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बिच्छू के जहर में है इस बीमारी को दूर करने की ताकत

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 February 2018, 13:34 IST

यूं तो बिच्छू के डंक और इसके जहर से हर कोई डरता है. लेकिन अगर आपको पता चले कि बिच्छू का जहर आपकी बीमारी दूर कर सकता है, तो फिर आप क्या कहेंगे. ताजा शोध के मुताबिक बिच्छू के जहर में पाया जाने वाले एक तत्व गठिया रोग से निपटने में काम आ सकता है.

बैलोर कॉलेज ऑफ मेडिसिन द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक, एक दिन आएगा जब गठिया रोग से परेशान 13 लाख लोगों की जिंदगी में सुधार की वजह बिच्छू का डंक बनेगा. डॉ. क्रिस्टीन बीटन के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक समूह ने पाया कि बिच्छू के जहर में पाए जाने वाले सैकड़ों तत्वों में से एक के जरिये पशुओं में हुई इस बीमारी की गंभीरता कम की जा सकती है, और वो भी बिना किसी दुष्प्रभाव के.

डॉ. बीटन के मुताबिक, "गठिया एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) ही शरीर पर हमला करता है. इस (गठिया) मामले में यह जोड़ों को प्रभावित करता है."

उन्होंने आगे बताया, "फाइब्रोब्लास्ट जैसी साइनोवायोसाइट्स (एफएलएस) नाम की कोशिकाएं इस रोग में प्रमुख भूमिका निभाती हैं. जैसे-जैसे वे विकसित होती हैं और एक जोड़ से दूसरे जोड़ तक जाती हैं, वे ऐसे उत्पादों को स्राव करती हैं जो जोड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं और प्रतिरक्षा कोशिकाओं को आकर्षित करते हैं, जो सूजन और दर्द का कारण बनते हैं. जैसे-जैसे नुकसान बढ़ता है, जोड़ बढ़ने लगते हैं और मरीज इन्हें हिलाने में असमर्थ होता है."

मौजूदा उपचार के अंतर्गत बीमारी में शामिल प्रतिरक्षा कोशिकाओं को निशाना बनाया जाता है और कोई भी विशेषरूप से एफएलएस के लिए नहीं हैं. बीटन और उनके सहयोगियों ने एफएलएस का अध्ययन किया जो 'एच्लिस एड़ी' (Achilles Heel) की तलाश में था, जिससे उन्हें जोड़ों को हानि पहुंचाने से रोका जा सकता था.

बीटन कहती हैं, "पिछले काम में, हमनें रुमेटीय आर्थराइटिस (गठिया) के रोगियों के एफएलएस पर पोटेशियम चैनल की पहचान की और पाया कि इस बीमारी के विकास के लिए यह चैनल बहुत महत्वपूर्ण था, हम जोड़ों को नुकसान पहुंचाने वाली कोशिकाओं को रोकने के लिए चैनल को अवरुद्ध करने का एक रास्ता खोजना चाहते हैं."

पोटेशियम चैनल कोशिकाओं की सतह पर गेट खोलने का काम करते हैं, जो पोटेशियम आयनों-छोटे चार्ज एटम्स- को कोशिका में आने और बाहर निकलने की अनुमति देते हैं. कोशिकाओं के बहुत से आवश्यक कार्यों को पूरा करने के लिए चैनल्स के माध्यम से आयनों का प्रवाह आवश्यक है.

शोध के प्रथम लेखक डॉ. मार्क टैनर ने कहा, "बिच्छू के जहर में सैकड़ों घटक (तत्व) होते हैं. इन तत्वों में से एक का नाम बुथस टैमुलस है जो विशेषरूप से एफएलएस के पोटेशियम चैनल को अवरुद्ध करता है, और नर्वस सिस्टम जैसे अन्य कोशिकाओं में चैनलों को नहीं."

"यहां, हमनें जांच की कि क्या इबेरिओटॉक्सिन (iberiotoxin) नामक यह जहर का तत्व, विशेष रूप से एफएलएस पोटेशियम चैनल को अवरुद्ध करने और रोग से प्रभावित चूहे के मॉडल में गठिया की गंभीरता को कम करने में सक्षम होगा." यह अध्ययन जर्नल ऑफ फार्मैकोलॉजी एंड एक्सपेरीमेंटल थेरैप्यूटिक्स में प्रकाशित हुई है.

First published: 27 February 2018, 13:34 IST
 
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