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1993 मुंबई ब्लास्ट के 25 साल पूरे, आज भी बेखौफ घूम रहा दाऊद इब्राहिम

आदित्य साहू | Updated on: 12 March 2018, 11:58 IST

साल 1993, यानि आज से 25 साल पहले. आज के ही दिन(12 मार्च) मायानगरी मुंबई अचानक से दहल उठी थी. मुंबई में 12 जगहों पर सिलसिलेवार बम धमाका हुआ था. इन धमाकों में 257 लोग मारे गए थे जबकि 713 लोग घायल हुए थे. पहला धमाका बॉम्बे स्टॉक एक्सेंज की 28-मंज़िला इमारत की बेसमेंट में दोपहर 1.30 बजे धमाका हुआ जिसमें लगभग 50 लोग मारे गए थे.

इसके बाद तो धमाकों का सिलसिला चल निकला और लगभग दो घंटे के भीतर 13 धमाके हुए. मुंबई धू-धूकर जल उठी. चारों-तरफ अफरा-तफरी मच गई. करीब 27 करोड़ की संपत्ति का नुकसान हुआ.

 

ऐसे हुए धमाके-
पहला धमाका-दोपहर 1.30 बजे, मुंबई स्टॉक एक्सचेंज
दूसरा धमाका-दोपहर 2.15 बजे, नरसी नाथ स्ट्रीट
तीसरा धमाका-दोपहर 2.30 बजे, शिव सेना भवन
चौथा धमाका-दोपहर 2.33 बजे,एयर इंडिया बिल्डिंग
पाँचवा धमाका-दोपहर 2.45 बजे,सेंचुरी बाज़ार
छठा धमाका-दोपहर 2.45 बजे,माहिम
सातवाँ धमाका-दोपहर 3.05 बजे,झावेरी बाज़ार
आठवाँ धमाका-दोपहर 3.10 बजे,सी रॉक होटल
नौवाँ धमाका-दोपहर 3.13 बजे,प्लाजा सिनेमा
दसवाँ धमाका-दोपहर 3.20 बजे,जुहू सेंटूर होटल
ग्यारवाँ धमाका-दोपहर 3.30 बजे,सहार हवाई अड्डा
बारहवाँ धमाका-दोपहर 3.40 बजे,एयरपोर्ट सेंटूर होटल
इसके आधे घंटे बाद एक कार धमाका हुआ और अगले दो घंटे से कम समय में कुल 13 धमाके हो चुके थे.

इसके बाद 4 नवंबर 1993 को 10,000 पन्ने प्राथमिक चार्जशीट 189 लोगों के खिलाफ दायर की गई. 19 नवंबर 1993 में यह मामला सीबीआई को सौंप दिया गया. 19 अप्रैल 1995 को मुंबई की टाडा अदालत में इस मामले की सुनवाई आरंभ हुई. अगले दो महीनों में अभियुक्तों के खिलाफ आरोप तय किए गए.

साल 2000 के अक्टूबर में सभी अभियोग पक्ष के गवाहों के बयान समाप्त हुए. अक्तूबर 2001 में अभियोग पक्ष ने अपनी दलील समाप्त की. सितंबर 2003 में मामले की सुनवाई समाप्त हुई. सितंबर 2006 में अदालत ने अपने फैसले देने शुरु किए. 

इन धमाकों के मुख्य अभियुक्त दाऊद इब्राहम को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया जा सका है. पुलिस का कहना है कि यह धमाके भारत से बाहर रहने वाले दाऊद ने कराए थे. पीएम मोदी ने लोकसभा चुनाव से पहले दाऊद को पकड़कर भारत लाने की बात भी कही थी, लेकिन अभी तक दाऊद को भारत नहीं लाया जा सका है.

हालांकि पिछले दिनों दाऊद इब्राहिम के वकील ने दाऊद के हवाले से उसके सरेंडर करने की इच्छा जाहिर की थी. दाऊद के वकील ने अपने बयान में कहा था कि दाऊद भारत आना चाहता है, लेकिन इसके पीछे उसने मुंबई की ऑर्थर रोड जेल में ही रखे जाने की शर्त रखी है.

साल 2006 में मुंबई की अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए जिन लोगों को इन धमाकों के लिए दोषी पाया था उनमें एक ही परिवार के चार सदस्यों भी थे. इनके नाम थे यकूब मेमन, यूसफ मेमन, इसा मेमन और रुबिना मेमन. इन सभी को साजिश और आंतकवाद को बढा़वा देने के लिए दोषी पाया गया था. ये सभी टाइगर मेमन के रिश्तेदार थे जिन्हें भी पकड़ा नहीं गया था.

इसके अलावा बॉलीवुड के दिग्गज कलाकार संजय दत्त को मामले गिरफ्तार किया गया था और उन्हें 18 महीने जेल में बिताने पड़े थे. 

दुबई में ऐसे रची गई साज़िश

1993 के मुंबई बम धमाकों में अभियुक्तों को सज़ा सुनाते हुए टाडा कोर्ट के जज गोविंद सानप ने कहा था कि इन विस्फोटों के लिए भारत में आरडीएक्स जैसे घातक विस्फोटक पदार्थ लाने में सबसे बड़ी भूमिका मुस्तफा अहमद उमर डोसा उर्फ मुस्तफा मजनूं की थी. उसी ने इन विस्फोटों की तैयारी के लिए कुछ युवकों को पाकिस्तान भेजा ताकि वे विस्फोटों को अंजाम देने के लिए हथियारों की ट्रेनिंग ले सकें.

अभियोजन पक्ष के मुताबिक छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद बदला लेने के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने दुबई में एक बैठक की, जिसमें मुंबई सीरियल ब्लास्ट की साजिश रची गई. साजिश में दाऊद के साथ टाइगर मेमन, मोहम्मद डोसा और मुस्तफा डोसा भी शामिल थे.

धमाकों को अंजाम देने के लिए गोला बारूद, हथियार और आरडीएक्स चोरी-छिपे भारत मंगाए गए. मुस्तफा डोसा, टाइगर मेमन और छोटा शकील ने इन हथियारों को चलाने और विस्फोटकों को अंजाम देने के लिए कई युवाओं ट्रेनिंग देने के लिए पाकिस्तान और भारत में ट्रेनिंग कैंप चलाए. बाद में उन्हें दुबई के रास्ते पाकिस्तान भेजा गया.

12 ब्लास्ट, 257 की मौत

सीबीआई के मुताबिक साजिश रचने के दौरान विस्फोट से पहले 15 बैठकें आयोजित की गईं. जिनका आयोजन डोसा ही करता था. दिसंबर, 1992 में दुबई में मुस्तफा डोसा के भाई और भगोड़े आरोपी मोहम्मद डोसा के घर में पहली बैठक हुई थी. दूसरी बैठक पनवेल होटल में 6 जनवरी, 1993 को हुई थी. यहां फिरोज भी था, जो रायगढ़ जिले में हथियार-गोला बारूद उतारने के लिए कस्टम अधिकारियों से डीलिंग कर चुका था.

सीबीआई के मुताबिक कस्टम वालों ने 10 लाख रुपये की रिश्वत ली. मुस्तफा डोसा ने अपने भाई मोहम्मद डोसा को बताया कि हथियार भेज दिए गए हैं. फिरोज इसके बाद अलीबाग गया और 9 जनवरी को हथियार और धमाकों से जुड़ी दूसरी खेप उतरवाई गई. बाद में इन्हीं का इस्तेमाल धमाकों के लिए किया गया. 12 मार्च 1993 को मुंबई में सिलसिलेवार 12 धमाकों में 257 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 713 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

First published: 12 March 2018, 11:25 IST
 
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