Home » इंडिया » 16 parties unite against 'EVM tampering': EC must act to restore their trust
 

ईवीएम टैंपरिंग: विपक्षी दलों की एकजुटता पर ग़ौर करे चुनाव आयोग

चारू कार्तिकेय | Updated on: 13 April 2017, 9:51 IST


2014 के भूमि अध्यादेश के बाद यह पहला मौका है कि किसी एक मुद्दे पर इतने अधिक विपक्षी दल एक साथ आ गए हों. यहां तक कि नोटबंदी के मुद्दे पर भी इतने अधिक दल एक साथ एक मंच पर नहीं आए थे जितने कि ईवीएम से छेड़छाड़ के मुद्दे पर आ गए हैं. हाल के विधानसभा के चुनाव के परिणामों के आने पर सिर्फ बहुजन समाज पार्टी ने ही यह आरोप लगाया था कि ईवीएम से छेड़छाड़ की गई है. लेकिन जल्दी ही समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने भी इस राग ईवीएम में शामिल हो गए. अब लगभग समस्त संसदीय विपक्ष इस मुद्दे पर एक साथ आ गया है, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता बढ़ गई है.


चुनाव आयोग में जिस तरह से 16 राजनीतिक दलों ने अपनी याचिका दाखिल की है इसके बाद चुनाव आयोग के लिए इस मुद्दे पर पूरी तरह से सजग हो जाना चाहिए, कुछ नहीं तो अधिक राजनीतिक दलों की संख्या ही उसके लिए एक चिंता का एक कारण हो सकता है. प्रतिद्वंद्वी पार्टियों जैसे सपा—बसपा और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने अपने आपसी मतभेद भुलाकर इस याचिका पर हस्ताक्षर किए हैं.

क्या कहती है याचिका


इस याचिका में बुनियादी रूप से चुनाव आयोग से यह कहा गया है कि जब तक ईवीएम के दुरुपयोग और इस पर उठाए गए सवालों की पूरी तरह से जांच नहीं हो जाती है और उनका समाधान नहीं हो जाता, तब तक आगामी चुनावों में ईवीएम का प्रयोग नहीं किया जाए. इसमें ईवीएम की गड़बड़ी और उससे छेड़छाड़ के कथित मामलों का संदर्भ देते हुए सवाल उठाया गया है कि इससे चुनावी परिणामों के साथ किसी तरह की धोखेबाजी की संभावना भी खड़ी होती है. याचिका में यह भी कहा गया है कि इससे लोगों का भारत की चुनाव प्रक्रिया में भरोसा कम हो जाएगा.

 

याचिका में चुनावी परिणाम के साथ छेड़छाड़ की आशंका व्यक्त की गई है.


याचिका में कहा गया है कि राजनीतिक दलों का ईवीएम में भरोसा बहुत कम है और यह संदेह बहुत गहरा तथा व्यापक है तथा इससे चुनावी प्रक्रिया की ईमानदारी में लोगों का भरोसा टूट गया है. आगे इसमें यह भी जोड़ा गया है कि राजनीतिक दलों का सर्वाधिक हित इसमें है कि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाए तथा सच को इस देश की जनता के सामने रखा जाए.


याचिका में मांग की गई है कि जब तक ईवीएम से छेड़छाड़ और गड़बड़ी के मुद्दे की राजनीतिक दलों को संतुष्ट करने वाली जांच नहीं हो जाती है, तब तक आगामी सभी चुनाव पुराने कागजी मतपत्र से कराए जाएं. याचिका में कहा गया है कि मतपत्र से मतदान अब भी मतदान का एक मान्य तरीका बना हुआ है और सेक्शन 61ए के अंतर्गत चुनाव आयोग को दिए गए विवेकाधिकार का प्रयोग तभी किया जाए जबकि उन सभी मुद्दों का समाधान हो जाए जो कि यहां उठाए गए हैं.

 

लोकतंत्र में आम राय


इस सारे संवाद में जिस एक क्रियात्मक मुद्दे पर सभी दलों में सहमति है वह यह है कि ईवीएम के प्रयोग को रोककर मतपत्रों से मतदान कराया जाए. लोकतंत्र आम सहमति से चलता है और अगर पूरा विपक्ष ही किसी एक मुद्दे पर एकजुट हो जाए तो कम से कम ऐसे मामले की एक धैर्यपूर्वक सुनवाई तो होनी ही चाहिए. सरकार को भी अब चुनाव आयोग से इन मुदृों पर विचार का आग्रह करना चाहिए और चुनाव आयोग को ईवीएम की विश्वसनीयता स्थापित करने की दिशा में कदम उठाना चाहिए.

ईवीएम की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को जल्दी से जल्दी दोबारा स्थापित होना चाहिए

 

ईवीएम की विश्वसनीयता और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को जल्दी से जल्दी दोबारा स्थापित होना चाहिए.


जानकारी के अनुसार, चुनाव आयोग ने इस मुद्दे पर एक सर्वदलीय मीटिंग बुलाने की मांग पर सहमति जताई है. यह एक अच्छी शुरुआत कही जा सकती है क्योंकि इससे वह पूरी प्रक्रिया शुरू होगी. कमीशन ने इसके पूर्व पंजाब चुनाव में आप की उस मांग को ठुकरा कर शायद गलती कर दी थी कि ईवीएम के परिणामों को साथ में निकले मतदान की पर्ची से मिलाकर देखा जाए. चुनाव आयोग ने आप को सलाह दी थी वह इसके लिए उच्च न्यायालय में एक चुनाव याचिका दाखिल करे, जिसकी वजह से आप ने बहुत जोरदार तरीक से चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर ही सवाल उठाए थे.


निष्पक्षता ही एक पूंजी है जो कि चुनाव आयोग के पास है और अगर पूरे विपक्ष का इससे भरोसा उठ जाता है तो वह दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए एक खतरनाक दिन होगा. पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी, जो कि ईवीएम के प्रबल पक्षधर रहे हैं, ने भी कहा है कि चुनाव आयोग को सभी उठाए सवालों का जवाब देना चाहिए, और जरूरत पड़े तो बार-बार देना चाहिए.

 

ईवीएम में भरोसा और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को पुन: बहाल किया जाना अत्यावश्यक है और यह जिम्मेदारी चुनाव आयोग की ही है कि वह इस दिशा में जितनी जल्दी हो सके कदम उठाए.

 

 

 

First published: 13 April 2017, 9:51 IST
 
चारू कार्तिकेय @CharuKeya

Assistant Editor at Catch, Charu enjoys covering politics and uncovering politicians. Of nine years in journalism, he spent six happily covering Parliament and parliamentarians at Lok Sabha TV and the other three as news anchor at Doordarshan News. A Royal Enfield enthusiast, he dreams of having enough time to roar away towards Ladakh, but for the moment the only miles he's covering are the 20-km stretch between home and work.

पिछली कहानी
अगली कहानी