Home » हेल्थ केयर टिप्स » Know About Brugada Syndrome And Risk Factors On Heart Rhythm Disorder
 

युवाओं में 30 साल की उम्र के बाद तेजी से बढ़ रहा है ब्रुगाडा सिंड्रोम का खतरा

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 August 2018, 16:40 IST

बढ़ती उम्र में बीमारियों का बढ़ना भी शुरु हो जाता है. ऐसे में अगर अपने स्वास्थ्य की ठीक से देखभाल ना की जाए तो इंसान खतरनाक बीमारियों से पीड़ित हो सकता है. लेकिन अब तो मात्र 30 साल की उम्र के बाद से ही युवाओं में एक बीमारी तेजी से फैलने लगी है, इस बीमारी का नाम है ब्रुगाडा सिंड्रोम. ब्रुगाडा सिंड्रोम दिल से जुड़ी एक बीमारी है. जिसके संकेत 30 से 40 साल की उम्र में ही दिखने लगते हैं.

वहीं कई बार इसके लक्षण बचपन में भी दिखाई देने लगते हैं. इस बीमारी के मुख्य लक्षण बेहोश होना, दिल का दौरा, हार्ट ब्लॉक आदि है. इस सिंड्रोम की वजह से कभी-कभी मरीज का दिल जोर से धड़कने लगता है.

क्या है ब्रुगाडा सिंड्रोम

ब्रुगाडा सिंड्रोम असामान्‍य लेकिन दिल के लिए एक गंभीर स्थिति है. इस समस्‍या में इंसान को अक्‍सर बेहोशी या दिल की धड़कन असामान्‍य रूप से तेज हो जाती है. यह समस्‍या तब होती है जब दिल की विद्युतीय गतिविधि बाधित हो जाती है. आमतौर पर ये बीमारी अनुवांशिक होती है लेकिन कई बार अनियमित जीवनशैली भी इसकी वजह बन सकती है. कई बार ये रोग खतरनाक और जानलेवा भी हो सकता है.
कितना खतरनाक है ब्रुगाडा सिंड्रोम

ब्रुगाडा सिंड्रोम युवाओं में अचानक हृदय संबंधी मौत का कारण बन रहा है. आमतौर पर अचानक दिल की धड़कन का घटना या बढ़ना इस खतरनाक सिंड्रोम का एक प्रमुख कारण होती है. कुछ मामलों में शिशुओं की अचानक मृत्‍यु का कारण भी ये सिंड्रोम ही होता है. इसके अलावा कम उम्र के बच्चों की अचनाक मौत का भी ये एक प्रमुख कारण है. बता दें कि ब्रूगाडा सिंड्रोम से होने वाली ज्‍यादातर मौतें बिना किसी चेतावनी या संकेत के होती हैं.

पुरुषों में ज्यादा फैल रही ये बीमारी

ब्रूगाडा सिंड्रोम आमतौर पर युवा और मध्‍यम आयु वर्ग के पुरुषों को प्रभावित करती है. महिलाओं की अपेक्षा पुरुषों में इस सिंड्रोम से प्रभावित होने का खतरा ज्यादा होता है, क्योंकि इस सिंड्रोम में मेल हार्मोन यानी टेस्टोस्टेरॉन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.

 

कैसे करें ब्रुगाडा सिंड्रोम की जांच

आमतौर पर दिल की धड़कन के घटने या बढ़ने पर आपको तुरंत किसी अच्छे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. हृदय रोग विशेषज्ञ कुछ लक्षणों के द्वारा इसका अनुमान लगाते हैं. इसके बाद वो जांच के लिए ईसीजी और जेनेटिक परीक्षण करते हैं. ईसीजी में दिल की धड़कन और दिल की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड किया जाता है.

ये भी पढ़ें- वजन कम करने के लिए रोजाना खाएं ये चीज, चंद दिनों में दिखेगा फर्क

First published: 19 August 2018, 16:40 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी