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कश्मीर: 100 दिन में एक भी कश्मीरी आतंकी ढेर नहीं

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 October 2016, 8:32 IST
QUICK PILL
  • कश्मीर में हुर्रियत की हड़ताल को 100 दिन से ज्यादा हो चुके हैं लेकिन उनके पास इस बारे में कहने के लिए थोड़ा-सा ही है. दूसरी तरफ़ राज्य सरकार इससे निपटने में नाकाम रही है. 
  • इस अशांत राज्य में सबसे ज्यादा फायदा आतंकी समूहों को हुआ है. इस दौरान न सिर्फ़ नौजवान एकजुट हुए बल्कि प्रदर्शनों में सुरक्षा बलों के हाथों मारे भी गए.

बीती 8 जुलाई को आतंकी कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से एक भी कश्मीरी आतंकी को ढेर नहीं किया गया है. हालांकि सुरक्षा बलों ने देश के बाहर के 19 आतंकियों को मार गिराया है. इनमें चार आतंकी वे भी शामिल हैं जो उरी के सेना मुख्यालय में हमले के दौरान मारे गए थे.

वहीं इस साल के पहले छह महीनों में 80 से ज्यादा आतंकी मारे गए जिनमें ज्यादातर संख्या स्थानीय आतंकियों की है. दरअसल, बुरहान वानी के मारे जाने के बाद से सुरक्षा बलों ने हिजबुल मुजाहिद्दीन का लगभग पूरी तरह सफाया कर दिया है. 

2015 के जिस फोटोग्राफ (फोटोग्राफ में 11 आतंकियों का समूह दिखाई दे रहा है) को दिखाकर जिहाद को ग्लोरिफाई किया गया, उसमें बुरहान समेत सिर्फ दो आतंकवादी ही थे. इस फोटोग्राफ के जरिए हिजबुल के लिए नई भर्तियां की जानी थी.

तब और अब

मगर बीते तीन महीने में एजेंसियों के लिए हालात इसके उलट हैं. सुरक्षा बलों को इनसे निपटने के लिए घेराबंदी करने और सर्च ऑपरेशन चलाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. आतंकियों के ठिकानों का पता लगाना और उन्हें तबाह करना काफी मुश्किल काम था. 

इससे ज्यादा और क्या कहा जाए, देश के बाहर के 19 आतंकियों को ढेर किए जाने के बदले में लगभग 30 सुरक्षाकर्मी शहीद हुए हैं. यह संख्या पिछले छह महीने में शहीद हुए सुरक्षा कर्मियों की संख्या के बराबर है.

देश के बाहर के आतंकियों में से चार वे फिदायीन भी थे, जिन्होंने उरी हमले को अंजाम दिया था. इस हमले में 19 सैनिक मारे गए थे. चार आतंकवादी 07 अक्टूबर को उत्तरी कश्मीर में हुई दो अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए हैं. ये मुठभेड़ तब हुई जब सेना ने पूरी नियंत्रण रेखा पर घुसपैठियों को रोकने के लिए अभियान चलाया हुआ था. 

पहले मामले में सैन्य बलों को नियंत्रण रेखा पर उत्तरी कश्मीर के नौगाम और रामपुर में तीन अभियानों में निराशाजनक असफलता मिली थी. घुसपैठ रोकने की एक और कोशिश नौगाम सेक्टर में और एक अन्य कोशिश रामपुर सेक्टर में की गई. यहां आतंकवादियों ने छिपने की कोशिश की लेकिन जब सेना ने उन पर गोलियां चलाईं तो वे पाक अधिकृत कश्मीर की ओर भाग निकले.

इसके पहले 06 अक्टूबर को भी तीन आतंकियों को उस समय ढेर कर दिया गया था जब वे कुपवाड़ा जिले के लेंगेट में 30 राष्ट्रीय राइफल्स के मुख्यालय की बटालियन पर हमले की कोशिश में थे. सेना ने उनपर जवाबी कार्रवाई की और वे भाग निकले. लेकिन पुलिस और सेना ने उनका पीछा किया और उन्हें फलों के एक बगीचे के पास जाकर पकड़ लिया, जहां वे मारे गए.

स्वतंत्रता दिवस के दिन ही श्रीनगर के नौहट्टा में दो आतंकियों को मार गिराया गया था. आतंकियों ने सीआरपीएफ के जवानों पर ग्रेनेड से उस समय हमला किया, जब वे कैंप के आसपास गश्ती कर रहे थे. और अभी 12 अक्टूबर को एक मुठभेड़ में दो आतंकियों को ढेर कर दिया गया. इन आतंकियों ने इंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेन्ट अथॉरिटी पर हमला किया था. संयोगवश, ईडीआई एकमात्र मुठभेड़ है जो दक्षिण कश्मीर के पम्पोर में हुई है. अन्य सभी आतंकी मध्य और उत्तरी कश्मीर में मारे गए हैं.

स्थानीय शह

पिछले छह महीनों का यह साफ अंतर दिखाई पड़ता है जब साउथ कश्मीर के शोपियां, पुलवामा, अनन्तनाग और कुलगाम जिले में दो तिहाई आतंकी मारे गए थे. इनमें से ज्यादातर बुरहान के कश्मीरी कैडर के थे. लिहाज़ा, ये कहना ग़लत नहीं होगा कि मौजूदा हंगामे को स्थानीय आतंकवादियों का संरक्षण मिला हुआ है.

साउथ कश्मीर, जो फिलहाल अशांति का अगुवा है, में सभी तरह की घेराबंदी और सर्च ऑपरेशनों में काफी कमी आई है और कुछ इलाक़ों में तो यह सर्च ऑपरेशन खत्म ही हो गए हैं. इससे सुरक्षा एजेसिंयों के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हो गए हैं. एक ओर स्थानीय आतंकी अस्थाई रूप से यहां से चले गए हैं, तो दूसरी ओर और ज्यादा रिक्रूटों को शामिल किया जा रहा है ताकि स्थानीय आतंकवाद की जड़ें मज़बूत बनी रहें.

साउथ कश्मीर से गायब नौजवान

एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि साउथ कश्मीर से 60-70 युवा गायब हैं. अनुमान है कि वे आतंकी गुटों में शामिल हो गए हैं. हालांकि, स्थिति तभी साफ होगी, जब हालात सामान्य हो जाएंगे. इनके जिहादी ग्रुप में शामिल होने का एक सबूत य़ह है कि पिछले तीन महीनों में साउथ कश्मीर में पुलिसकर्मियों से लगभग 65 हथियार छीन लिए गए हैं.

अभी रविवार को ही आतंकवादी दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग जिले के डुरू क्षेत्र के दालवाश इलाके में एक टीवी टॉवर के गार्ड रूम में आ घुसे. आतंकवादियों ने टीवी टॉवर की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया और उनकी पांच सर्विस राइफलें लेकर फरार हो गए. आतंकियों ने सेना जैसी वर्दी पहन रखी थी. 

आतंकी टॉवर पर तैनात भारतीय रिजर्व पुलिस के जवानों से तीन एसएलआर राइफलें, एक कार्बाइन राइफल और एक इन्सास राइफल छीनकर भाग गए. हालांकि, हाल के दिनों में हालात में कुछ सुधार हुआ है. सुरक्षा बल स्थानीय आतंकियों पर दबाव बनाने की कोशिशों में जुटे हुए हैं.

एक पुलिस अधिकारी का कहना है कि पिछले पखवाड़े या कुछ पहले हमने साउथ कश्मीर के हिस्सों में घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन फिर शुरू किया है, लेकिन हम किसी भी आतंकी को पकड़ पाने या मार गिराने में सफल नहीं हो सके हैं. 

पुलिस अधिकारी का आगे कहना है कि हालांकि ये ऑपरेशन आतंकियों की मौजूदगी होने की सूचना पर आधारित नहीं थे. हमारा एकमात्र मकसद यही है कि राज्य की हुकूमत फिर स्थापित हो, लोगों को बरगलाने वाले और प्रदर्शनों के लिए उकसाने वाले आतंकियों का सफाया हो.

First published: 20 October 2016, 8:32 IST
 
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