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बढ़ती खुदकुशी की वजह जानकर हो जाएंगे हैरान, हर हाथ में है ये शैतान

कैच ब्यूरो | Updated on: 2 December 2017, 16:53 IST

जिन अभिभावकों के बच्चे स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के इस्तेमाल में ज्यादा समय बिताते हैं, ये खबर उनके लिए बड़ी चिंता का सबब बन सकती है. एक अध्ययन केे मुताबिक ऐसे बच्चे अवसाद में रहते हैं और खुदकुशी करने की ज्यादा कोशिश करते हैं.

अमेरिका में फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और शोध के सहलेखक थॉमस जॉइनर का कहना है कि आधुनिक समय में किशोरों द्वारा स्क्रीन का ज्यादा इस्तेमाल, अवसाद और खुदकुशी का खतरा बढ़ा देता है. क्लीनिकल साइकोलॉजिकल साइंस के जर्नल में प्रकाशित शोध में पाया गया कि जो बच्चे स्मार्टफोन की जगह खेलों, अन्य शाररिक गतिविधियों, आपस में बात करने और होम वर्क में ध्यान देते हैं, वो ज्यादा खुश रहते हैं.

जॉइनर ने आगे कहा, "स्क्रीन्स देखने में अत्यधिक समय बिताने और खुदकुशी के खतरे, अवसादग्रस्त होने, खुदकुशी के ख्याल आने तथा आत्महत्या की कोशिश करने के बीच चिंताजनक संबंध है. ये सभी मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे बेहद गंभीर हैं. मुझे लगता है कि अभिभावकों को इस पर विचार करना चाहिए."

 

वहीं, जाइनर ने साफ किया कि माता-पिता को यह नहीं सोचना चाहिए कि उन्हें अपने बच्चों के स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूर करने की ज़रूरत हैै. लेकिन उन्हें अपने बच्चों के स्क्रीन के इस्तेमाल को एक से दो घंटे तक ही सीमित कर देना चाहिए. बच्चों को इनसे दूर रखना कहीं से व्यावहारिक और सही नहीं है.

अमेरिका के सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2010 से 2015 के बीच 13 और 18 साल के किशोरों के बीच अवसाद और खुदकुशी की दर में 31 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, अमेरिका में हुए राष्ट्रीय सर्वेक्षण में इस बात का खुलासा हुआ कि अवसाद की शिकायत करने वाले किशोरों की संख्या में 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

अध्ययन में बताया गया है 2010 के बाद स्मार्टफोन की संख्या में बढ़ोतरी की वजह से किशोरों में मानसिक समस्या बढ़ी हैं. साल 2012 में लगभग आधे अमेरिकियों के पास स्मार्टफोन था, लेकिन 2015 तक ये बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया. इसके अलावा किशोर और युवाओ का स्क्रीन एक्सेस करने का टाइम भी बढ़ गया है.

शोधकर्ताओं ने पाया कि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर प्रति दिन पांच या अधिक घंटे बिताए किशोरों में से 48 प्रतिशत में खुदकुशी  संबंधी व्यवहार का पता चला है.

First published: 2 December 2017, 16:53 IST
 
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