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1984 सिख दंगा: सज्जन कुमार को उम्रकैद, दूसरे मुख्य आरोपी कमलनाथ को कांग्रेस ने बनाया CM

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 December 2018, 13:32 IST

1984 सिख विरोधी दंगों के आरोपी कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दिल्ली हाई कोर्ट ने आज दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है. दिल्ली हाई कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सज्जन कुमार को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इसी के साथ सिख दंगों के एक दूसरे आरोपी माने जाने वाले मध्य प्रदेश के नए नवेले मुख्यमंत्री कमलनाथ पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं.

इस मामले पर देश के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला स्वागत योग्य है. उन्होंने कहा, "हम में से कई जो इसके गवाह हैं, यह शायद सबसे वीभत्स प्रकार का नरसंहार था जिसे हमने देखा था. कांग्रेस की सरकार उस दौरान लगातार इसे छुपाने की कोशिश कर रही थीय इसे रफा-दफा करने की कांग्रेस की साजिश असफल हो गई है. सज्जन कुमार 1984 में हुए दंगों का प्रतीक रहा है. सिख दंगों की विरासत कांग्रेस और गांधी परिवार की गर्दन के चारों ओर लटकी हुई है."

वित्तमंत्री ने कहा, "यह विडंबना है कि ये आया उस दिन है कि जब सिख समाज जिस दूसरे नेता को दोषी मानता है, कांग्रेस उसे मुख्यमंत्री की शपथ दिला रही है." कमलनाथ के हाथ में मध्यप्रदेश की कमान दिए जाने के ऐलान के बाद से ही शिरोमणी अकाली दल, शिरोमणी गुरुद्वारा प्रबंधक समिति और आम आदमी पार्टी के विधायक सुखपाल खैरा लगातार इसकी खिलाफत कर रहे हैं. दिल्ली में कमलनाथ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

बता दें कि साल 1984 मेें इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देशभर में ख़ासकर दिल्ली में बड़े पैमाने पर सिखों के क़त्ल-ए-आम हुए. दिल्ली अकाली दल के एम. एस सिरसा ने यह आरोप लगाया कि 1984 में सिख दंगे भड़काने में सज्जन कुमार, जगदीश टाइटलर और कमलनाथ का हाथ था. 1984 में दिल्ली में गुरुद्वारा रकाबगंज में भीड़ जब दो सिखों को जलाकर मार रही थी, उस वक़्त कमलनाथ वहीं मौजूद थे.

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इस पर कमलनाथ ने कभी मौक़ा-ए-वारदात पर अपनी मौजूदगी से इंकार नहीं किया. कमलनाथ के मुताबिक़, वो उस समय वहां पर थे, क्योंकि पार्टी ने उन्हें वहां भेजा था. कमलनाथ कहते हैं, "मैं गुरुद्वारे पर इकट्ठा भीड़ से हमला न करने की मिन्नतें कर रहा था. पुलिस ने ख़ुद मुझसे भीड़ को समझाने की अपील की थी."

कमलनाथ आगे कहते हैं, "1984 सिख विरोधी दंगों की एसआईटी जांच, रंगनाथ मिश्रा कमीशन इन्क्वायरी और जीटी नानावती कमीशन इन्क्वायरी में वो पाक साफ निकले, उनके ख़िलाफ़ जांच में कुछ नहीं पाया गया. ज़रूरत पड़ने पर वो फिर से जांच के लिए तैयार हैं." हांलाकि जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार का नाम जिस तरह दंगों में शामिल था, ऐसे लांछन से कमलनाथ हमेशा बचे रहे.

हालांकि कांग्रेस राज में हुई एसआईटी जांच, रंगनाथ मिश्रा कमीशन जांच, नानावती कमीशन इन्क्वायरी में कमलनाथ के खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हो पाया है. लेकिन सिख संगठन आज भी कमलनाथ पर ऊंगली उठाते हैं.

इसके बाद बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला करते हुए पद से त्यागपत्र देने की मांग की. पात्रा ने कहा कि राहुल गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे देना चाहिए क्योंकि उन्होंने 1984 सिख दंगों के आरोपी कमलनाथ को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया है. पात्रा ने आगे कहा कि कमलनाथ के खिलाफ नानावती कमीशन को एक रिपोर्ट भी जमा की गई है. इसके बाद भी राहुल गांधी ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाया. 

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गौरतलब है कि कमलनाथ मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री होंगे. 72 साल के कमलनाथ 9 बार से छिंदवाड़ा से सांसद हैं, और दशकों से पार्टी के वफ़ादार हैं. वह पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बड़े बेटे संजय गांधी के काफी अच्छे दोस्त रहे हैं. यहां तक कि इंदिरा गांधी उन्हें अपना तीसरा बेटा कहा करती थीं.

First published: 17 December 2018, 13:10 IST
 
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