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3 साल में कोयला खदानों में 159 हादसे, 166 मौतें

शौर्ज्य भौमिक | Updated on: 3 January 2017, 8:00 IST
(पीटीआई)

पिछले गुरुवार झारखंड के राजमहल इलाके में एक कोयला खदान के धंसने से 17 मज़दूरों की मौत हो गई और लगभग 30 लोग भीतर ही फंस गए. गोड्डा जिले की यह खदान ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की है. खदान में फंसे लोगों को बचाने का सिलसिला अभी भी जारी है. इस बीच केंद्र और राज्य सरकार ने उन्हें मुआवजा देने की घोषणा की है. बदकिस्मती से यह हादसा फिर याद दिलाता है कि भारत में खदान हादसे आम हो गए हैं.  

भारत में पिछले 3 सालों में कोयला खदानों में कई बड़े हादसे हुए हैं. एक नजर:

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  • बड़े हादसे हुए भारत में 2013 से जून 2016 के बीच हुए हैं. 
  • इनमें से ज्यादातर (39) साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में हुए हैं, जो छतीसगढ़ और मध्यप्रदेश में हैं. एसईसीएल कोल इंडिया के अधीन कंपनी है. यह भारत की सबसे ज्यादा कोयला देने वाली कंपनी है. 
  • हादसों में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) दूसरे नंबर पर है, जहां इस दौरान 30 हादसे हुए. यह भी कोल इंडिया के अधीन कंपनी है. इनकी ज्यादातर खानें झारखंड और पश्चिम बंगाल में हैं. नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड्स (एनईसी), जो असम के बाहर है, सबसे सुरक्षित खदान है. यहां इस दौरान एक भी हादसा नहीं हुआ. 

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  • लोग अभी तक इन हादसों के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं. 
  • हालांकि बड़े हादसों और मौतों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में धीरे-धीरे कम हो रही है. 
  • एनईसी के अलावा, ओडिशा के बाहर स्थित महानदी कोलफील्ड्स भी सुरक्षित खदान है. यहां 2013 से जून 2016 तक महज पांच हादसे हुए, और पांच जनों की मौत हुई.
  • भारत में राज्य के स्वामित्व वाली कुछ प्रमुख कोयला कंपनियों में ये शामिल हैं. ईसीएल, एसईसीएल, बीसीसीएल, एनईसी, एमसीएल, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड, नॉर्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोल्डफील्ड्स लिमिटेड और कोल इंडिया लिमिटेड.

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  • लोगों के खिलाफ आंतरिक सुरक्षा संगठन (आईएसओ) की जांच के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई. इसमें खदान अधिकारी शामिल हैं. 
  • खदानों के घातक हादसों की जांच-पड़ताल आईएसओ के निर्देशानुसार की जाती है. यह जानने के लिए कि उन खदान हादसों के होने की वजह और परिस्थितियां क्या थीं.
  • आईएसओ हादसों के लिए जिम्मेदारी भी तय करती है.
  • अगस्त 2016 में पीयूष गोयल ने बताया कि कुछ मामलों में खदान अधिनियम 1952 के अधीन विधि प्रवर्तन निदेशालय/ नियामक प्राधिकरण यानि खदान सुरक्षा के महानिदेशक (डीजीएमएस) भी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के तत्वावधान में कानूनी जांच करवाते हैं. 

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  • लाख रुपए राहत पैकेज दिया गया घातक हादसों में.
  • साथ ही मृतक के नातेदार को रोजगार, अंतिम संस्कार का खर्च, नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट के अनुसार 112,800 रुपए की बीमा योजना के अधीन लाभ.
  • सेवा की अवधि के मद्देनजर ग्रेच्यूटी, कोल माइंस प्रोविडंट फंड के अनुसार पीएफ, अर्जित अवकाश का नकद भुगतान और कोल माइंस पेंशन स्कीम 1998 के अनुासर पेंशन. इन सबके अलावा मौत या स्थाई विकलांगता की स्थिति में 84,600 रुपयों का एक्स-ग्रेशिया का भी भुगतान किया जाता है.

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  • एहतियाती उपाय कोयला खदान के हादसे टालने के लिए किए गए हैं. 
  • कोयले की मैनुअल लोडिंग और ट्रांसपोर्टेशन की जगह मशीनों से ड्रिलिंग, लोडिंग और ट्रांसपोर्टेशन. 
  • गैसीय कोयला खदानों में ज्वलनशील गैस के जमाव होने की स्थिति में चेतावनी. इसके लिए पर्यावरणीय निगरानी की लगातार व्यवस्था की गई है.
  • सिमुलेटर्स, 3डीआर्टिफिशियल इंटलिजेंट ऑडियो विजुअल्स जैसे अत्याधुनिक प्रशिक्षण उपादान का इस्तेमाल करके ऑपरेटर्स और काबिल लोगों का कौशल सुधारने के कदम. 
  • खदानों में प्रशिक्षण अभियानों, सुरक्षा जागरूकता को बढ़ावा और प्रचार के माध्यम से सुरक्षा के मामलों में वर्कर्स की भागीदारी और जागरूकता. 
  • पिछले गुररुवार को हुए हादसे से लगता है कि सरकारी प्रयास कारगर नहीं हो रहे हैं. एक बिलियन टन कोयला उत्पादन पर कोयला खदान में वर्कर्स की मौतों में भारत चीन के बाद दूसरे नंबर पर है. चीन में एक बिलियन टन कोयला उत्पादन पर लगभग 250 मौतें होती हैं, जबकि भारत में 150 से कम. 

First published: 3 January 2017, 8:00 IST
 
शौर्ज्य भौमिक @sourjyabhowmick

संवाददाता, कैच न्यूज़, डेटा माइनिंग से प्यार. हिन्दुस्तान टाइम्स और इंडियास्पेंड में काम कर चुके हैं.

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