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WHO के सॉलिडैरिटी ट्रायल में 1500 भारतीय मरीजों पर होगा परीक्षण, आजमाई जाएंगी ये दवाएं

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 May 2020, 9:22 IST

Coronavirus : विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के ग्लोबल सॉलिडैरिटी ट्रायल के लिए भारत से लगभग 1500 मरीजों को चुना जायेगा. ये मरीज देशभर के 30 अस्पतालों से चुने जायेंगे. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने रोगियों की चयन प्रक्रिया तेज कर दी है. इन परीक्षणों में इंटरफेरॉन (β1a) के साथ चार संभावित एंटी-वायरल ड्रग्स रेमेडिसविर, क्लोरोक्वीन / हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन, लोपिनवीर-रीटोनवीर शामिल हैं.

कई देशों में रोगियों को भर्ती करके परीक्षण का उद्देश्य तेजी से यह पता लगाना है कि क्या इनमे से कोई भी दवा रोग को कम करने में सफल होती है या नही. वैक्सीन दुनियाभर में 100 ट्रायल चल रहे हैं लेकिन एक्सपर्ट का कहना है कि वैक्सीन बनने में अभी ज्यादा वक्त लग सकता है. दवाओं के इस ट्रायल में लगभग 100 देशों के मरीज शामिल हो रहे हैं.


ICMR के अधिकारी ने कहा “अभी हम वास्तव में संख्याओं का पालन कर रहे हैं, इसलिए यह ट्रायल उन क्षेत्रों में होंगे जहां से ज्यादा मामले आ रहे हैं. इनमें से नौ जगहों को चुन लिया गया है और चार और साइटें स्वीकृत होने के बहुत करीब हैं. हालांकि 1500 मरीज प्रारंभिक संख्या है, आवश्यकता पड़ने पर परीक्षण के लिए अधिक रोगियों को भर्ती किया जा सकता है.

28 मार्च को ICMR ने घोषणा की कि भारत डब्ल्यूएचओ सॉलिडैरिटी ट्रायल में भाग लेगा, जिसके लिए 100 से अधिक देशों ने ट्रायल के माध्यम से जल्द से जल्द प्रभावी इलाज खोजने के लिए भागीदारी का अनुरोध किया है. हालांकि परीक्षण में भाग लेने के लिए अपनी सहमति देने वाले रोगियों को यह चुनने को नहीं मिलेगा कि वे परीक्षण के किस आर्म का हिस्सा बन रहे हैं. यह रोगियों के लिए दवाओं का एक यादृच्छिक आवंटन होगा.

परीक्षणों में आजमाई जाने वाली सभी दवाएं, रेमेडिसविर को छोड़कर अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के लिए भारत में पहले से ही इस्तेमाल की जा चुकी हैं. हालांकि इसके परिणाम वैश्विक एनरॉलमेंट पर आधारित होंगे, जिसका अर्थ है कि सभी देशों से भर्ती रोगियों के डेटा का निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए विश्लेषण किया जाएगा. यह केवल भारतीय रोगियों के बीच के परिणामों पर आधारित नहीं होगा.

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First published: 14 May 2020, 9:11 IST
 
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