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स्लिप डिस्क: जानें क्या है वजह आैर ट्रीटमेंट

कैच ब्यूरो | Updated on: 1 May 2017, 14:35 IST

बढ़ती उम्र और गलत तरीके से उठने-बैठने से डिस्क में बदलाव आते हैं, उसे स्लिप डिस्क कहा जाता है.डिस्क के खिसक जाने से आस-पास निकलने वाली नब्ज पर दबाव पड़ता है. हमारे शरीर पर इसके कर्इ तरह के लक्षण देखने को मिलते हैं, जैसे- कमर से लेकर एक पंजे तक करंट जैसा दर्द, पैर में सूनापन, पंजे या पैर के अंगूठे में कमजोरी आना.

उपचार:
साधारणत: स्लिप डिस्क का दर्द आराम करने, व्यायाम और दर्द निवारक दवा से ठीक हो जाता है. 6 हफ्ते में दर्द ठीक न हो तो कमर में एक छोटे से चीरे से डिस्क के नस को दबाने वाले हिस्से को निकाल दिया जाता है. ध्यान रखें समय पर ऑपरेशन न होने से पैरों में कमजोरी एवं सूनापन आ सकता है. कुर्सी पर बैठने पर आपके घुटने से टांगें 90 डिग्री के कोण पर हों एवं फोरआर्म कोहनी पर 90 डिग्री का कोण बनना चाहिए. 

बरतें सावधानियां:
1. गलत पाॅश्चर में नहीं बैठें /उठें.

2. ऐसी कुर्सी पर बैठें जिसका बैक सपोर्ट एवं आर्म सपोर्ट अच्छा हो.

3. कम्प्यूटर पर लगातार न बैठें.

4. बिस्तर पर से एकदम से न उठें, पहले बैठें, फिर उठें.

5. झुककर व अत्यधिक वजन न उठाएं.

6. वेस्टर्न कमोड का इस्तेमाल बेहतर माना जाता है.

First published: 1 May 2017, 14:35 IST
 
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