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लंबे समय तक एक पोजीशन में बैठना सेहत के लिए है ख़तरनाक

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 August 2017, 13:19 IST

लंबे समय तक एक ही पोजीशन में बैठकर कर काम करने की आदत हमारे जीवनकाल को कम कर देती है. एक शोध के मुताबिक, लगातार आठ घंटे तक शिथिल रहने वाले व्यक्ति को मौत का खतरा एक घंटे शिथिल रहने वाले व्यक्ति की तुलना में 61 फीसदी ज्यादा होता है.

1. हृदय: मांसपेशियां कम वसा खर्च करती हैं और खून का प्रवाह धीमा हो जाता है. हार्ट में फैटी एसिड जमा हो जाता है. लंबी सिटिंग हाई बीपी व कोलेस्ट्रॉल की समस्या देती है. हृदय रोगों का खतरा दोगुना हो जाता है.

2. अग्नाशय: अग्नाशय (पैनक्रियाज) कोशिकाओं को एनर्जी देने वाला इंसुलिन हार्मोन बनाते हैं लेकिन लंबी सिटिंग से कोशिकाएं इस इंसुलिन को ग्रहण नहीं कर पाती हैं. उधर, पैनक्रियाज लगातार इंसुलिन बनाते रहते हैं. ज्यादा इंसुलिन खपता नहीं और डायबिटीज का कारण बनता है. एक स्टडी में पाया गया था कि एक दिन की लंबी सिटिंग के बाद ही कोशिकाओं ने इंसुलिन खपाना कम कर दिया था

4. आंतों का कैंसर: आंतों के साथ ब्रेस्ट व एंडोमिट्रियल (गर्भाशय से जुड़ा) कैंसर का खतरा. ज्यादा इंसुलिन से कोशिकाएं बढ़ती हैं. मूवमेंट न होने से कैंसरकारकों को नष्ट करने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स नहीं बन पाते हैं.

5. दिमाग :मांसपेशियों में हलचल दिमाग में रक्तसंचार और ऑक्सीजन की पूर्ति के लिए बहुत जरूरी है. आलस में पड़े रहने से दिमाग को एक्टिव रखने वाले रसायन भी निकलने बंद हो जाते हैं. असर सभी अंगों पर पड़ता है. अधिकतर समय कम्प्यूटर स्क्रीन और की-बोर्ड पर नजरें गड़ाए बैठे रहने से गर्दन की हड्डी सर्वाइकल वर्टिब्रे में स्थायी असंतुलन आ जाता है.

6. पैरों में सूजन, खून के थक्के: घंटों बैठे रहने से रक्त संचार धीमा पड़ जाता है. इससे पैरों में तरल पदार्थ जमा होने लगते हैं. पैरों में सूजन से लेकर खून के थक्के बनने की गंभीर बीमारी डीवीटी (डीप वेन थ्रोम्बॉसिस)होने का खतरा हो जाता है.

7. हड्डियों में कमजोरी: पैरों पर बोझ डालने वाले काम जैसे दौड़ने या तेज चलने से कमर के नीचे वाली हड्डियां मजबूत और चौड़ी होती हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि हड्डियों के कमजोर होने व तेजी से उभरी बीमारी ऑस्टियोपोरॉसिस का एक कारण चलने और दौडऩे में आई कमी भी है.

8. रीढ़ की हड्डी पर प्रभाव: खड़े होने, काम करने या सही तरीके से बैठने पर हमारे पेट की मांसपेशियां काम करती रहती हैं. लेकिन कुर्सी पर पसरते ही ये बेकार हो जाती हैं. इसकी वजह से रीढ़ की हड्डी धनुष की तरह झुकने लगती है. इस स्थिति को हाइपरलॉर्डोसिस कहते हैं.

9. कमर : लचीले कमर और नितंब शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं. लेकिन कुर्सी पर पसरे रहने की वजह से पैर को कमर से जोड़ने वाली मांसपेशियां सिकुड़कर कठोर हो जाती हैं. इससे तेज चलने और दौड़ने पर असर पड़ता है.

10. डिस्क की समस्या: पेट के अंदर एक मांसपेशी रीढ़ की हड्डी से जुड़ी होती है. हमेशा बैठे रहने से ये सिकुड़कर स्पाइन को आगे खींच लेती है. शरीर का वजन रीढ़ की हड्डी पर फैलने की बजाय शरीर के निचले हिस्से पर पड़ने से दर्द होने लगता है.

First published: 19 August 2017, 13:19 IST
 
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