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यूपी कांग्रेस की कमान संभालने वाले राज बब्बर से जुड़ी 10 दिलचस्प बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 13 July 2016, 16:15 IST
(फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राज बब्बर को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है. यह नाम सियासी हल्कों में ज्यादातर लोगों को चकित कर गया. कभी समाजवादी रह चुके राज बब्बर यूपी की सियासत से लंबे समय से जुड़े हुए हैं. वे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर यूपी के सीएम अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव तक के खिलाफ चुनाव लड़ चुके हैं.

इसके अलावाा राज बब्बर फिल्मी दुनिया का भी जाना-पहचाना चेहरा हैं. 1975 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा (एनएसडी) से पढ़ाई करने के बाद अभिनेता बनने का सपना लेकर वो मायानगरी मुंबई आ गए. एक नजर डालते हैं राज बब्बर से जुड़ी दस दिलचस्प जानकारियों पर:

अभिनेता से नेता बने राज बब्बर का सफर

1. राज बब्बर का जन्म 23 जून 1952 को उत्तर प्रदेश के टुंडला (फिरोजाबाद जिला) कस्बे में हुआ. स्कूली पढ़ाई मुफीद-ए-आम स्कूल आगरा से करने के बाद 1975 में नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से राज बब्बर ने एक्टिंग का कोर्स किया.

2. बॉलीवुड करियर की शुरुआत 1980 में प्रदर्शित फिल्म सौ दिन सास के से की. लेकिन उनकी किस्मत का सितारा 1980 में बीआर चोपड़ा की प्रदर्शित फिल्म इंसाफ का तराजू से चमका. फिल्म में उन्होंने एक बलात्कारी की भूमिका निभाई. इस भूमिका को ज्यादातर अभिनेता नकार चुके थे.

3. 1992 में कर्मयोद्धा फिल्म के बाद राज बब्बर ने खुद को चरित्र अभिनेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश की. कर्मयोद्धा में उन्होंने मुख्य अभिनेता के तौर पर आखिरी बार भूमिका निभाई, जो बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही. तीन दशक के करियर में राज बब्बर ने हिंदी और पंजाबी समेत 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया.

4. राज बब्बर के सिने करियर में उनकी अभिनेत्री पत्नी स्मिता पाटिल के साथ जोड़़ी काफी चर्चित रही. 1981 में फिल्म तजुर्बा में दोनों एक साथ नजर आए. 21 नवंबर 1975 को राज बब्बर की शादी नादिरा बब्बर से हुई थी, लेकिन मैथिली राव की किताब के मुताबिक राज बब्बर, स्मिता के साथ लिव-इन-रिलेशनशिप में रहे.

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5. 1989 में राज बब्बर के सियासी करियर की शुरुआत जनता दल के साथ हुई. उन्होंने इस दौरान वीपी सिंह के समर्थन में कांग्रेस पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कई सभाएं कीं. हालांकि मंडल आंदोलन के बाद राज बब्बर ने वीपी सिंह से किनारा कर लिया. दादरी में रिलायंस के प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ एक बार फिर वो वीपी सिंह के जनमोर्चा के समर्थन में उतरे थे.

6. मुलायम सिंह यादव के साथ राज बब्बर की काफी नजदीकियां रहीं. 1994 में पहली बार मुलायम ने ही उन्हें राज्यसभा का सांसद बनाया. यही नहीं मुलायम ने 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ लखनऊ लोकसभा सीट से मैदान में उतार दिया था.

7. इसके बाद वो अपने गृहक्षेत्र आगरा से लगातार समाजवादी पार्टी से सांसद रहे. हालांकि उनका सबसे चर्चित चुनाव 2009 में फिरोजाबाद सीट पर रहा. यादवों के गढ़ में राज बब्बर ने मुलायम सिंह यादव की बहू डिंपल यादव को मात देकर सबको चौंका दिया था.

8. 2009 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश यादव कन्नौज और फिरोजाबाद दोनों सीट से जीतकर आए थे. फिरोजाबाद सीट खाली करने के बाद अखिलेश यादव ने अपनी पत्नी डिंपल यादव को चुनाव में उतारा गया. 2009 के चुनाव में कांग्रेस को इस सीट पर महज 6341 वोट मिले थे, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर ने डिंपल को 86 हजार से ज्यादा वोटों से मात दी.

9. माना जाता है कि सपा के तत्कालीन महासचिव अमर सिंह की वजह से राज बब्बर और मुलायम सिंह के बीच दूूरियां बनी थीं. अमर सिंह की वजह से राज बब्बर सपा में खुद को असहज महसूस करने लगे. उन्होंने सार्वजनिक तौर पर अमर सिंह को दलाल कह डाला था. 2006 में इसी वजह से उनकी सपा से छुट्टी हो गई.

10. 2014 के लोकसभा चुनाव में राज बब्बर ने गाजियाबाद लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा. हालांकि वो पूर्व थल सेनाध्यक्ष और बीजेपी उम्मीदवार जनरल वीके सिंह से हार गए. अभी राज बब्बर उत्तराखंड से राज्यसभा के सांसद हैं.

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First published: 13 July 2016, 16:15 IST
 
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