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अवनी, मोहना और भावना की 'ऊंची उड़ान', एयरफोर्स की फाइटर स्क्वॉड्रन में शामिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 20 June 2016, 11:15 IST
(एजेंसी)

भारतीय वायुसेना और पूरे देश के लिए आज गर्व का पल है, जब देश की तीन बेटियां फाइटर पायलट बनने की ट्रेनिंग लेने जा रही हैं. इनमें मध्य प्रदेश के सतना की अवनी चतुर्वेदी, राजस्थान के झुंझुनूं जिले की मोहना सिंह और बिहार के दरभंगा की भावना कंठ शामिल हैं.

इन तीनों ने शनिवार को हैदराबाद में भारतीय वायु सेना अकादमी (हकीमपेट) में हुई पासिंग आउट परेड पास करके इतिहास बनाया. तीनों ने वायुसेना में प्रेसिडेंट कमीशन पाया है और फ्लाग ऑफिसर के पद पर नियुक्त हुई हैं.

झुंझुनूं की मोहना सिंह

राजस्थान के झुंझुनूं जिले की मोहना सिंह ने दिल्ली के एयरफोर्स स्कूल से पढ़ाई की है. उनके पिता भी एयरफोर्स में सर्विस करते हैं.

इसके अलावा मोहना के दादा भी एविएशन रिसर्च सेंटर में फ्लाइट गनर थे. उन्होंने कई एयरफोर्स के मिशन में हिस्सा लिया था.

दरभंगा की भावना कंठ

बिहार के दरभंगा की रहने वाली भावना कंठ ने कहा, "मेरा बचपन से सपना था कि मैं आसमान में उड़ती रहूं. इसीलिए मैंने एयरफोर्स ज्वाइन किया." भावना का लक्ष्य एक अच्छा फाइटर पायलट बनकर देश के लिए लड़ना है.

भावना कंठ कहती हैं, "एयरफोर्स में ट्रेनिंग की स्टेज-1 पार करने के बाद जब उन्हें फाइटर स्ट्रीम के चुना गया, वह दिन उनके जीवन में सबसे महत्वपूर्ण दिन था."

सतना की अवनी चतुर्वेदी

मध्य प्रदेश के सतना की रहने वाली अवनी चतुर्वेदी के पिता राज्य सरकार में इंजीनियर हैं. कॉलेज में फ्लाइंग क्लब के कुछ घंटों के अनुभव के बाद उन्होंने फैसला किया कि वह एयरफोर्स ज्वाइन करेंगी.

इसके बाद अवनी एयरफोर्स की फ्लाइंग स्ट्रीम के लिए चुनी गईं, फिर फाइटर फ्लाइंग के लिए क्वॉलिफाई किया. 

मार्च में हासिल की थी योग्यता

अवनी चतुर्वेदी, भावना और मोहना सिंह ने मार्च में ही लड़ाकू विमान उड़ाने की योग्यता हासिल कर ली थी. इसके बाद उन्हें युद्धक विमान उड़ाने का गहन प्रशिक्षण दिया गया.

यह पहला मौका होगा, जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान की कॉकपिट में कोई महिला बैठेगी. वायुसेना में करीब 1500 महिलाएं हैं, जो अलग-अलग विभागों में काम कर रही हैं.

कर्नाटक के बीदर में ट्रेनिंग

1991 से ही महिलाएं हेलीकॉप्टर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट उड़ा रही हैं, लेकिन फाइटर प्लेन से उन्हें दूर रखा जाता था. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर तीनों को फाइटर पायलट की ट्रेनिंग का ऐलान किया गया था. अब इनकी एक साल की एडवांस ट्रेनिंग कर्नाटक के बीदर में होगी.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर तीनों को फाइटर पायलट की ट्रेनिंग का एन किया गया था. अब इनकी एक साल की एडवांस ट्रेनिंग कर्नाटक के बीदर में होगी.

वहां पर इन तीनों को मिग-21, मिराज-2000 और सुखोई-30 एमकेआई भी उड़ाना सिखाया जाएगा. 

तीन बेटियों की ऊंची उड़ान

मोहना कहती हैं, "मैं तो ट्रांसपोर्ट विमान उड़ाना चाहती थी, लेकिन मेरे ट्रेनर ने मुझे लड़ाकू विमान के लिए प्रेरित किया. लड़ाकू विमानों का करतब और उनकी तेजी की वजह से मैं यहां पर हूं."

अवनी का कहना है, "हर किसी का सपना होता है कि वो उड़ान भरे. अगर आप आसमान की ओर देखते हैं तो पंछी की तरह उड़ने का मन करता है."

वह कहती हैं, "आवाज की स्पीड में उड़ना एक सपना होता है और अगर ये मौका मिलता है तो एक सपना पूरे होने के सरीखा है."

First published: 20 June 2016, 11:15 IST
 
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