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कश्मीर: चरमपंथ की राह पर 150 नौजवान

सुहास मुंशी | Updated on: 29 October 2016, 8:13 IST
(सजाद मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • कश्मीर में सुरक्षाबलों की गोलियों से हुई मौत और ज़ख़्मी लोगों का शोर थमा तो एक नई मुसीबत मुंह बाए खड़ी है. ख़ुफ़िया रिपोर्ट कहती है कि घाटी के सैकड़ों लड़के बंदूकों के साथ लापता हैं. 
  • सुरक्षाबलों के लिए अब यह बड़ी चुनौती है कि बंदूक उठाने वाले लड़कों और पटरी पर लौट रही ज़िंदगियों में ख़लल डालने वालों से कैसे निपटा जाए. 

जम्मू-कश्मीर राज्य के इंटलिजेंस इनपुट के मुताबिक तकरीबन 100 लड़के अपने घरों से गायब हैं. ये सभी हिजबुल मुजाहिदीन या लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हो सकते हैं. इनके भूमिगत होने का सिलसिला अभी तक थमा नहीं है. मुमकिन है कि साल के अंत तक यह संख्या बढ़कर 150 हो जाए.  यह सबकुछ बुरहान वानी की मौत के बाद उपजे गुस्से की वजह से हो रहा है. 

ख़ुफ़िया विभाग के अफ़सर ने कहा, कश्मीर के गांव और कस्बों से तकरीबन 100 लड़कों के गायब होने की खबर है लेकिन यह संख्या 150 तक हो सकती है. यह संख्या पिछले साल बंदूक उठाने वाले लड़कों के मुकाबले दोगुनी है. सेना को यह फिक्र नहीं है कि वे कश्मीरी नौजवानों का सामना कैसे करेंगे. क्योंकि सेना जानती है कि ये लड़के अभी मुकाबला करने के लायक ही नहीं हैं. 

मगर चिंता इस बात की है कि उग्रवादी इन लड़कों का इस्तेमाल किस तरह करेंगे. वे हिट एंड रन जैसे काम को भी अंजाम दे सकते हैं. किसी भीड़ पर हथगोला फेंक सकते हैं या फिर किसी नेता के घर पर हमला कर सकते हैं. इनमें से कुछ बुरहान वानी की तरह लोगों को उकसाने के काम में शरीक हो सकते हैं. जैसे लड़कों को बंदूक उठाने के लिए भड़काने वाले वीडियो और फोटो दिखाना.

घाटी में तैनात सीआरपीएफ के एक जवान ने कहा, 'इन लड़कों के पास मुकामी बाशिंदों का समर्थन है. इसलिए हमें डर है कि घाटी में हिंसा का नया दौर कहीं दोबारा न शुरू हो जाए. अगर उन्होंने हम पर गोली चलाई या हथगोला फेंक दिया तो हम कर ही क्या सकते हैं? ख़ुफिया ब्यूरो के मुताबिक पिछली बार उन्होंने हमला लूटी गई बंदूकों से किया था. मालखाने से करीब 100 बंदूकें फिर गायब मिली हैं. 

अगर ढंग से प्रशिक्षण लिए लड़ाकों के हाथ में ये बंदूकें चली गईं तो तबाही हो सकती है. नौसिखिये भी इन हथियारों से थोड़ा-बहुत नुकसान तो पहुंचाएंगे ही. 

दोबारा बग़ावत का डर

वहीं सीएम महबूबा मुफ्ती ने पुलिस स्मारक दिवस पर अपील की कि वे स्थानीय उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने से बचें  क्योंकि एनकाउंटर में अगर स्थानीय लड़का मारा गया तो विद्रोह दोबारा भड़क सकता है. रिपोर्टों के मुताबिक इस प्रोग्राम में उन्होंने कहा, बहुत से लड़के और युवा घाटी से लापता हैं. हो सकता है कि वे उग्रवादी बन गए हों. मैं पुलिस से गुज़ारिश करती हूं कि लोकल उग्रवादियों को मुठभेड़ में नहीं मारें. इन नौजवानों को फिर से मुख्य धारा में जोड़ने की कोशिश होनी चाहिए'.

गिरफ़्तारियां

पुलिस सूत्रों के मुताबिक पिछले तीन हफ्ते में घाटी से 1 हज़ार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. हालांकि पत्थरबाजी और राष्ट्र विरोधी कारनामों में शामिल लोगों की संख्या काफ़ी ज़्यादा है. 

राज्य के ख़ुफ़िया ब्यूरो के एक सूत्र ने कहा, 'हालांकि हमारी असली परेशानी पर्दे के पीछे वालों से है जो इन्हें पत्थर फेंकने और ग़ैरकानूनी काम करने के लिए उकसाते हैं. एजेंसी के मुताबिक ऐसे चार से साढ़े चार हजार लोगों की शिनाख़्त कर उनपर कार्रवाई की गई है. इनके ख़िलाफ़ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है'.

वहीं सुरक्षा मामलों के जानकार कहते हैं कि कश्मीर के हालात 90 के दशक जैसे हो गए हैं. केंद्र सरकार की साख़ पर बट्टा लगा है. केंद्र सरकार का अलगाववादियों से निपटने का तरीका कश्मीर के प्रति इसकी दीर्घकालीन नीति का संकेत है. पुलिस जितनी कार्रवाई करेगी, इनकी संख्या उतनी ही बढ़ेगी. इसलिए तय करना मुश्किल है कि क्या सरकार इससे निपटने के लिए  समझौतावादी रास्ता अपनाएगी या जबरन सारे अलगाववादियों का खात्मा करेगी? जबरन ख़त्म करने में एक रिस्क भी है कि ये दोबारा पैदा हो जाएंगे. 

First published: 29 October 2016, 8:13 IST
 
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