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माफ कीजिये! हमारी सोसायटी में मुसलमानों के लिए नो एंट्री

अश्विन अघोर | Updated on: 23 September 2016, 7:27 IST
QUICK PILL
  • मकान मालिक और ख़रीदार के बीच समझौता होने के बावजूद सिर्फ मुसलमान होने के नाते हाउसिंग सोसायटी ने मकान बेचने के लिए एनओसी जारी करने से मना कर दिया था. 
  • ख़रीदार की शिकायत पर वसई पुलिस ने सोसायटी के 11 सदस्यों को गिरफ़्तार करने के बाद एनओसी भी जारी करवाया है. 
  • यह पहली बार है कि जब देश में इस तरह के मामले में गिरफ़्तारी हुई है. 

मुंबई सच्चे मायनों में एक कॉस्मोपॉलिटन शहर है, जहां अलग-अलग इलाक़ों से आए लोग बसे हुए हैं. कम से कम में देश के बाकी हिस्सों में मुंबई के बारे में कुछ सालों पहले तक यही राय थी. लेकिन अब यहां वहां एक ख़ास मज़हब मतलब मुसलमानों के लिए रहने की समस्या बढ़ती जा रही है, ऐसे में उनके लिए मुंबई ड्रीम अब दुःस्वप्न बनता जा रहा है.

देश के विभिन्न अंचलों से लाखों लोग बड़ी हसरत से मुंबई में अपनी किस्मत आज़माने के लिए आते हैं. कुछ के सपने यहां आकर साकार हो जाते हैं और कुछ के नहीं. इसके बावजूद इस शहर ने हर किसी को कुछ न कुछ दिया ही है. हालांकि हर किसी को अपना मनचाहा मुकद्दर न भी मिला हो, फिर भी इस शहर से लोगों ने उम्मीदें नहीं छोड़ी हैं.

विकार अहमद खान, उत्तर प्रदेश में आगरा के निवासी हैं. वे भी 2003 मे अपना भाग्य अजमाने के लिए मुंबई आए थे. यहां आकर उन्होंने कांच का कारोबार प्रारंभ किया. व्यवसाय में उनको अच्छी कामयाबी भी हासिल हुई. बीते 13 बरसों में उन्होंने काफी धन अर्जित किया. खान इस समय पालघर जिले के वसई में अपनी पत्नी और तीन बच्चों के परिवार के साथ रहते हैं. जिस घर में वे रह रहे थे,बच्चों के बड़े होने के साथ उन्हें वह छोटा महसूस होने लगा. परिवार की जरूरत के मुताबिक उन्होंने बड़ा घर तलाशना शुरू किया. उनके वर्तमान आवास के निकट कुछ मीटर के फासले पर ही उन्हें एक ऐसा फ्लैट मिल भी गया. खान ने इसके मकान मालिक से मुलाकात की, एक सप्ताह पहले ही सभी औपचरिकताएं भी पूरी कर दी. सौदा पक्का हो गया, बस आवासीय सोसायटी की प्रबंध समिति से अनापत्ति पत्र (एनओसी) पाना भर रह गया था. वे सोच रहे होंगे कि “हैप्पी जीवन सहाकारी समिति” में इस नए घर को खरीद कर वे अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन की शुरुआत करेंगे. मगर उन्हें यह जानकर गहरा झटका लगा कि आवासीय समिति की प्रबंध समिति ने यह कहकर अनापत्ति पत्र देने से इनकार कर दिया कि फ्लैट किसी मुस्लिम को नहीं बेचा जा सकता है.

कृपा कर मुसलमान नहीं!

हाउसिंग सोसायटी के फैसले से गृहस्वामी जग्नेश पटेल भी भौंचक्के रह गए, जो कि अपना घर खान को बेचने के इच्छुक थे. प्रबंध समिति के फैसले से व्यथित आवासीय समिति के उप रजिस्ट्रार और वसई पुलिस थाने में शिकायत की. इसके आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 (ए) एवं 298 के तहत प्रबंध समिति के 11 सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोप में पुलिस ने प्रबंध समिति के इन 11 सदस्यों में नौ को गिरफ्तार कर लिया. इसके बाद प्रबंध समिति अनापत्ति पत्र जारी करने के लिए रजामंद हो गई. गिरफ्तार किए गए लोगों को जमानत पर रिहा कर दिया गया है. अनापत्ति पत्र जारी करने से इस आधार पर इंकार किया गया था कि प्रबंध समिति के अन्य सदस्य ऐसे लोगों को फ्लैट देने से असहमत हैं जो कि मांसाहारी हैं। दिलचस्प बात यह इमारत में 16 फ्लैटों में से दो पहले से ही मुसलमानों के हैं.

कार्रवाई के बाद एनओसी जारी

ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि किसी ब्लॉक में प्रबंध समिति के सदस्यों को इस तरह के भेदभाव के आरोप में गिरफ्तार किया गया है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, खान ने फ्लैट खरीद करने के लिए आवासीय ऋण के लिए आवेदन किया तो उसे इसके लिए आवासीय प्रबंध समिति से अनापत्ति प्रमाण पत्र की जरूरत पड़ी. इसलिए पटेल एनओसी लेने के लिए प्रबंध समिति के पास गया था.

लेकिन, एनओसी के बजाय उसे एक पत्र सौंपा दिया गया, जिसमें आवासीय समिति के अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर थे, जिन्हें इस सौदे से एतराज था. इसमें लिखा था कि किसी मुसलमान को फ्लैट बेचा जाना उन्हें मंजूर नहीं है। खास बात यह है, गिरफ्तारी के बाद अब प्रबंध समिति ने एनओसी जारी कर दी और पटेल और खान से माफी भी मांगी है. 

सोसायटी में पहले से हैं दो मुसलमान परिवार

मांसाहारी परिवारों को फ्लैट बेचने से इनकार करने के बाद, यह शायद पहला वाकया है, कि धर्म या संप्रदाय विशेष के आधार पर फ्लैट देने से इंकार किया गया हो. पटेल ने बताया, 'प्रबंध समिति द्वारा इस तरह का पत्र जारी करना गैरकानूनी था. यह कदापि स्वीकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि मेरी मां कांता बेन इस फ्लैट की स्वामी हैं, उक्त पत्र उनको संबोधित किया गया था. प्रबंध समिति ने भी इसी प्रकार सुझाव दिया था कि बेहतर होगा कि समुदाय के ही किसी अन्य को हम यह फ्लैट बेचें.'

पटेल का कहना है कि देश में पहली बार ऐसा हुआ है कि धर्म के आधार पर किसी को फ्लैट देने से मना करने पर गिरफ्तारियां हुई हों. पटेल का यह भी कहना है, 'अचरज इस बात का है कि सोसायटी में दो फ्लैट पहले से ही मुसलमानों के हैं, उसके बावजूद मेरे द्वारा किए इस सौदे पर ही आपत्ति की गई है. सोसायटी के सदस्यों से मेरी कोई अदावत नहीं है बावजूद इसके मैं उन्हें इस प्रकार का भेदभाव करनें की छूट नहीं दे सकता हूं.'

उन्होंने यह भी बताया, 'खान ने जिस समय मेरे द्वारा मांगी कीमत पर फ्लैट खरीदने के लिए मुझसे संपर्क किया था, मैंने सोसायटी को इस बारे में सूचित किया था और यह भी पूछा था कि सोसायटी में यदि अन्य कोई इसे खरीदने के लिए इच्छुक है, तो वह खरीद सकता है. मगर कई दिनों तक कोई इसके आगे नहीं आया। अगर और विलंब होता तो इसका नतीजा यह होता कि खान के साथ जो सौदा किया है वह भी समाप्त हो जाता. इसलिए मैने सौदे को पक्का कर दिया.'

वकार अहमद खान ने कहा, 'पटेल को सौदे के लिए सांकेतिक तौर पर एक लाख रुपए की राशि का भुगतान किया गया था और मैं आवास ऋण के लिए एनओसी चाहता था. मैंने इस फ्लैट को इसलिए प्राथमिकता दी, क्योंकि जहां मैं इस समय रह रहा हूं, वहां से यह करीब है और मेरे बच्चों का स्कूल भी यहां से नजदीक पड़ता है. अब चूंकि आवासीय समिति के सदस्यों ने एनओसी देने के लिए सहमति प्रदान कर दी है, मैं जल्द ही इस फ्लैट में चला जाऊंगा.

First published: 23 September 2016, 7:27 IST
 
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