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CT स्कैन के रेडिएशन से होने वाले खतरे से शायद आप अभी अनजान हैं !

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 March 2018, 17:16 IST

साल 2001 में संयुक्त राज्य अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी के दो शोधकर्ताओं ने एक पत्र प्रकाशित किया जिसमें सुझाव दिया गया था कि लगभग 1,000 बच्चे टोमोग्राफी या सीटी स्कैन के राडिएशन कैंसर प्रभावित हुए हैं. इससे होने वाले रेडिएशन की मात्रा चार गुना ज्यादा होती है. इस अध्ययन ने सीटी स्कैन को लेकर एक बहस की शुरू कर दी है.

सीटी स्कैन अक्सर ट्रोमा के मामलों में बहुत आवश्यक होती हैं, विशेष रूप से सिर में चोट लगने वाले मामलों में. टीबी वाले लोगों को भी उपचार के लिए नियमित सीटी स्कैन की आवश्यकता होती है.सीटी स्कैन में प्रयुक्त विकिरण एक्स-रे से 100 गुना अधिक होता है इसलिए जब एक सीटी स्कैन वो बता सकता है जो एक्स-रे से संभव नहीं है.

क्या मोबाइल से भी होता रेडिएशन 

एक्स रे और अलट्रावॉयलेट रेडिएशन हमारे डीएनए में मौजूद केमिकल बॉन्ड को तोड़ने की क्षमता रखते हैं. अमरीकन कैंसर सोसाइटी शोध कर रही है कि क्या इन रेडिएशन से दिमाग, सिर और गले में ट्यूमर हो सकता है. बीबीसी के अनुसार सबसे ज़्यादा रेडिएशन वाली लिस्ट में वन प्लस और हूआवी और नोकिया लूमिया सबसे ऊपर हैं.

आईफ़ोन 7 दसवें, आई फ़ोन 8 बारहवें और आई फ़ोन 7 प्लस पंद्रहवें नंबर पर है. सोनी एक्सपीपिया एक्स ज़ेड कॉम्पैक्ट (11) ज़ेड टी ई एक्सॉन 7 मिनी (13) ब्लैकबेरी डीटीईके 60(14) भी इस लिस्ट में शामिल हैं.

एक शोध में बताया गया कि यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया दोनों में सीटी स्कैन के विकिरण से कैंसर का खतरा बढ़ गया है. जो बच्चों में ज्यादा है. भारत में अभी भी इस विषय पर दिशानिर्देशों और पर्याप्त डेटा का अभाव है.

भारत में सीटी स्कैन का इस्तेमाल बढ़ रहा है क्योंकि सरकार स्वास्थ्य सेवा के बेहतरी के लिए प्रयास कर रही है. 2016 में दिल्ली सरकार ने गरीबों के लिए मुफ्त सीटी और एमआरआई स्कैन की घोषणा की. असम सरकार ने जनवरी 2018 में एक राज्य स्तरीय अभियान चलाया.

First published: 20 March 2018, 17:14 IST
 
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