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छत्तीसगढ़ में हर दूसरे दिन एक आदिवासी महिला से होता है बलात्कार

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 November 2015, 17:50 IST
QUICK PILL
  • आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे नंबर पर है.
  • छत्तीसगढ़ की जेलों में आदिवासी विचाराधीन कैदियों की संख्या में काफ़ी इजाफा हुआ है. मसलन, जगदलपुर जेल में 546 विचाराधीन कैदियों में से 512 आदिवासी हैं.

छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अपराधों में तेजी से इजाफा हुआ है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2014 में छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के खिलाफ हुए  कुल 721 मामले दर्ज किए गए. इनमें से 11 मामले बलात्कार के हैं.

आदिवासियों के खिलाफ अपराध के मामले में छत्तीसगढ़ देश में चौथे नंबर पर है. आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार के मामले में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे नंबर पर है. आदिवासियों के खिलाफ अमूमन हर दिन दो अपराध और हर तीसरे दिन बलात्कार की घटना होती है. बलात्कार के 111 मामलों के अलावा आदिवासी महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की 88 घटनाएं हुई हैं.

पिछले साल अनुसूचित जाति/जनजाति कानून के तहत 457 मामले दर्ज हुए थे. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अपराधों के मामले कम ही दर्ज होते हैं. जब पीड़ित महिला हो तो ऐसे मामलों के दर्ज न होने के आसार और अधिक होता है. इतना ही नहीं छत्तीसगढ़ की जेलों में आदिवासी विचाराधीन कैदियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है.

एक उच्च स्तरीय सरकारी समिति ने ऐसे मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने की सिफारिश की थी. इसके बावजूद आदिवासियों से जुड़े 150 से अधिक मामले लंबित पड़े हैं.

मसलन, जगदलपुर जेल में 546 विचाराधीन कैदियों में से 512 आदिवासी हैं. कांकेर जेल में नक्सल मामलों से जुड़े 144 विचाराधीन कैदी हैं जिनमें से 134 आदिवासी हैं. राज्य की दूसरी जेलों में भी इससे अलग स्थिति नहीं है.

विपक्ष ने छत्तीसगढ़ सरकार पर 'आदिवासी विरोधी' होने का आरोप लगाया है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजित जोगी ने कहा, ‘रमन सिंह सरकार आदिवासी-विरोधी है. यह सरकार उन समस्याओं को लेकर संजीदा नहीं है. सरकार को अपने रवैये में तब्दीली लानी चाहिए और आदिवासियों के कल्याण के संबंध में काम करना चाहिए.’

छत्तीसगढ़ के आदिवासी मामलों के मंत्री केदार कश्यप विपक्ष के आरोपों से इनकार करते हैं.  कश्यप कहते हैं, ‘छत्तीसगढ़ में आदिवासी पूरी तरह से सुरक्षित हैं. सरकार उनकी सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है. मुझे उनके खिलाफ अपराध से जुड़े मामलों के पूरे आंकड़ों की जानकारी नहीं है.’

कश्यप के दावे के बावजूद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदिवासियों के खिलाफ बढ़ते अपराध पर अपनी चिंता जताई है. एडीजी कुलदीप सिंह धतवालिया के अनुसार, ‘मंत्रालय ने इस संबंध में राज्य सरकार को कई परामर्श जारी किए हैं.’

First published: 3 November 2015, 17:50 IST
 
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