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26/11 मुंबई हमला: गोलियों से छलनी हो चुकी थी तुकाराम की छाती, लेकिन फिर भी नहीं छोड़ी कसाब की गर्दन

कैच ब्यूरो | Updated on: 25 November 2018, 16:28 IST

10 पहले हुए मुंबई में हमले की गूंज आज तक सभी के कानों में होगी और ये भयानक दिन था 26/11/2008 यानि 26/11. इस दिन को आज भी याद करके लोग सिहर उठते हैं और सभी की रुह कांप जाती है. ये वो साल था जब पूरे देश में भयंकर आतंक मचा हुआ था और सभी लोग काफी डरे हुए थे. मुंबई में हुए इस हमले में होटल में कम से कम 200 लोग मारे गए थे तो वहीं करीब 600 से भी ज्यादा लोग घायल हो गए थे. इस हमले में करीब 10 आतंकवादी थे और इसमें से एक आतंकवादी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया था. इस आतंकवादी को पकड़ने वाले एएसआई तुकाराम गोपाल ओंबले आज भी सभी के दिलों के जिंदा है. जिन्होंने अपनी जान की बिना परवाह किए इसे पकड़ा था.

 

इस हमले से भाग रहे आतंकवादियों को लेकर एएसआई तुकाराम गोपाल ओंबले के वायरलेस पर एक अनाउंसमेंट होता है कि एक सिल्वर रंग की स्कोडा जा रही है और उसे रोकना है. ऑर्डर पाते ही मुंबई पुलिस के जवानों के कान-नाक सब खड़े हो गए. हर सड़क पर बैरिकेड लगा दिए गए थे और पुलिस तैनात हो गई थी. इतने में एक एएसआई ओंबले की आवाज आती है कि सर एक सिल्वर स्कोडा आती हुई नजर आ रही है. जब गाड़ी पास आई तो ये वहीं सिल्वर स्कोडा थी और इसे बैरिकेडिंग पर रोक लिया गया. मुंबई पुलिस के जवानों की आवाज आ रही थी कि गाड़ी से नीचे उतरो और गाड़ी में बैठे दोनों शख्स कोई भी जवाब नहीं दे रहे थे.

 

इसके बाद अचानक कार ने उसी रास्ते पर मोड़ने की कोशिश की जिस तरफ से वो आई थी. जैसे ही कार मुड़ने क हुई मुंबई पुलिस के जवानों की तरफ से गोलियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगी थी और कार वहीं थम गई. जब कार की तरफ और उसमें मौजूद लोगों की तरफ से कोई हलचल नहीं हुई थी तो एएसआई ओंबले ने आगे बढ़कर कार का दरवाजा खोला और देखा कि कार में बैठे दो लोगों में से एक की मौत हो चुकी थी जबकि दूसरा शख्स बेसुध हो पड़ा था लेकिन वो जिंदा था.

एएसआई ओंबले ने जैसे ही देखा कि वो शख्स जिंदा है वो उसपर शेर की तरह झपट पड़े लेकिन अफसोस की कसाब के हाथ में AK-47 होने के कारण उसने एएसआई ओंबले पर फायरिंग कर दी. जिससे एएसआई ओंबले का शरीर छलनी हो चुका था लेकिन उन्होंने अपनी आखिरी सांस तक कसाब की गर्दन नहीं छोड़ी थी.

इसके बाद आतंकवादी अजमल कसाब को जिंदा पकड़ लिया गया और साथ ही उसके साथ मौजूद दूसरा आतंकवादी इस्माइल पुलिस की फायरिंग में ही मारा जा चुका था. कसाब को फांसी दे दी गई है लेकिन आज भी इसे जिंदा पकड़ने और बहादुरी से इसका सामना करने पर लोगों के दिलों में एएसआई ओंबले जिंदा है. आज भले ही एएसआई तुकाराम गोपाल ओंबले हमारे बीच ना हो लेकिन उनकी ये बहादुरी का कारनामा आज भी लोगों को याद है. ऐसे बहदुर और जाबांज लोगों को पूरा देश सेल्यूट करता है.

First published: 25 November 2018, 16:12 IST
 
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