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चंपारण सत्याग्रह के 100 साल पूरे, सबसे पॉवरफुल रेल इंजन को हरी झंडी दिखाएंगे पीएम मोदी

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 April 2018, 8:45 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज बिहार में चम्पारण के शताब्दी समारोह के अवसर पर पटना पहुंचेंगे. शताब्दी समापन समारोह के अवसर पर देश भर में होने वाले कार्यक्रम से जुड़ेंगे और स्वच्छाग्रहियों को संबोधित करेंगे. पीएम मोदी इस मौके पर मोतीहारी में 20,000 स्व्च्छा ग्रहियों और स्वच्छता दूतों को संबोधित करेंगे.गांधी जी ने यह सत्याग्रह उन किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने के उद्देश्यए से शुरू किया था जिन्हें नील की खेती करने के लिए मजबूर किया गया था.

पीएम ग्रीनफील्ड इलेक्ट्रिक लोकोमेटिव फैक्ट्री मधेपुरा को राष्ट्र को समर्पित करेंगे. इसके साथ ही पीएम मोदी देश के सबसे पॉवरफुल 12000 हॉर्सपावर वाले रेल इंजन को हरी झंडी दिखाएंगे. ये इंजन पटरी पर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ेगा. प्रधानमंत्री मोदी इस दौरान मोतिहारी के बापूधाम रेलवे स्टेशन से 'स्वच्छाग्रह एक्सप्रेस' को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे. यह ट्रेन अगले छह माह में देशभर के लगभग सभी मुख्य रेलवे स्टेशनों पर जाएगी. 14 डिब्बों वाली इस ट्रेन में महात्मा गांधी के स्‍वच्छता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए फोटोग्राफ और सफाई से संबंधित नारे लिखे होंगे.

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चम्पारण में आज का कार्यक्रम
पीएम मोदी सुबह 10 बजे पटना पहुंचेंगे और फिर वहां से हेलिकॉप्टर के जरिए पूर्वी चंपारण के मुख्यालय मोतिहारी जाएंगे. मोतिहारी में प्रधानमंत्री 'सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह' कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और एक सभा को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री चंपारण में कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत भी करेंगे.

भारत और नेपाल की सीमा से लगा चंपारण इलाका आजादी के आंदोलन के दौरान काफी सुर्खियों में रहा था. महात्मा गांधी ने चंपारण से ही अंग्रेजों के खिलाफ नील आंदोलन के जरिए आजादी की मशाल जलायी थी.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने एक सदी पहले 10 अप्रैल 1917 को अंग्रेजों के खिलाफ चंपारण सत्याग्रह शुरू किया था. गांधी जी ने यह सत्याग्रह उन किसानों के अधिकारों के लिए लड़ने के उद्देश्यए से शुरू किया था जिन्हें नील की खेती करने के लिए मजबूर किया गया था. आज का दिन चंपारण सत्याग्रह के शताब्दी समारोह के समापन के तौर पर मनाया जा रहा है.

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गांधी जी ने चंपारण जिले में साल 1917 में बिहार के किसानों के लिए आंदोलन शुरू किया था. किसानों को जबरन नील की खेती कराई जा रही थी और गांधी जी ने इसी के खिलाफ आंदोलन किया. गांधी जी के इस आंदोलन को चंपारण सत्याग्रह के नाम से जाना जाता है.

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के मोतिहारी दौरे के मद्देनजर जिले में सुरक्षा बंदोबस्त कड़े कर दिए किए गए हैं. पूर्वी चंपारण जिले का मोतिहारी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर है, इस वजह से भी चौकसी बढ़ा दी गई है. मोदी जब तक मोतिहारी में रहेंगे तब तक पूर्वी चम्पारण से लगी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा को सील कर दिया जाएगा.

क्या है 'चलो चंपारण'
महात्मा गांधी ने 10 अप्रैल, 1917 में बिहार के लोगों में शिक्षा, स्वास्थ्य, हुनर, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दे उठाते हुए चलो चंपारण अभियान शुरू किया था. आज इस अभियान के 100 साल पूरे हो रहे हैं. इस उपलक्ष्य में सत्याग्रह से स्वच्छाग्रह अभियान शुरू किया गया था. गौरतलब है कि 3 अप्रैल से 10 अप्रैल तक देश के विभिन्न हिस्सों ने 20 हजार से अधिक स्वच्छाग्रहियों ने बिहार के विभिन्न जिलों में स्वच्छता मिशन को जनांदोलन में बदलने के लिए काम किया है.

 

First published: 10 April 2018, 8:45 IST
 
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