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एड्स के मरीजों की तुलना में आलसी लोगों की ज्यादा हो रही हैं दुनियाभर में मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 October 2018, 14:21 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

दुनियाभर में आलसी लोगों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.इसी के साथ बीमारियों ने भी आलसी लोगों को अपने आगोश में लेना शुरु कर दिया है. इसी के चलते आलसी लोगों की मौत की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. जरूरत से ज्यादा आलसी होना इंसान की जान का दुश्मन बनता जा रहा है. आलसीपन की वजह से ही हर साल दुनियाभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है.

हैरान करने वाली बात ये हैं कि एचआईवी की तुलना में आलसी लोगों की संख्या ज्यादा है. यानि एसआईवी एड्स से अधिक आलसी लोगों की मौत ज्यादा होती है. बात दें कि आलसी लोगों को जीवन डायबिटीज, दिल के रोगियों एवं धूम्रपान करने वालों के मुकाबले ज्यादा जोखिमभरा है.

एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि जो लोग ज्‍यादा समय बैठे रहने में बिताते हैं उन्‍हें जान का खतरा बढ़ जाता है. एरिजोना स्‍टेट यूनिवर्सिटी स्थित मायो क्लिनिक की डायरेक्‍टर डॉक्‍टर जेम्‍स का मानना है कि बदलते दौर में अधिक समय तक बैठे रहना या आलस कई बीमारियों से अधिक खतरनाक है.

शोध में इसको लेकर कई तथ्‍य सामने आ रहे हैं. शोध में यह भी सामने आया है कि कैंसर और टाइप टू डायबिटीज समेत दिल के रोग से भी कहीं अधिक नुकसानदेह है. एक ताजा शोध में यह बात भी सामने आई है कि भारत में ही करीब छह करोड़ से अधिक लोग डायबिटीज से पीडि़त हैं. वहीं करीब आठ करोड़ लोग प्री डायबिटीक हैं. देश में किडनी खराब होने का सबसे बड़ा कारण भी डायबिटीक होना होता है.

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First published: 22 October 2018, 14:10 IST
 
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