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1993 मुंबई धमाके: अबू सलेम की सज़ा पर सस्पेंस बरकरार, होगी उम्रकैद या जल्द रिहाई!

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 September 2017, 14:34 IST

साल 1993 के मुंबई धमाकों के मामले में टाडा कोर्ट ने दोषियों को सज़ा सुना दी है. कोर्ट ने मुख्य आरोपी डॉन अबू सलेम और इस ब्लास्ट में उसका साथ देने वाले करीमुल्लाह खान को उम्रकैद की सजा सुनाई है. दोनों पर कोर्ट ने 2-2 लाख रुपये जुर्माना भी लगाया गया है.

कोर्ट ने अन्य दोषियों में से मोहम्मद ताहिर मर्चेट और फिरोज अब्दुल राशिद खान को फांसी की सज़ा सुनाई है, जबकि रियाज़ सिद्दीक़ी को दस साल की सजा मिली है. गौरतलब है कि मुंबई धमाकों के 24 साल बाद अदालत ने अबू सलेम सहित छह लोगों को दोषी करार दिया था. जबकि एक आरोपी को दोषमुक्त कर दिया था. एक दोषी मुस्तफ़ा अहमद डोसा की पहले ही मौत हो चुकी है. 

अबू सलेम की सज़ा पर सस्पेंस बरकरार

टाडा कोर्ट की सज़ा सुनाने के बाद डॉन अबू सलेम की सज़ा बरकरार है. अब ये देखना होगा कि क्या उम्र कैद की सज़ा होती है या उसको जल्द रिहाई मिलेगी. पुर्तगाल से प्रत्यर्पण संधि होने के कारण कोर्ट सलेम को फांसी या आजीवन कारावास की सजा नहीं दे सकती है. उसे अधिकतम 25 साल तक की सजा दी जा सकती है. इसी वजह से अभी उसे मिली सजा पर सवालिया निशान लगा है. 

इस हमले में दोषी पाए गए आरोपियों में से एक डॉन अबू सलेम को पुर्तगाल से 2005 में प्रत्यर्पित कर लाया गया था. इस हिसाब से अगर उसे सज़ा मिलती है तो वो अपनी काटी गई सजा काटकर जल्द बाहर आ सकता है. अबू सलेम अब तक अपनी 12 साल की सज़ा काट चुका है इस हिसाब से उसे 13 साल और जेल में काटनी होगी.

क्या था पूरा मामला
12 मार्च, 1993 को मुंबई में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में ढाई सौ से अधिक लोगों की मौत हुई थी. मामले में कुल 7 आरोपी थे, जिनमें से एक अब्दुल कयूम को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था और छह को दोषी पाया था. छह दोषियों में एक मुस्तफा डोसा की मौत हो चुकी है.

अबु सलेम यूं तो साजिश की धारा 120बी और हत्या के तहत दोषी पाया गया है. ऐसे में मौत की सजा का प्रावधान है, लेकिन अबू सलेम को पुर्तगाल से सशर्त लाया गया है कि उसे 25 साल से ज्यादा की सजा नहीं दी जा सकती. वहीं, ताहिर मर्चेंट, करीमुल्लाह खान और फ़िरोज़ अब्दुल राशिद खान ये सभी भी साजिश की धारा 120 बी, टाडा और हत्या के तहत दोषी पाए गए हैं.

आरोप है कि ये विस्फोट 6 दिसंबर, 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस के बदले के तौर पर किया गया था. विध्वंस के बाद मुंबई में दिसंबर 1992 और जनवरी 1993 में दो चरणों में खूनी सांप्रदायिक दंगे हुए थे. अभियोजनन पक्ष ने कहा था कि दाऊद गिरोह के सदस्यों ने अपने स्थानीय गुंडों टाइगर मेनन, दोसा भाइयों के साथ मिलकर मुंबई में आतंकी कृत्य की साजिश रची थी. इसके लिए दोसा के साथ टाइगर, छोटा शकील ने प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए थे.

First published: 7 September 2017, 13:36 IST
 
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