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2G स्पेक्ट्रम घोटाला: देश की राजनीति में भूचाल लाने वाले घोटाले की पूरी टाइमलाइन

हेमराज सिंह चौहान | Updated on: 21 December 2017, 13:14 IST

देश में 2G स्पेक्ट्रम घोटाले के सामने आते ही पूरे देश में राजनीतिक भूचाल आ गया था. इस घोटाले के सामने आते ही भाजपा ने इस मुद्दे को आक्रामक तरीके से संसद के अंदर और संसद के बाहर उठाया था. इस घोटाले के सामने आने के बाद इसे सीबीआई को सौंपा गया था. इसके बाद इसकी सुनवाई सीबीआई की विशेष अदालत में हुई. 

सीबीआई की विशेष अदालत ने गुरुवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुएसभी आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री और डीएमके प्रमुख करुणानिधि की बेटी कनिमोझी को रिहा कर दिया है. इसके साथ ही कोर्ट ने अन्य सभी आरोपियों को भी सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. कोर्ट का कहना है कि सीबीआई किसी भी आरोप के खिलाफ दोष साबित नहीं कर पाई.

इस घोटाले का खुलासा कैग की रिपोर्ट के बाद हुआ था. साल 2010 में तत्कालीन देश के महालेखाकार और नियंत्रक (सीएजी) ने अपनी एक रिपोर्ट में इस स्पेक्ट्रम आवंटन से केन्द्र सरकार के खजाने को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही थी. कैग की रिपोर्ट में दावा किया गया कि 2जी स्पेक्ट्रम आवंटन में कंपनियों को नीलामी की बजाए 'पहले आओ और पहले पाओ' की नीति पर स्पेक्ट्रम दिया गया. जो कि नियमानुसार गलत था.

कैग के मुताबिक केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय की 'पहले आओ पहले पाओ' की नीति से सरकारी खजाने को एक लाख 76 हजार करोड़ रुपयों के नुकसान होने का दावा किया था. हालांकि इस घोटाले के सामने आने के बाद तत्कालीन केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के सीनियर नेता कपिल सिब्बल ने इस नीति से जीरो लॉस की बात कही थी. उनके बयान पर बाद में काफी राजनीतिक हंगामा हुआ.

नीलामी के वक्त दूरसंचार मंत्री रहे ए राजा पर आरोप था कि उन्होंने नियमों की अनदेखी करते हुए स्पेक्ट्रम की नीलामी की.

2G स्पेक्ट्रम की पूरी टाइमलाइन

सितंबर-अक्टूबर, 2008 : दूरसंचार मंत्रालय ने दूरसंचार कंपनियों को पहले आओ पहले पाओ की नीति के आधार पर                                               स्पेक्ट्रम लाइसेंस दिए गए.

21 अक्टूबर, 2009 : केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने 2-जी स्पेक्ट्रम मामले की जांच के लिए पहला मामला दर्ज किया. 

17 अक्टूबर, 2010: भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक(कैग) ने 2G स्पेक्ट्रम का लाइसेंस देने में दूरसंचार विभाग                                  की कई नीतियों में खामी पाई.

14 नवंबर, 2010 :    संसद के अंदर और बाहर विपक्ष के भारी विरोध के बाद ए राजा ने अपने पद से इस्तीफा दिया.

24-25 दिसंबर, 2010: दूरसंचार मंत्रालय छोड़ चुके ए राजा से CBI ने पूछताछ की.

2 फरवरी, 2011:      2-जी स्पेक्ट्रम मामले में ए राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव                                   आर के चंदोलिया को CBI ने गिरफ्तार किया. 

2012:                      15 महीने बाद ए राजा को जमानत मिली

First published: 21 December 2017, 13:14 IST
 
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