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दो साल भगवाराज: एक संग 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ और खाप बढ़ाओ!

श्रिया मोहन | Updated on: 25 May 2016, 22:46 IST
( कैच)
QUICK PILL
  • नरेंद्र मोदी सरकार के दो साल पूरे होने पर कैच विभिन्न क्षेत्रों में सरकार के प्रदर्शन की समीक्षा कर रहा है. प्रधानमंत्री मोदी महिलाओं के मुद्दे को लेकर विशेष तौर पर सक्रिय रहे हैं. 
  • इस कड़ी में पीएम की महत्वाकांक्षी \'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ\' योजना समेत महिला अधिकार से जुड़ी दूसरी योजनाओं की समीक्षा.
  • क्या आप जानते हैं कि 1961 में भारत में प्रति 1000 पुरुषों पर आज की तुलना में 58 अधिक महिलाएं थीं?

    2011 की जनगणना के अनुसार 0 से 6 साल के बीच के बच्चों का बाल लिंगानुपात (सीएसआर) लगातार कम होता  जा रहा है. 

    1961 में भारत में प्रति 1000 पुरुषों पर 976 महिलाएं थीं. जबकि 2011 में प्रति 1000 पुरुष महिलाओं की संख्या 918 है.

    योजनाएं

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए जनवरी 2015 में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ (बीबीबीपी) की शुरुआत की. इस योजना का उद्देश्य लिंगानुपात को बढ़ावा देना भी है. करीब डेढ़ साल में बीबीबीपी के तहत दो काम हुए हैं- 

    1.  व्यापक प्रचार अभियान शुरू हुआ
    2. भारत के 100 जिलों में विशेष कार्यक्रम जिनमें लिंगानुपात सबसे ज्यादा चिंताजनक है

    इन कार्यक्रमों में गर्भधारण का पंजीकरण, लैंगिक जागरूकता, सामुदायिक जागरूकता, लड़कियों का पंजीकरण, लड़कियों के स्कूल छोड़ने पर लगाम लगाने की कोशिश, गर्भधारण से पहले और उसके दौरान चिकित्सा मदद को बेहतर बनाना इत्यादि शामिल है.

    दो साल भगवाराज: जहां चित्त में भय और सिर झुके हैं

    बुंदेलखंड के बांदा जिले के विद्या धाम समिति के राजा भैया कहते हैं, "लोगों की सोच में बदलाव आ रहा है. इस अभियान से सही संदेश जा रहा है. अब लड़की और लड़के में भेदभाव करने से पहले लोग दो बार सोचते हैं. हालांकि इसका असर उन लोगों में ज्यादा है जिनकी टीवी और दूसरे मीडिया तक पहुंच है. जबकि भारत की एक बड़ी आबादी अंधेरे में जी रही है, जहां किसी सूचना तंत्र की पहुंच नहीं है. उन लोगों तक इस अभियान को पहुंचाने की जरूरत है."

    हरियाणा में सुधरा लिंगानुपात

    हरियाणा उन राज्यों में सबसे आगे है जहां लिंगानुपात सबसे खराब रहा है. हालांकि इस योजना के बाद स्थिति सुधर रही है.

    राज्य के बीबीपुर के सरपंच सुनील जगलान की 'सेल्फी विथ डॉटर' योजना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. पीएम मोदी ने अपने 'मन की बात' में भी उनका जिक्र किया था.

    जगलान ने कैच से कहा, "एक साल पहले तक हरियाणा का लिंगानुपात करीब 800 था. अब प्रति 1000 पर करीब 906 लड़कियां हैं. ये 2015 का आंकड़ा है, अगले दस सालों में आप इस अभियान का असली असर देख पाएंगी."

    पढ़ें: दो साल भगवाराज: 24 महीने और 24 विवाद

    जगलान मानते हैं कि जेंडर सेंसिटिविटी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की जरूरत है. उनका मानना है कि इस अभियान के लिए एक विशेष समर्पित दल होना चाहिए.

    जगलान कहते हैं, "महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय पितृसत्ता से लड़ने और महिलाओं को अधिकार दिलाने में अहम भूमिका निभा सकता है. जिन महिलाओं का पहला बच्चा लड़की हो उनपर दूसरे बच्चे के समय विशेष निगरानी रखी जानी चाहिए."

    जाति की बेड़ियां

    जमीनी कार्यकर्ताओं के अनुसार मोदी सरकार ने जाति के मुद्दे पर ज्यादा काम नहीं किया है. मोदी सरकार ने सामाजिक रूप से पिछड़ी जाति की महिलाओं के लिए कई योजनाओं मेें विशेष रियायतें दीं लेकिन जमीन पर उनका क्रियान्वयन आशा के अनूरूप नहीं है. मसलन, स्टार्ट अप इंडिया अभियान में दलित और महिला एंटरप्रेन्योर को विशेष मदद दी जाती है.

    अल्पसंख्यक वर्ग की महिलाओं के स्किल डेवलपमेंट केे लिए शुरू की गई है महिला-ए-हाट योजना और नई मंजिल जैसी योजनाएं भी शुरू की गई हैं.

    दो साल भगवा राजः धुंधली पड़ रही मोदी की चमकार

    पिछले हफ्ते सरकार ने राष्ट्रीय महिला नीति का मसौदा पेश किया. जिसमें प्रजनन और एक महिला के अधिकारों पर विशेष ध्यान रखा गया.

    हरियाणा स्थित सामाजिक कार्यकर्ता जागमति सांगवान कहती हैं, "इनमें से हरेक योजनाओं में काफी पैसा दिया जा रहा है लेकिन जरूरत महिलाओं तक इसकी शायद ही एकाध बूंद पहुंच पा रही है."

    राजा भैया कहते हैं, "बांदा में किसी ने इन योजनाओं के बारे में नहीं सुना. फिर आप इनका लाभ कैसे ले सकते हैं?"

    नुकसानदायक फैसले

    सांगवान कहती हैं कि कुछ नए बदलाव महिलाओं के विकास में बाधा भी बन रहे हैं. मसलन, अब हरियाणा पंचायत चुनाव में सामान्य वर्ग की 10वीं पास और दलित वर्ग की 5वीं पास महिलाएं ही चुनाव लड़ सकती हैं. या फिर जिनके घर में शौचलाय नहीं है उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगाना.

    सांगवान कहती हैं, "इसका सीधा मतलब ये हुआ कि 83% महिलाएं पंचायत चुनाव नहीं लड़ पाएंगी."

    सागंवान कहती हैं कि अगर पीएम सचमुच बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ को लेकर गंभीर हैं तो उन्हें हरियाणा की खाप पंचायतों के खिलाफ खड़ा होना चाहिए. सांगवान कहती हैं, "लेकिन वो कहते हैं कि खाप भूमि को नमन करता हूं."

    बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ एक बहुत अच्छी योजना है लेेकिन पितृसत्तात्मक समाज की बेड़ियां काटने के लिए सरकार को ज्यादा मजबूत इच्छाशक्ति दिखानी होगी.

    First published: 25 May 2016, 22:46 IST
     
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