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महाराष्ट्र: छिन जाएगी 11,700 दलित-आदिवासियों की नौकरी!

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 February 2018, 11:58 IST

भाजपा शासित महाराष्ट्र में 11,700 दलित और आदिवासी लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है. दरअसल पिछले साल सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को आदेश दिया था कि जिन लोगों ने फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी या दाखिला ली है, तो उनकी नौकरी या डिग्री रद्द की जाए. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से महाराष्ट्र सरकार इस समय मुश्किल में आ गई है.

सात महीने बीतने के बाद अब महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार पर सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को लागू करने का दबाव है. राज्य में करीब 11,700 ऐसे सरकारी कर्मचारी हैं, जिन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर दलित या आदिवासी कोटे में नौकरी हासिल की थी.

 

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक महाराष्ट्र में अनुसूचित जाति(एसटी) कोटे के तहत 11,700 लोगों ने फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी ली हैं. अब सरकार ये नहीं समझ पा रही है कि इतने लोगों के साथ क्या किया जाए. सरकारी नौकरियों के लिए फ्रॉड किया जाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र प्रशासन के लिए नौकरी में फर्जीवाड़े की इतनी बड़ी संख्या सामने आना आंखे खोलने वाला है.

अधिकारियों और सरकार के सामने यह एक बड़ा सवाल है कि आखिर इतने सारे लोगों ने फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए कैसे नौकरी ले ली. इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की चौतरफा आलोचना भी हो रही है और प्रशासन को ये भी नहीं समझ आ रहा है कि आखिर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को कैसे लागू किया जाए.

सबसे ज्यादा परेशानी वाली बात यह है कि ज्यादातर कर्मचारी 20 या इससे ज्यादा साल से नौकरी में हैं. कई लोग क्लर्क से प्रमोशन पाकर उप सचिव के पद तक पहुंच गए हैं. ऐसे में सरकार के सामने उन्हें हटाने की चुनौती है. हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि इससे फर्क नहीं पड़ेगा कि कोई भी शख्स कितने समय से नौकरी में है. अगर कोई भी इस मामले में पकड़ा जाता है तो उस पर कार्रवाई जरूर होगी.

इस मसले पर 20 जनवरी को मुख्य सचिव सुमित मलिक की अध्यक्षता में बैठक हुई थी. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, " कानून विभाग और एडवोकेट जनरल दोनों ने ही कहा कि कोर्ट का फैसला इस मामले में बिल्कुल स्पष्ट है. इन कर्मचारियों को बचाने का कोई रास्ता नहीं है." हालांकि मुख्य सचिव ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले को फॉलो करेंगे.

First published: 4 February 2018, 11:58 IST
 
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