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2G स्पेक्ट्रम घोटाला: CBI कोर्ट ने पूर्व दूरसंचार मंत्री और करुणानिधि की बेटी कनिमोझी को किया बरी

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 December 2017, 11:46 IST

2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सीबीआई की अदालत ने गुरुवार को फैसला सुना दिया है. दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट की सीबीआई कोर्ट ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके राज्यसभा सांसद कनिमोझी को इस घोटाले से बरी कर दिया है. कनिमोझी डीएमके प्रमुख एम.करुणानिधि की बेटी है. यूपीए के केंद्र में कार्यकाल के दौरान इस घोटाले में पूरे देश में हंगामा मचा था.

सीबीआई की अदालत ने पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और डीएमके राज्यसभा सांसद कनिमोझी समेत 25 आरोपियों को बरी किया. ये घोटाला 1 लाख 76 हजार करोड़ रुपये का आंका गया था. सीबीआई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकारी वकील आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित नहीं कर पाए. सीबीआई की विशेष अदालत के जज ओपी सैनी ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा है कि दो पक्षों के बीच पैसे का लेन देन हुआ है.

सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में ए राजा, कनिमोझी समेते सभी आरोपियों को फैसले के दिन कोर्ट में हाजिर रहने का आदेश दिया है. कोर्ट का फैसला आने के बाद ए राजा और कनिमोझी दोनों ने खुशी जाहिर की. फैसला आते ही कोर्ट में तालियां बज उठी. फैसला आने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट के बाहर उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए उन सभी लोगों का धन्यवाद दिया जो उनके साथ खड़े रहे.  

वहींं कोर्ट का फैसला सामने आने के बाद सीबीआई वे कहा कि वो कोर्ट के फैसले की कॉपी का इंतजार कर रहे हैं. हम कॉपी मिलने के बाद इस पर कानूनी सलाह लेगें. 2G स्पेक्ट्रम घोटाले में सुनवाई छह साल पहले 2011 में शुरू हुई थी. सीबीआई के आरोप पत्र के आधार पर सीबीआई की विशेष अदालत ने 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये थे. कोर्ट ने 2G स्पेक्ट्रम घोटाले के तीन मामलों की सुनवाई की. इसमें से दो सीबीआई और एक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का है. इन मामलों में दोष साबित होने पर छह महीने से लेकर उम्रकैद की सजा तक का प्रावधान है.

गौरतलब है कि अप्रैल 2011 में कोर्ट में दाखिल चार्जशीट में सीबीआई ने कहा था कि '2जी स्पेक्ट्रम से जुड़े 122 लाइसेंस गलत तरीके से आवंटित किए गए, जिससे सरकारी खजाने को 30,984 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचा.' इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2012 में सभी लाइसेंस रद्द कर दिए थे. 

इन सभी आरोपियों पर कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम से लेकर आपराधिक षडयंत्र, धोखाधड़ी, फर्जीवाडा, फर्जी कागजात बनाने, पद का दुरुपयोग, सरकारी दुराचरण आदि के आरोप तय किए थे.  

गौरतलब है कि कांग्रेस के नेतृत्व में केंद्र में बनी यूपीए सरकार, जिसमें पीएम मनमोहन सिंह था. साल 2008 में दूरसंचार विभाग द्वारा 2जी स्पेक्ट्रम के लाइसेंस आवंटन में कथित तौर पर अनिमितता की बात सामने आई थी. इस घोटाले का 2010 में कैग की रिपोर्ट के बाद खुलासा हुआ.

First published: 21 December 2017, 11:46 IST
 
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