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मुसलमान औरतों से हमदर्दी? तलाक़ से पहले इन मामलों पर ग़ौर कर सकती है मोदी सरकार

आदित्य मेनन | Updated on: 11 February 2017, 5:47 IST
(सजाद मलिक/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • बुंदेलखंड के महोबा में एक चुनावी रैली में बोलते हुए नरेंद्र मोदी ने कहा कि वह तीन तलाक़ की वजह से मुसलमान औरतों की ज़िंदगी बर्बाद होते नहीं देख सकते. 
  • मगर उनकी और उनकी पार्टी की हुक़ूमत में गुजरात से लेकर कश्मीर और हरियाणा तक में मुसलमान औरतों की ज़िंदगियां सिर्फ़ मुसलमान होने के नाते बर्बाद कर दी गई हैं.   

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ट्रिपल तलाक के मसअले पर अपने मन की बात रखी. उन्होंने भारत में समान आचार संहिता (यूसीसी) लागू करने के साफ संकेत दिए. 

उत्तर प्रदेश के महोबा में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर कोई फोन पर तीन बार तलाक कह देता है तो एक मुस्लिम बेटी की जिंदगी बर्बाद हो जाती है.’

सबसे पहले यह साफ़ कर दूं कि ट्रिपल तलाक एक तरह की कुरीति है और क़ुरआन में भी इसका ज़िक्र नहीं है.

महोबा में प्रधानमंत्री मोदी मुस्लिम महिलाओं की ज़िंदगी संवारने के बारे में बोलने से नहीं हिचकिचाए. मगर इससे साफ पता चलता है कि केंद्र सरकार यूसीसी लागू करने की कोशिश कर रही है और इसके लिए ट्रिपल तलाक जैसा बहाना मिल गया है. एक ऐसा मुद्दा जो साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण के लिए बार-बार इस्तेमाल किया जाता रहा है.

केंद्र सरकार को अचानक ही मुस्लिम महिलाओं के प्रति सहानुभूति होने लगी है. देर से ही सही, लेकिन मोदी सरकार को इनमें से कुछ महिलाओं के बारे में ज़रूर बोलना चाहिए. 

ज़किया जाफरी

जकिया जाफरी एहसान जाफरी की बीवी हैं, जिनकी 2002 के दंगों के दौरान अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसायटी में 68 अन्य लोगों के साथ हत्या कर दी गई थी. चश्मदीद गवाहों के मुताबिक सोसायटी के बाहर भीड़ जमा होने के बाद एहसान जाफरी ने मदद के लिए फोन किया तो उधर से गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कथिततौर पर जाफरी को गाली दी और पूछा कि उन्हें अभी तक मारा क्यों नहीं गया? नरेंद्र मोदी ने इस मुस्लिम महिला को विधवा होने से बचाने के लिए कुछ किया? नहीं. 

नरोदा पाटिया पीडि़त

नरोदा पाटिया की औरतों की कहानी तो और भी भयावह है. जरा इन दो चश्मदीद गवाहों के बयान पढ़िए. 

‘‘उन्होंने मेरी भाभी की बहन कौसर बानो के साथ जो किया वह डरावना था. वह 9 महीने की गर्भवती थीं. उन्होंने उसके पेट को काटा, उसका भ्रूण यानी बच्चे को तलवार से बाहर निकाला और जलती आग में फेंक दिया. इसके बाद उन्होंने उसे भी जला डाला.

सायरा बानो, नरोदा पाटिया (27 मार्च 2002 शाह आलम कैंप)

‘गंगोत्री समाज छोड़ने के बाद भीड़ कई जलते टायर लेकर हमारे पीछे भागी. उस वक्त उन्होंने कई लड़कियों का रेप किया. हमारे सामने ही करीब 8-10 रेप हुए. हमने उन्हें देखा कि वे 16 साल की मेहरूनिसा के कपड़े फाड़ रहे थे. उन्होंने वहीं सड़क पर लड़कियों का रेप किया. उसके बाद उन्हें जला दिया गया’. 

कुलसुम बीबी, (27 मार्च 2002 शाह आलम कैंप)

मुस्लिम औरतों के साथ ये ज़ुल्म तत्कालीन सीएम की नाक के नीचे हुए. उस वक्त उन्हें मुसलमान औरतों का ख़याल क्यों नहीं आया?

डींगरहेड़ी, मेवात रेप कांड

यह कांड तो बिल्कुल नया है, 25 अगस्त का. हरियाणा के मेवात में कथिततौर पर गौरक्षकों ने एक नाबालिग समेत दो मुस्लिम औरतों के साथ सज़ा के तौर पर गैंग रेप किया क्योंकि वह उस समाज से आती हैं जहां बीफ़ खाने की कोई मनाही नहीं है. 

उस रात एक 16 और एक 21 साल की औरत के साथ चार जनों ने गैंगरेप किया, जिसके साथ एक साल का बच्चा भी था. इन्हीं आरोपियों ने इसी रात महिला के चाचा और चाची की हत्या कर दी थी.

एक पीड़िता ने बताया ‘उन्होंने हमसे पूछा क्या हम बीफ खाते हैं. हमने कहा, नहीं. लेकिन उन्होंने कहा कि वे इसीलिए हमें सजा दे रहे हैं क्योंकि हम बीफ़ खाते हैं. एक अभियुक्त खुद को स्वयंसेवक बता रहा था.

बीजेपी शासित हरियाणा में गैंगरेप और दोहरे हत्याकांड की वारदात घटी. मगर इस केस में निष्पक्ष कार्रवाई की बजाय राज्य सरकार मेवात में बीफ की जांच के लिए बिरयानी के नमूने जुटाने में लग गई.

इंशा मलिक

कश्मीर में तीन महीने पहले सुरक्षा बलों ने पैलेट गन से शोपियां की एक 14 साल की लड़की को अंधा कर दिया. वह उनका विरोध नहीं कर रही थी, वह पत्थरबाजी भी नहीं कर रही थी. वह किसी भी तरह से भारत के लिए खतरा नहीं थी. फिर भी सुरक्षा बलों ने उसपर गोली चलाई. 

डॉक्टर कहते हैं उसकी दाई आंख पूरी तरह से फट गई. बांई आंख भी छलनी हो गई. और अब कहा नहीं जा सकता कि वह दोबारा कभी देख पाएगी या नहीं. उसे गोली लगने के बाद एक रिपोर्ट में कहा गया कि उसका चेहरा और गर्दन पैलेट गन से छलनी हो गए है. आज तक प्रधानमंत्री मोदी या केंद्र सरकार की तरफ़ से इंशा मलिक और उस जैसी अन्य सैकड़ों कश्मीरी महिलाओं के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा है, जो पिछले तीन महीने के भीतर अंधे कर दिए गए.

केंद्र सरकार को क्यों परवाह होगी? इंशा मलिक पर बोलने से बीजेपी को कोई राजनीतिक लाभ तो मिलेगा नहीं?

महोबा में दिया गया पीएम मोदी का बयान कोई मुसलमान औरतों के लिए अचानक उपजी हमदर्दी का नतीजा नहीं है. यहां तक कि यह पूरी तरह मुसलमानों पर केंद्रित नहीं है. यह सब  केंद्र सरकार की हिंदूवादी चरमपंथी मतदाताओं को रिझाने कोशिश है और उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में सिर्फ़ और सिर्फ़ हिंदु्त्व पर ही निर्भर है.

First published: 25 October 2016, 8:40 IST
 
आदित्य मेनन @adiytamenon22

एसोसिएट एडिटर, कैच न्यूज़. इंडिया टुडे ग्रुप के लिए पाँच सालों तक राजनीति और पब्लिक पॉलिसी कवर करते रहे.

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