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सावधान ! यदि आप भी बच्चों को दे रहे हैं पैकेट बंद दूध, तो झेलना पड़ सकता है भारी नुकसान

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 February 2019, 14:48 IST

दरअसल, एक रिपोर्ट के मुताबिक,मार्केट में मिलने वाले ज्यादातर पैकेट के दूध शुद्ध नहीं होते हैं. वहीं, बहुत से ऐसे दूध विक्रेता हैं, जो पशुओं से ज्यादा मात्र में दूध निकालने के लिए इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं. इसलिए ये पैकेट वाले दूध प्राकृतिक नहीं होते हैं. चलिए जानते हैं कैसे ये दूध आपके बच्चों के शरीर को प्रभावित करता है-

आंकड़ों की जुबानी पैकेट वाले दूध की कहानी

भारत में एक रिसर्च किया गया है. इस रिसर्च में आए रिपोर्ट के मुताबिक, हमारे देश के मार्केट में मौजूद 68.7 प्रतिशत से ज्यादा दूध FSSAI के मानक पर खरे नहीं उतरते हैं.

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वहीं, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के रिपोर्ट के मुताबिक,भारतीय बाजार के 89.2% से अधिक दूध या दूध से बने पदार्थों में किसी ना किसी प्रकार की मिलावट जरूर होती है. बता दें कि दूध की मात्रा बढ़ाकर ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए दूध में यूरिया, वेजिटेबल ऑयल, ग्लूकोज या अमोनियम सल्फेट आदि मिला दिया जाता है जो हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदायक माना जाता है.

बच्चों की किडनी पर डालता है असर

पैकेट बंद दूध बच्चों और शिशुओं के विकास पर बुरा प्रभाव डालता है. ऐसे दूध से बच्चों की किडनी पर काफी बुरा असर पड़ता है. किडनी हमारे शरीर के प्रमुख अंगों में से एक है, जो शरीर की गंदगी को बाहर निकालने में मदद करता है, लेकिन किसी भी कारण किडनी का विकास नहीं हुआ या फिर मिलावट वाली दूध पीने से किडनी का विकास रूक गया,तो बच्चों की किडनी तुरंत डैमेज हो जाती है.

बच्चे हो सकते हैं बीमार

पैकेट बंद दूध पीने से बच्चों की प्रतिशोधक क्षमता कम हो जाती है, जिसकी वजह से बच्चे कई समस्याओं के शिकार हो जाते हैं.जैसे  फूड प्वायजनिंग, पेट दर्द, डायरिया, आंतों का इंफेक्शन, टायफाइड, उल्टी, लूज मोशन इत्यादि समस्याएं बच्चों को होनेे लगती हैं.

बच्चों के विकास में हो सकती है रुकावट

पैकेट बंद दूध पीने से बच्चों के विकास में रुकावट आ सकती है. क्योंकि दूध का उत्पादन बढ़ाने के लिए पशुओं को ऑक्सिटोसिन का इंजेक्शन लगाया जाता है. इसले अलावा दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए दूध में यूरिया, शैंपू, अमोनियम सल्फेट आदि मिलाया जाता है, जो बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास पर गहरा असर डालती है.

First published: 2 February 2019, 14:48 IST
 
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