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पोखरण परमाणु परीक्षण से भारत को क्या मिला?

कुमार सुंदरम | Updated on: 13 May 2016, 8:26 IST

पहली बार सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान के पोखरण में 11 मई और 13 मई 1998 को परमाणु परीक्षण किए थे. गठबंधन द्वारा किए गए इस परीक्षण को लेकर भारतीय मध्य वर्ग में काफी उत्साह देखा गया. माना गया कि इससे भारत को अभेद्य सुरक्षा कवच मिल गया है और देश का कद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में बढ़ गया है.

इन 18 सालों में आखिर भारत को परमाणु परीक्षण से क्या लाभ हुआ?

परमाणु परीक्षण से अभेद्य सुरक्षा मिलने की बात कही गई थी जबकि आज दक्षिण एशिया ज्यादा खतरनाक और असुरक्षित स्थिति में नजर आ रहा है.

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भारत अब दुनिया में हथियारों का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है. दुनिया के कुल हथियार बिक्री में भारत की हिस्सेदारी 14% है. 2006-10 से 2011-15 के बीच भारत द्वारा हथियारों के आयात में 90% की बढ़ोतरी हुई है.

स्टॉकहोम पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) के अनुसार इस साल की शुरुआत में जारी आंकड़ों के अनुसार भारत ने अपने परंपरागत प्रतिद्वंद्वियों चीन और पाकिस्तान से तीन गुना ज्यादा हथियार आयात किया.

दुनिया के कुल हथियार बिक्री में भारत की हिस्सेदारी 14% है

सैन्य खर्च के मामले में भारत का दुनिया में छठा स्थान है. साल 2015 में भारत ने 51.3 अरब डॉलर रुपये रक्षा मद में खर्च किए. दुनिया के कुल रक्षा खर्च में भारत का हिस्सा 2.5-3 % है. भारत अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.3% रक्षा मद पर खर्च किया है.

रक्षा खर्च पर बढ़ते खर्च की उलट इन दस सालों में स्वास्थ्य और शिक्षा पर किया जाने वाला खर्च कम होता रहा है. भारत में अभी 23 करोड़ से अधिक भारतीय भूखे सोते हैं. भारत में अभी भी 37% मौतें 'गरीब देशों' में होने वाली बीमारियों टीबी और मलेरिया से होती हैं.

परमाणु हथियारों के समर्थकों का ये दावा कि इससे क्षेत्र में सुरक्षा और स्थायित्व आएगा जो की गलत साबित हो चुका है. भारत और पाकिस्तान हथियारों के साथ ही डिलिवरी वेहिकल्स पर भी अपना खर्च बढ़ाते जा रहे हैं.

भारत को ये समझना होगा कि परमाणु हथियारों से कोई सुरक्षा नहीं मिलती. इससे केवल हथियारों की होड़ बढ़ेगी. शीत युद्ध के हाल ही में डिक्लासिफाइड दस्तावेज के अनुसार परमाणु हथियारों से सुरक्षा एक मिथक है और हिरोशिमा के बाद परमाणु हथियारों का प्रयोग न होना केवल संयोग की बात है.

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भारत ने बगैर किसी उकसावे के भारत ने पोखरण विस्फोट ऐसे समय में किया जब चीन और पाकिस्तान से उसके संबंध बेहतर हो रहे थे. बीजेपी-आरएसएस ने ये परमाणु परीक्षण केवल अपने अंध-राष्ट्रवादी समर्थकों को खुश करने के लिए किया था.

भारत और पाकिस्तान में जिस तरह सांप्रदायिक उन्माद बढ रहा है उसे देखते हुए दोनों देशों का परमाणु शक्ति संपन्न होने के खतरनाक नतीजे भी हो सकते हैं.

परमाणु हथियारों के समर्थक इस विदेश नीति में बड़ा औजार बताते हैं. लेकिन इससे भारत की विदेश नीति से जुड़ी कोई समस्या इससे हल होती नहीं नजर आ रही है. इसके उलट भारत ने परमाणु शक्ति संपन्न होने की आधिकारिक मान्यता पाने के लिए अमेरिका के संग अपमानजनक परमाणु समझौता किया. फुकुशिमा परमाणु दुर्घटना के बाद जब दुनिया परमाणु रिएक्टर से दूर जा रही है तो भारत को मंहगे और असुरक्षित परमाणु रिएक्टर लगाने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

भारत और पाकिस्तान को मिलकर दक्षिण एशिया को 'परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र' बनाना चाहिए

पोखरण परमाणु परीक्षण से जुड़े गर्व की कीमत आज भारत के वंचित और हाशिये के लोग उठा रहे हैं. फ्रांस से आयात किया गया एक परमाणु रिएक्टर जैतापुरा के लोगों पर थोपा जा रहा है. फ्रांस में इस कंपनी के खिलाफ बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है. कंपनी पर घटिया सामान आपूर्ति करने का आरोप है.

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विदेश नीति के मसले पर पेशेवर नजरिया अपनाने की जगह अंध-राष्ट्रवादी भावनाओं को तुष्ट करने की कोशिश से स्थिति और बिगड़ गई है. नेपाल के साथ भारत के संग इतने खराब कभी नहीं थे, पाकिस्तान के साथ सरकार की क्या नीति है ये शायद ही किसी को समझ नहीं आ रहा है.

पिछले आम चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी ने भारत की पहले परमाणु हथियार का प्रयोग न करने की नीति को बदलेंगे. ऐसे में कोई अचरज नहीं होगा जब 2019 के आम चुनाव से पहले देश में युद्धोन्माद बढ़ जाए.

भारत और पाकिस्तान को मिलकर दक्षिण एशिया को 'परमाणु हथियार मुक्त क्षेत्र' बनाने की कोशिश करनी चाहिए. हिरोशिमा के सत्तर साल पूरे होने पर वहां के बचे हुए लोगों ने परमाणु हथियारों पर पूरी दुनिया में रोक लगाने की मांग की है.

जाहिर है कि भारत को एक समझदार, व्यवहारिक और मानवतावादी रणनीति अपनाने की जरूरत है. तभी उसकी सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बेहतर होगी.

(ये लेखक के निजी विचार है. संस्थान की इनसे सहमति जरूरी नहीं है.)

First published: 13 May 2016, 8:26 IST
 
कुमार सुंदरम @pksundaram

The author is a researcher with the Coalition for Nuclear Disarmament and Peace.

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