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1993 मुंबई ब्लास्ट: CBI ने मुजरिमों के लिए मांगी सज़ा-ए-मौत

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 June 2017, 17:13 IST
12 मार्च 1993 को मुंबई में सीरियल ब्लास्ट हुए थे./ एएफपी फोटो

1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के मामले में सीबीआई ने दो दोषियों को मौत की सज़ा दिए जाने की मांग की है. मुंबई की टाडा कोर्ट में मुंबई धमाकों के दोषियों की सज़ा पर सुनवाई चल रही है. 16 जून को सीरियल ब्लास्ट से जुड़े मुकदमे के दूसरे चरण में छह अभियुक्तों को अदालत ने दोषी करार दिया था. 

दोषी ठहराए गए लोगों में अंडरवर्ल्ड डॉन अबु सलेम का भी नाम है, जिसे पुर्तगाल से प्रत्यर्पित कराया गया था. सीबीआई ने शुक्रवार को सज़ा पर सुनवाई के दौरान ताहिर मर्चेंट और करीमुल्लाह खान को मौत की सज़ा दिए जाने की मांग की. वहीं इस मामले में एक और दोषी रियाज़ सिद्दीकी को उम्रक़ैद की मांग की गई है.

सीरियल ब्लास्ट के दोषी मुस्तफ़ा डोसा की 28 जून को जेजे अस्पताल में मौत हो गई.

'ताहिर मर्चेंट-करीमुल्लाह को हो फांसी'

सीबीआई के वकील ने अदालत में कहा कि ताहिर मर्चेंट की धमाके में अहम भूमिका थी और वह मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है. सीबीआई ने टाडा कोर्ट में दलील दी कि सीरियल ब्लास्ट के मुख्य साजिशकर्ता करीमुल्लाह खान को भी फांसी की सज़ा दी जाए, क्योंकि उसको आरडीएक्स और हथियारों की खेप के पहुंचने के बारे में पूरी जानकारी थी. 

इससे पहले 28 जून को इस मामले में एक और दोषी मुस्तफ़ा डोसा की मुंबई के जेजे अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. मुस्तफ़ा को हाई ब्लड प्रेशर के साथ डायबिटीज की भी शिकायत की थी. डोसा के लिए भी सीबीआई ने सज़ा-ए-मौत की मांग की थी.

दाऊद इब्राहिम/ फाइल फोटो

दुबई में ऐसे रची गई साज़िश 

1993 के मुंबई बम धमाकों में अभियुक्तों को सज़ा सुनाते हुए टाडा कोर्ट के जज गोविंद सानप ने कहा था कि इन विस्फोटों के लिए भारत में आरडीएक्स जैसे घातक विस्फोटक पदार्थ लाने में सबसे बड़ी भूमिका मुस्तफा अहमद उमर डोसा उर्फ मुस्तफा मजनूं की थी. उसी ने इन विस्फोटों की तैयारी के लिए कुछ युवकों को पाकिस्तान भेजा ताकि वे विस्फोटों को अंजाम देने के लिए हथियारों की ट्रेनिंग ले सकें.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद बदला लेने के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने दुबई में एक बैठक की, जिसमें मुंबई सीरियल ब्लास्ट की साजिश रची गई. साजिश में दाऊद के साथ टाइगर मेमन, मोहम्मद डोसा और मुस्तफा डोसा भी शामिल थे.

धमाकों को अंजाम देने के लिए गोला बारूद, हथियार और आरडीएक्स चोरी-छिपे भारत मंगाए गए. मुस्तफा डोसा, टाइगर मेमन और छोटा शकील ने इन हथियारों को चलाने और विस्फोटकों को अंजाम देने के लिए कई युवाओं ट्रेनिंग देने के लिए पाकिस्तान और भारत में ट्रेनिंग कैंप चलाए. बाद में उन्हें दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा गया.

अबु सलेम को भी मुंबई की टाडा कोर्ट ने 1993 ब्लास्ट के मामले में दोषी करार दिया है.

12 ब्लास्ट, 257 की मौत

सीबीआई के मुताबिक साजिश रचने के दौरान विस्फोट से पहले 15 बैठकें आयोजित की गईं. जिनका आयोजन डोसा ही करता था. दिसंबर, 1992 में दुबई में मुस्तफा डोसा के भाई और भगोड़े आरोपी मोहम्मद डोसा के घर में पहली बैठक हुई थी. दूसरी बैठक पनवेल होटल में 6 जनवरी, 1993 को हुई थी. यहां फिरोज भी था, जो रायगढ़ जिले में हथियार-गोला बारूद उतारने के लिए कस्टम अधिकारियों से डीलिंग कर चुका था.

सीबीआई के मुताबिक कस्टम वालों ने 10 लाख रुपये की रिश्वत ली. मुस्तफा डोसा ने अपने भाई मोहम्मद डोसा को बताया कि हथियार भेज दिए गए हैं. फिरोज इसके बाद अलीबाग गया और 9 जनवरी को हथियार और धमाकों से जुड़ी दूसरी खेप उतरवाई गई. बाद में इन्हीं का इस्तेमाल धमाकों के लिए किया गया. 12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार 12 धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 713 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

First published: 30 June 2017, 17:10 IST
 
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