी कोशिकाएं मरती नहीं हैं, लेकिन नई कोशिकाएं पैदा होती हैं. धीरे-धीरे जब मरी हुई कोशिकाएं शरीर में इकट्ठा होने लगती हैं, तो ये ट्यूमर का रूप धारण कर लेती हैं. हालांक सभी ट्यूमर कैंसर नहीं होते, लेकिन ये ट्यूमर हमारे लिए घातक हो सकते हैं. अगर ट्यूमर का सही समय पर पता नहीं चला, तो कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है.

जब हमारे शरीर में कैंसर का इलाज चल रहा होता है, तो इन्हीं कोशिकाओं के खत्म होने का इलाज किया जाता है. डॉक्टर्स इन कोशिकाओं को सर्जरी, रेडिएशन थेरेपी, जीवाणु थेरेपी, किमोथेरेपी और जैविक थेरेपी के जरिए खत्म करने की कोशिश करते हैं.

गौमूत्र में कौन-कौन से तत्व होते हैं मौजूद

इस बात में कोई संदेह नहीं है कि गौमूत्र एक आयुर्वेद औषधि है. गौमूत्र में रोगाणु रोधक (antiseptic), प्रतिजैविक, ज्वरनाशी (antipyretic), प्रतिजीवाणु (antibacterial) और कवकरोधी (antifungal) तत्‍व पाए जाते हैं.

आयुर्वेद के मुताबिक, गौमूत्र में निओप्लासटन विरोधी, डीरेकटिन, 3 मेथोक्सी, एच -11 आयोडोल – एसेटिक अम्ल इत्यादि किमोथेरेपीक औषधियों से अलग होते हैं. ये सभी तत्व कोशिकाओं को हानि और नष्ट करते हैं.

 

गौमूत्र समर्थकों का दावा

गुजरात के जूनागढ़ विश्वविद्यालय के बायोटेक्नॉलजी वैज्ञानिकों ने पिछले साल गौमूत्र के समर्थन में दावा करते हुए कहा था कि गोमूत्र से कैंसर का इलाज किया जा सकता है. हालांकि इसकी अब तक कोई केस हिस्ट्री पेश नहीं की गई. अब तक कोई ऐसा केस सामने नहीं आया है, जिससे ये दावा किया जा सके कि सिर्फ गौमूत्र से कैंसर का इलाज किया जा सकता है.

एक्‍सपर्ट की राय

गौमूत्र को लेकर हुई इस दुविधा को लेकर मेडिकल एंड पीडियाट्रिक ऑन्कॉलजी के एसोसिएट प्रोफेसर वेंकटरमन राधाकृष्णन ने पिछले साल अपनी एक पोस्‍ट लिखी. अपने अपने पोस्ट में लिखा था कि सिर्फ गौमूत्र के पीने से कैंसर का इलाज संभव नहीं है.

उन्होंने लिखा, "मैंने और मेरे साथी ऑन्कॉलजिस्ट ने अभी तक एक भी ऐसा कैंसर का मरीज़ नहीं देखा जिसने सिर्फ गौमूत्र पिया हो और उसका कैंसर ठीक हो गया हो." उन्होंने आगे लिखा, "गौमूत्र आदमी के मूत्र से अलग नहीं है. इसमें 95 फीसदी पानी के अलावा सोडियम, पोटेशियम, फास्फोरस और क्रेटिनिन जैसे खनिज होते हैं. इनमें से कोई भी कैंसर-रोधी तत्व नहीं है." आगे उन्होंने लिखा, "गोमूत्र खेतों में डालने वाली चीज़ है ताकि उन्हें उपजाऊ बनाया जा सके न कि इसे बोतल में भरकर कैंसर की दवा के रूप में बेचना चाहिए."

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First published: 29 April 2019, 16:41 IST
 
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