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डायबिटीज पेसेंट को नहीं आएगा हार्ट अटैक, खानी होगी ये आयुर्वेदिक दवा

न्यूज एजेंसी | Updated on: 20 May 2018, 10:22 IST

वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा तैयार किए गए आयुर्वेदिक दवा BGR-34 डायबिटीज पेसेन्टस में हार्ट अटैक के खतरे को पचास फीसदी तक कम कर देती है. इस दवा के करीब 50 फीसदी इस्तेमाल करने वालों में ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन का स्तर सामान्य पाया गया है. यह बात एक शोध में सामने आई.

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जर्नल ऑफ टड्रिशनल एंड कंप्लीमेंट्री मेडिसिन के ताजा अंक में इससे जुड़े शोध को प्रकाशित किया गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार BGR-34 डायबिटीज पेसेन्टस के लिए एक कारगर दवा के रूप में पहले से ही स्थापित है. मौजूदा एलोपैथी दवाएं शुगर का लेवत तो कम करती हैं लेकिन इससे जुड़ी अन्य दिक्कतों को ठीक नहीं कर पाती हैं. वहीं BGR-34 में इन दिक्कतों को भी दूर करने के गुण देखे गए हैं.

 

इस जर्नल के अनुसार भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों के तहत एक अस्पताल में 64 मरीजों पर चार महीने तक इस दवा का परीक्षण किया गया है. इस दौरान दो किस्म के नतीजे सामने आए. 80 फीसदी तक मरीजों के शुगर लेवल में कमी दर्ज की गई.

दवा शुरू करने से पहले शुगर का औसत लेवल 196 (खाली पेट) था जो चार महीने बाद घटकर 129 एमजीडीएल रह गया. जबकि भोजन के बाद यह लेवल 276 से घटकर 191 एमजीडीएल रह गया. ये नतीजे अच्छे हैं लेकिन इस प्रकार के नतीजे कई एलोपैथिक दवाएं भी देती हैं. सीएसआईआर ने BGR-34 के निर्माण की अनुमति एमिल फार्मास्युटिकल को दे रखी है.

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रिपोर्ट के अनुसार दूसरा उत्साहजनक नतीजा ग्लाइकोसिलेटेड हिमोग्लोबिन (एचबीए1सी) को लेकर है. 30-50 फीसदी मरीजों में इस दवा के सेवन से ग्लाइकोसिलेटेड हिमोग्लोबिन कंट्रोल हो गया जबकि बाकी मरीजों में भी इसके लेवल में दस फीसदी तक की कमी आई थी. दरअसल, ग्लाइकोसिलेटेड हिमोग्लोबिन की रक्त में अधिकता रक्त कोशिकाओं से जुड़ी बीमारियों का कारण बनती है. जिसमें हार्ट अटैक होना और दौरे पड़ना प्रमुख है. मधुमेह रोगियों में ये दोनों ही मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

हिमोग्लोबिन लाल रक्त कोशिकाओं के भीतर होता है. इसका कार्य आक्सीजन का संचार करना होता है. लेकिन जब हिमोग्लोबिन में शुगर की मात्रा घुल जाती है तो हिमोग्लोबिन का कार्य बाधित हो जाता है इसे ही ग्लाइकोसिलेटेड हिमोग्लोबिन कहते हैं. इसका प्रभाव कई महीनों तक रहता है. किन्तु BGR-34 से यह लेवल नियंत्रित हो रहा है.

First published: 20 May 2018, 10:22 IST
 
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