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15,747 गांव, 25 लाख किसान: क्या 3,049 करोड़ से राहत मिलेगी महाराष्ट्र को?

अश्विन अघोर | Updated on: 2 January 2016, 7:29 IST
QUICK PILL
  • लगभग 25,00,000 किसानों की फसल सूखे के कारण बर्बाद हो गयी है, इनमें ज्यादातर किसान कपास और सोयाबीन की खेती करते थे.
  • राठवाणा और विदर्भ के किसानों को इस सूखे ने पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है. बीते एक महीने में 112 किसानों ने आत्महत्या की है.
महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने किसानों के लिए 3049 करोड़ रुपये के विशेष राहत पैकेज की घोषणा की है. शायद आप जानते हैं कि देश के आधे हिस्से कि तरह ही यह पूरा राज्य भयंकर सूखे की चपेट में है. लेकिन क्या आपको स्थिति की गंभीरता का अंदाजा है? इन चिंताजनक आंकड़ों पर गौर करें. आपकी आंखे फटी की फटी रह जाएगी:

  • राज्य में 15 फीसदी यानी 15747 गांव सूखे से बदहाल हैं.
  • लगभग 25,00,000 किसानों की फसल सूखे के कारण बर्बाद हो गयी है, इनमें ज्यादातर किसान कपास और सोयाबीन की खेती कर रहे थे.
  • इसके कारण राज्य में 4000 करोड़ रुपए का आर्थिक नुकसान हुआ है.
  • विशेष तौर पर मराठवाणा और विदर्भ के किसानों को इस सूखे ने पूरी तरह से बर्बाद कर दिया है. इसके कारण बीते चार सालों में लगभग 1060 किसानों ने आत्महत्या कर लिया है.
  • केवल मराठवाण क्षेत्र में ही 112 किसानों ने इस महीने में खुद को मार लिया है. जबकि पिछले साल दिसंबर में सिर्फ दो किसानों ने आत्महत्या की थी.
  • कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक मराठवाणा में साल 2015 में औसतन 30 किसानों ने हर हफ्ते आत्महत्या की.

स्थिति की भयावहता को देखते हुए राज्य सरकार ने 10,512 करोड़ रुपये के राहत पैकेज की घोषणा की थी. इसमें से 7,412 करोड़ रुपये सीधे किसानों को मिलने की उम्मीद है और बची धनराशी को कृषि संसाधनों और सब्सिडी के तौर पर खर्च करने की योजना है.

अधिकारियों के मुताबिक मराठवाणा में साल 2015 में औसतन 30 किसानों ने हर हफ्ते आत्महत्या कीमुख्यमंत्री देवेंद्र फणनवीस ने कहा है कि केंद्र से अभी और विशेष सहायता मिलने की उम्मीद है. केंद्र ने 3,049 करोड़ रुपये का जो पैकेज दिया है वह अब तक किसी भी राज्य को केंद्र से मिला सबसे बड़ा राहत पैकेज है.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राव साहेब दानवे के मुताबिक राज्य की फणनवीस सरकार ने केंद्र से 4,002 करोड़ रुपये की मांग की थी. हमें और भी ज्यादा पैकेज की उम्मीद थी, लेकिन हम इस राहत पैकेज से भी संतुष्ट हैं क्योंकि केंद्र ने सूखा राहत का सबसे बड़ा पैकेज महाराष्ट्र को दिया है.

मार्च में केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय आपदा राहत कोष से महाराष्ट्र में सूखे की स्थिति से निपटने के लिए 902 करोड़ रुपये और दिये थे.

बीते साल गृहमंत्री राजनाथ सिंह के द्वारा प्रदेश में किसानों को सूखे की क्षति से उबारने के लिए 2,000 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की घोषणा की गई थी.

सालों से किसानों की आत्महत्या की वजह उनकी फसलों का बर्बाद होना और उनके कर्ज के बोझ में दबे रहना है. 2006 में जब आत्महत्याओं की संख्या 4,453 थी, उस समय अफसोसजनक तरीके से भारत विश्व में अमेरिका को पछाड़ते हुए रुई उत्पादन में दूसरे पायदान पर खड़ा था. विदर्भ में उस दौरान सबसे ज्यादा उन्हीं किसानों ने आत्महत्या की थी, जो रुई की खेती से जुड़े थे.

एनसीआरबी के 2014 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक भारत के सभी राज्यों की तुलना में महाराष्ट्र के सर्वाधिक 2,568 किसानों ने आत्महत्या की.

वसंतराव नायक मिशन फार फार्मर्स सेल्फ रिलायंस के चेयरमैन किशोर तिवारी के मुताबिक बीटी काटन के आने से पैदावार में बढोत्तरी तो हुई है, लेकिन इसने किसानों को बहुत ज्यादा लाभ नहीं दिया.

पिछले चार सालों के लगातार सूखे ने किसानों को वास्तव में अपाहिज बना दिया है. केंद्र से मिल रहे इस राहत पैकेज से निश्चित तौर पर किसानों को लाभ मिलेगा.

राज्य को केंद्र से अब तक 3,049 करोड़ और 902 करोड़ यानी लगभग 4,000 करोड़ रुपये मिल चुके हैं

तिवारी ने बताया कि इस पैकेज से लगभग 25 लाख किसानों को फायदा पहुंचेगा और सबसे अच्छी बात तो ये है कि पैसा सीधे किसानों के बैंकखातों में जमा होगा. राज्य को केंद्र से अब तक 3,049 करोड़ और 902 करोड़ यानी लगभग 4,000 करोड़ रुपये मिल चुके हैं.

तिवारी को उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों में राहत राशि में इजाफा होगा, जिससे विदर्भ के और भी गांवों को सूखाग्रस्त सूची में शामिल किया जा सकेगा.

राहत पैकेज किसानों के अलावा राज्य की भाजपा सरकार के लिए भी खुशी की खबर है. राज्य सरकार पहले इस बात पर आलोचना झेल चुकी है कि केंद्र और राज्य दोनों जगहों पर समान दल की सरकार है और केंद्र के प्रतिनिधि साल में चार बार सूखा ग्रस्त इलाकों का दौरा कर चुके हैं.

पैकेज की घोषणा के बाद फणनवीस ने आलोचकों को जवाब दिया था कि ये उन लोगों को जवाब है जो सूखे के मामले पर किसानों के साथ खड़े होने के बजाय इस पर राजनीति कर रहे हैं. लेकिन विपक्षी दल कांग्रेस इस जवाब से कतई प्रभावित नहीं हुई है. पार्टी का कहना है कि पैकेज ऐसा नहीं है कि खुश हुआ जा सके.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौहान कहते हैं, ''यह पैकेज दिखावे के अलावा और कुछ नहीं है. इससे किसानों को राहत पहुंचने वाली नहीं है. मैं इसमें ऐसा कुछ भी नहीं देख रहा हूं जो मुझे खुशी दे सके. देखना यह भी है कि जितने भी वादे किसानों से किये गये हैं वो कितनी जल्द उन तक पहुंचते हैं. क्योंकि वह और इंतजार नहीं कर सकते हैं.''

महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के आंकड़े, 1995-2014

1995 - 1,083

1996 - 1,981

1997 - 1,917

1998 - 2,409

1999 - 2,423

2000 - 3,022

2001 - 3,536

2002 - 3,695

2003 - 3,836

2004 - 4,147

2005 - 3,926

2006 - 4,453

2007 - 4,238

2008 - 3,802

2009 - 2,872

2010 - 3,141

2011 - 3,337

2012 - 3,786

2013 - 3,146

2014 - 2,568

First published: 2 January 2016, 7:29 IST
 
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