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कैंसर के खतरे को कम करने के लिए आज ही बदलें अपनी ये आदतें

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 December 2019, 16:30 IST

Cancer Causes and Treatment: कैंसर के मरीजों की संख्या दुनियाभर में लगातार बढ़ती जा रही है. हालांकि अब कैंसर का इजाल संभव होग गया है, लेकिन ये इतना महंगा है कि आम आदमी की पहुंच आज भी इस बीमारी से निजात दिलाने में संभव नहीं है. ऐसे कैंसर जैसी बीमारियों से बचने का सबसे सही तरीका अपने स्वास्थ्य की ठीक से देखभाल और अपनी कुछ आदतों में बदलाव लाना है. क्योंकि कैंसर की बीमारी का पता कई बार इसकी आखिरी स्टेज में पहुंचने के बाद ही चलता है.

इसके बाद कैंसर का इलाज करना मुश्किल हो जाता है. आज दुनिया में 200 से भी ज्यादा प्रकार के कैंसर पाए जाते हैं और इसी के चलते हर साल लाखों लोग कैंसर से मौत के गाल में समा जाते हैं. कई रिसर्च में इस बात का खुलासा हो चुका है कि कैंसर के रोगियों की संख्या में इजाफे का कारण लोगों की जीवनशैली में कुछ बदलाव हैं.

कैंसर की बीमारी से अपनी कुछ आदतों में बदलाव कर बचा जा सकता है. जिसमें सबसे पहले आता है अच्छा खाना. उसके बाद एक्सरसाइज और धूम्रपान जैसी लत शामिल है. हालांकि हर तरह के कैंसर का कारण ये आदतें नहीं हैं. जिसमें मांसाहारी खाने का ज्यादा प्रयोग भी शामिल है. यानी जो लोग ज्यादा मांसाहार का प्रयोग करते हैं उन्हें सावधानी बरतने की जरूरत है. दरअसल, मीट को बहुत अधिक तापमान पर पका कर खाने.

यानी फ्राई करने या ग्रिल करके खाने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. बता दें कि बहुत अधिक तापमान के कारण मीट में हेट्रोसाइक्लिक एमाइन्स (HCAs) और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन्स (PAHs) की मात्रा काफी बढ़ जाती है. कई रिसर्च बताती हैं कि ये केमिकल्स कैंसर को बढ़ावा देते है. आमतौर पर मीट को 300 डिग्री फॉरेनहाइट से ज्यादा तापमान पर पकाने पर इन केमिकल्स के बनने की संभावना बढ़ जाती है.

अनाज और सब्जियों को उगाने के लिए प्रयोग किए जाने वाले हानिकारक केमिकल्स और फर्टिलाइजर्स के चलते भी कैंसर की संभावना बढ़ जाती है. इस तरह के पेस्टिसाइड्स के प्रयोग से उगने वाले अनाज और सब्जियां खाना आपके लिए खतरनाक हो सकता है. बता दें कि ग्लाइफोसेट एक ऐसा ही केमिकल है, जो पौधों के कीड़े मारने के काम में आता है. रिसर्च में इस बात को पहले ही बताया जा चुका है कि ग्लाइफोसेट का इस्तेमाल शरीर में कैंसर को बढ़ावा दे सकता है. मगर फिर भी इसका प्रयोग बहुत अधिक मात्रा में किया जाता है. इससे बचने का सबसे आसान तरीका है ऑर्गेनिक फलों, सब्जियों और अनाजों का प्रयोग करना.

बता दें कि धूम्रपान के अलावा कैंसर का खतरा रेडॉन है जो एक तरह की गैस होती है. दरअसल, कई बिल्डिंग मैटीरियल में ऐसे तत्व होते हैं, जो रेडॉन गैस रिलीज करते हैं. अगर घर बनाते समय इसमें यूरेनियम, थोरियम या रेडियम का इस्तेमाल ज्यादा किया है, तो दीवारों और छतों से रेडॉन गैस धीरे-धीरे रिसती रहती है. इसका खतरा उन घरों में ज्यादा होता है, जहां हवा के निकलने के लिए यानी वेंटिलेशन की पर्याप्त जगह नहीं होती है.

रेडॉन गैस सांस के द्वारा आपके फेफड़ों में पहुंच जाती है और फेफड़ों के कैंसर का कारण बनती है. बता दें कि घर बनवाते समय बिल्डिंग मैटीरियल्स पर ध्यान देना जरूरी है. इसके अलावा अगर घर में किसी दीवार से पानी रिस रहा है, दीवार फट गई है या प्लास्टर आदि उखड़ गया है, तो इसकी मरम्मत करवाएं और घर में वेंलिटेशन के लिए खिड़की, दरवाजे सही जगह लगवाएं.

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First published: 2 December 2019, 16:30 IST
 
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