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क्या आपको पता हैं लाल क़िले से जुड़ी ये 10 बातें

कैच ब्यूरो | Updated on: 29 April 2016, 12:02 IST

पांचवे मुग़ल बादशाह शहाबुद्दीन मुहम्मद शाह जहां को भारत में आज उनकी बनवाई इमारतों के लिए जाना जाता है. विश्व विख्यात ताज महल समेत शाह जहां ने दिल्ली का लाल किला, आगरा का किला, लाहौर का किला, दिल्ली की जामा मस्जिद, मोती मस्जिद जैसी इमारतों का निर्माण कराया.

15 जनवरी, 1592 में जन्मे शाह जहां ने 1628 में मुगल सल्तनत की राजगद्दी संभाली. 1658  तक वो बादशाह रहे. उनके बेटे औरंगजेब ने उन्हें गद्दी से बेदखल करके क़ैद में डाल दिया. क़ैद में ही 1666 में आगरा के किले में उनका इंतकाल हुआ.

आइए जानते हैं दिल्ली के लाल क़िले से जुड़ी 10 बातें:

1- क़िला-ए-मुबारक


Portrait of Shah Jahan

शाह जहां का पोट्रेट

शाह जहां ने लाल क़िले का नाम किला-ए-मुबारक (सौभाग्यशाली क़िला) रखा था. राजस्थानी लाल पत्थरों से बनी बाहरी दीवारों के कारण इसका नाम लाल किला पड़ गया. आम लोगों में यही नाम ज्यादा लोकप्रिय हुआ. नतीजतन, आने वाले वक्त में आधिकारिक रूप से भी यही नाम प्रचलन में आ गया.

2- 256 एकड़


Edwin portriat of return of shah jahan

जामा मस्जिद से लाल क़िले में लौटते शाह जहां (चित्रकार-एडविन)

शाह जहां ने जब अपनी राजधानी आगरा से दिल्ली में स्थांतरित की तो उन्होंने लाल क़िला बनवाया. 1638 में किला बनना शुरू हुआ. क़रीब दस साल बाद 1647 में इसका निर्माण पूरा हुआ.

यमुना के किनारे स्थित क़िले के मुख्य वास्तुविद उस्ताद अहमद और उस्ताद हामिद थे. किला करीब 256 एकड़ में फैला हुआ है.

3- अष्टकोणीय संरचना

Red Fort Delhi 1785

लाल क़िले की अंदरूनी संरचना को दर्शाता 1785 का एक चित्र

क़िले की संरचना अष्टकोणीय है. क़िले के तारों तरफ एक ऊंची दीवार बनायी गई थी. क़िले में दो प्रवेश द्वार हैं. एक लाहौरी दरवाजा और दूसरा दिल्ली दरवाजा. ये नाम लाहौर और दिल्ली की तरफ खुलने के कारण रखे गए.

4- रंग महल


शाह जहां ने अपनी रानियों के लिए विशेष महल बनवाया था जिसे रंग महल नाम दिया गया. इस महल में संगमरमर की एक शिला से तराशा गया कमल की आकृति का फव्वारा बना था.

रंग महल में केवल बादशाह या शाहजादे ही जा सकते थे. रंग महल में किन्नरों को ही काम पर रखा जाता था.

5- कोहिनूर


Koh-i-noor in Queen

क्वीन मैरी के ताज में लगा कोहिनूर

मशहूर कोहिनूर हीरा शाह जहां के लाल क़िला स्थित मयूर सिंहासन में जड़ा हुआ था.

1738 में ईरानी बादशाह नादिर शाह ने भारत पर आक्रमण किया. उस समय दिल्ला का शासक मोहम्मद शाह था. 1739 में नादिर ने मोहम्मद शाह को हरा कर उसे बंदी बना लिया. उसने शाही ख़जाने और महल को लूट लिया. जिसमें ये हीरा भी शामिल था.

नादिर शाह ने ही इस हीरे का नाम कोहिनूर (प्रकाश पर्वत) रखा था. फिलहाल ये हीरा ब्रिटेन की महारानी के ताज में जड़ा हुआ है.

6- आख़िरी मुगल

Red Fort by Samuel Bourne, 1860

लाल क़िले के लाहौरी दरवाज़े की सैमुएल बर्न द्वारा 1960 में ली गई तस्वीर

बहादुर शाह जफ़र आखिरी मुगल बादशाह थे जो इस महल की राजगद्दी पर बैठ सके.

1857 की क्रांति के बाद अंग्रेजों ने उनपर इसी क़िले में मुकदमा चलाया था. ये मुकदमा दिवाने-खास में ब्रितानी सैन्य अदालत में चला.

7- वैश्विक धरोहर


1863 मेें अंग्रेजों ने क़िले के अंदर की कई इमारतों को ढहा दिया. अंग्रेजों ने क़िले में मौजूद हीरे-जवाहरात समेत तमाम कीमती चीजें लूट लीं.

इस क़िले के ऐताहासिक और पुरातात्विक महत्व को समझते हुए यूनेस्को ने 2007 में इसे वैश्विक धरोहर घोषित किया.

8- रेड फोर्ट ट्रायल

(From left to right): Colonel Prem Kumar Sahgal, Major General Shah Nawaz Khan and Colonel Gurbaksh

आईएनए के (बाएं से दाएं) सहगल, शाह नवाज़ और ढिल्लन. तस्वीर साभार- राजे के राज

दूसरे विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों ने इंडियन नेशनल आर्मी (आईएनए) के कई जवानों पर इसी क़िले में मुक़दमा चलाया. इस मुक़दमे को आईएनए ट्रायल या रेड फोर्ट ट्रायल के नाम से जाना जाता है.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1942 में सिंगापुर में आईएनए की स्थापना की थी. इस सेना में जापान द्वारा क़ैद किए गए भारतीय सैनिकों का शामिल किया गया था.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान आईएनए को ब्रिटिश सेना के हाथों हार का सामना करना पड़ा. आईएनए के प्रमुख अफ़सर और सैनिक गिरफ़्तार कर लिए गए. जिनपर नवंबर, 1945 से मई, 1946 तक मुक़दमा चला. 

इस मुक़दमे में शाह नवाज़ ख़ान, प्रेम सहगल, गुरुबक्श सिंह ढिल्लन, अब्दुल राशिद, सिंघाड़ा सिंह, फ़तेह ख़ान और कैप्टन मुनव्वर ख़ान अवान सहित कई लोग अभियुक्त थे.

9- महात्मा गांधी की हत्या का मुक़दमा

Gandhi murder trial, Red Fort

लाल क़िले में चल रहा महात्मा गांधी की हत्या का मुक़दमा

मोहनदास करमचंद गांधी की हत्या का मुक़दमा भी लाल क़िले में ही चला था. मामले की सुनवायी विशेष अदालत में हुई. इंडियन सिविल सर्विस (आईसीएस) अधिकारी आत्मा चरण को विशेष जज बनाया गया.

सभी अभियुक्तों को मामले की सुनवायी के लिए दिल्ली लाया गया. मुक़दमे के दौरान सभी को लाल किला स्थिति अस्थायी बंदीगृह में रखा गया.

10- स्वतंत्रता दिवस

Narendra Modi at Red Fort Delhi

लाल क़िले से स्वतंत्रता दिवस पर बोलते पीएम नरेंद्र मोदी

दिल्ली स्थित लाल किला भारतीय राजनीति में खास महत्व रखता है क्योंकि 15 अगस्त को भारत के स्वतंत्रता दिवस पर भारत के प्रधानमंत्री लाल किले से झंडा फहराते हैं.

पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से लेकर मौजूदा प्रधानमंत्री तक ये परंपरा जारी है. झंडारोहण के बाद भारतीय प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित भी करते हैं.

First published: 29 April 2016, 12:02 IST
 
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