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सरकार से नाराज़ किसानों ने किया गांव बंद का ऐलान, शहर नहीं भेजेंगे सब्जी-दूध-फल

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 May 2018, 8:06 IST

किसान नेताओं ने 1 से 10 जून तक अपने गांव को सील करने और गांव से बाहर शहर में कोई भी सामान जैसे कि सब्जियां, फल और दूध ना भेजने का ऐलान किया है.

चंडीगढ़ में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई किसान संगठनों से जुड़े किसान नेता इकट्ठे हुए और एग्रीकल्चरल एक्टिविस्ट देवेंद्र शर्मा की अगुवाई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके ऐलान किया कि 1 जून से लेकर 10 जून तक गांव को पूरी तरह से सील कर दिया जाएगा और किसी को भी गांव से बाहर सामान सप्लाई करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

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किसानों का कहना है कि लंबे वक्त से स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करवाने और किसानों की आमदनी को बेहतर करवाने के लिए सरकार से लगातार गुहार लगा रहे हैं. लेकिन सरकार ने इन किसानों की सुध नहीं ली है. ऐसे में किसान इस तरह का आंदोलन करने को मजबूर हो गए हैं.

 

अपनी मांगों को लेकर राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ मप्र ने खुलकर सामने आते हुए प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा. ये हैं किसानों की मांगें-

  • कृषि उपजों का लागत के आधार पर डेढ़ गुना मुनाफा जोड़कर लाभकारी दाम दिया जाए.
  • किसानों एवं मजदूरों को समस्त प्रकार के ऋणों से मुक्त किया जाए किसानों एवं मजदूरों की आय सुनिश्चित की जाए. आय की गारंटी का कानून बनाया जाए.
  • उपज समर्थन मूल्य से नीचे न बिके, ऐसा होने पर व्यापारी पर एफआईआर करें. पिछले 10 साल में जो भी फसल समर्थन मूल्य से नीचे बिकी है उन फसलों पर एरियर की गणना कर किसानों को एरियर दिया जाए.
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को बंद कर किसान हितैषी फसल बीमा योजना लागू की जाए.

55 वर्ष की उम्र के किसानों एवं मजदूरों को 5000 माह पेंशन दी जाए. वर्ष 2017 में किसानों एवं मजदूरों द्वारा किए गए आंदोलन में जितने भी किसानों एवं मजदूरों पर झूठे केस दर्ज हैं उन्हें अविलंब वापस लें. जिन अफीम उत्पादक किसानों ने सरकार की अनुमति लेकर अफीम में चीरा नहीं लगाया उन किसानों को मुआवजा दिया जाए.

First published: 3 May 2018, 8:06 IST
 
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