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पत्तागोभी खाने से पड़ सकते हैं आपकी जान को लेने के देने, जानिए क्यों है इसे खाना खतरनाक

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 October 2019, 15:11 IST

पत्तागोभी का इस्तेमाल हम सब्जी बनाने के साथ-साथ फास्ट फूट जैसे चाउमीन, मोमोस और कई बार सलाद में भी करते हैं लेकिन हम ये नहीं जानते कि जिस पत्ता गोभी को हम बड़े चाव से खाते हैं वो हमारी जान की दुश्मन भी बन सकती है. आज हम आपको पत्ता गोभी से जुड़े इसी तरह की कुछ बीमारियों और परेशानियों के बारे में बताने जा रहे हैं जो यकीनन आपकी आंखें खोल देगी.

दरअसल, पत्तागोभी के साथ कई बार हम टेपवर्म यानी फीताकृमि को भी निगल जाते हैं तो आपकी की जान के लिए बेहद खतरनाक होते हैं. ये आंतों में विकसित होने के बाद रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य हिस्सों में भी पहुंच जाते हैं. यही नहीं कई बार तो ये मस्तिष्क में भी पहुंच जाते हैं. इस तरह के कई मामले पिछले कुछ सालों में देखने में आए हैं.

पत्तागोभी को हम बर्गर, चाऊमीन, मोमोज, स्प्रिंग रोल्स में इस्तेमाल करते हैं. बता दें कि जो लोग पत्तागोभी का सेवन करते हैं उनके शरीर में फीताकृमि के पहुंचने की संभावना बहुत रहती हैं. ये सुक्ष्म कृमि आपके दिमाग में पहुंच कर आपके लिए जानलेवा साबिह तो सकते हैं. इस कीड़े को हम टेपवर्म या फीताकृमि के नाम से भी जानते हैं.

भारत में टेपवर्म को लेकर खतरे के मामले करीब 20-25 साल ही देखने को मिलने लगे थे. जब देश के अलग-अलग हिस्सों में कुछ मरीज सिर में तेज दर्द की शिकायत के साथ हॉस्पिटल पहुंचे. ऐसे कई मामलों में मरीज को मिर्गी की तरह दौरे भी पड़ रहे थे. इनमें से बहुत से रोगी अपनी जान से हाथ धो बैठे. क्योंकि रोगियों के दिमाग में ये काफी संख्या में पहुंच चुके थे. कुछेक रोगियों, जिनकी जान बच गयी, ने बाद में पत्ता गोभी खाना बिल्कुल ही बंद कर दिया.

 

जिन लोगों को ऐसे मामलों का पता चला, उन्होंने भी पत्ता गोभी से दूरी बनाने में ही भलाई समझी. टेपवर्म के डर से लोगों ने पत्ता गोभी जैसी पोषक सब्जी से दूरी बनाने में ही अपनी भलाई समझी. बता दें कि टेपवर्म के संक्रमण के मामले पूरी दुनिया में पाए जाते हैं, लेकिन खाद्य पदार्थों के रखरखाव आदि के तरीकों में अंतर के कारण भारत में इसके संक्रमण के मामले कुछ ज्यादा पाए जाते हैं.

बता दें कि फीताकृमि इंसान के शरीर में सब्जी, सलाद के रूप में पहुंचते हैं जो हमें दो तरह से नुकसान पहुंचाता है. ये बेहद सूक्ष्म होते हैं जिसके चलते वह दिखाई नहीं देते. पत्तागोभी को ठीक से धोने के बाद भी ये पत्तों के बीच में चिपका रह जाता है. ऐसी स्थिति में जब हम कच्ची पत्ता गोभी का सेवन करते हैं तो हमारे शरीर में इसके पहुंचने की आशंका सबसे अधिक रहती है. जब भोजन अधपका रह जाता है तो भी यह हमारे शरीर में पहुंच जाता है. इसीलिए अब भारी संख्या में लोग पत्ता गोभी से परहेज करने लगे हैं.

बता दें कि फीताकृमि आमतौर पर जानवरों के मल में पाया जाता है, जो कई अलग-अलग कारणों से पानी के साथ जमीन में पहुंच जाता है. बारिश के पानी या गंदे पानी के रूप में इसके जमीन में पहुंचने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है. यही वजह है कि कच्ची सब्जियों के माध्यम से हमारे शरीर में इस कीड़े के पहुंचने की सबसे ज्यादा आशंका रहती है. इसके अलावा संक्रमित मिट्टी और ऐसा दूषित पानी, जिसमें टेपवर्म के अंडे हों, से भी इसके संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है.

बता दें कि एक बार हमारे पेट में पहुंचने के बाद टेपवर्म का सबसे पहला हमला हमारी आंतों पर होता है. इसके बाद यह रक्त प्रवाह के जरिये हमारी नसों के माध्यम से हमारे दिमाग तक पहुंच जाता है. हालांकि टेपवर्म से हमारी आंतों को होने वाला संक्रमण आमतौर पर घातक नहीं होता, जबकि हमारे दिमाग पर इसके हमले के गंभीर परिणाम हो सकते हैं. इसके लार्वा से होने वाला संक्रमण एक गंभीर समस्या बन जाती है.

टेपवर्म से होने वाले संक्रमण को टैनिएसिस कहा जाता है. टेपवर्म की तीन मुख्य प्रजातियां टीनिया सेगीनाटा, टीनिया सोलिअम और टीनिया एशियाटिका होती हैं. शरीर में प्रवेश करने के बाद यह कीड़ा अंडे देना शुरू कर देता है. इसके कुछ अंडे हमारे शरीर में भी फैल जाते हैं, जिससे शरीर में अंदरूनी अंगों में घाव बनने लगते हैं. हमारे पेट में मौजूद आहार को टेपवर्म अपना आहार बना लेते हैं, जिससे इनकी संख्या में लगातार तेजी से बढ़ोतरी होने लगती है.

ज्यादातर मामलों में शुरुआती चरण में इनकी मौजूदगी की पहचान आसानी से नहीं हो पाती, लेकिन नर्वस सिस्टम और दिमाग में पहुंचने के बाद मरीज को मिर्गी की तरह दौरे पड़ने लगते हैं, जिसे टेपवर्म की मौजूदगी के प्रमुख लक्षणों में से एक माना जाता है. इसके अलावा सिर में तेज दर्द, कमजोरी, थकान, डायरिया, बहुत ज्यादा या बहुत कम भूख लगना, वजन कम होने लगना और विटामिन्स/मिनरल्स की कमी होना भी मुख्य लक्षणों में शामिल होते हैं.

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First published: 6 October 2019, 15:11 IST
 
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