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'मोदी सरकार के 4 साल', पार्ट-1 : सबको घर देने वाली योजनाएं कितनी सफल रही ?

सुनील रावत | Updated on: 18 May 2018, 16:20 IST

नवंबर 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'प्रधानमंत्री आवास योजना' (PMAY) शुरू की थी. इस योजना के तहत मार्च 2019 तक ग्रामीण इलाकों में एक करोड़ 20 लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा गया था. इस योजना को 2017-18 और 2018-19 के बीच समान रूप से विभाजित किया गया था. भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में घर दिलाने की यह एक प्रमुख योजना थी. 

ग्रामीण विकास मंत्रालय के आंकड़े बताते हैं कि इस योजना का प्रदर्शन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका. 2017-18 में इसकी सफलता दर महज 57.5 प्रतिशत थी. इस अवधि में 51 लाख घर बनाने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन सरकार इस दौरान लगभग 29 लाख घर ही बना सकी.

अब सरकार के सामने चुनौती मार्च 2019 से पहले शेष 66 लाख घरों को पूरा करने के लिए निर्माण की गति को दोगुना करना है. इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र को असम और बिहार जैसे राज्यों पर ज्यादा ध्यान सेना होगा. सरकार को समय सीमा से पहले लक्ष्य हासिल करने पर भरोसा है कि मार्च 2019 तक एक करोड़ प्रधानमंत्री आवास योजना के घरों को पूरा करने का लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है.

2015 में प्रधानमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए ''सभी के लिए आवास" नामक एक योजना भी शुरू की थी. इसे PMAY(अर्बन) योजनारूप में भी जाना जाता है. इस योजना के तहत 2022 तक 1 करोड़ 20 लाख घर बनाने का अनुमान है. हालांकि, पीएमएई (यू) की प्रगति धीमी रही है. आंकड़ों के अनुसार इन अनुमानित घरों की संख्या में से अभी केवल 10 प्रतिशत को ही पूरा किया गया है. अभी लगभग 40 लाख घरों का निर्माण किया गया है.

इस योजना को लेकर ससदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कुल परियोजना लागत 2.04 लाख करोड़ रुपये (2.04 ट्रिलियन रुपये) जिसमे केंद्र का हिस्सा 57,69 9 रुपये का है, जबकि केंद्र ने इसमें से 26,162 करोड़ के बजट को मंजूरी दी है.

संसदीय समिति ने दो अन्य शहरी योजनाओं - स्मार्ट सिटीज मिशन और एएमआरयूटी के लिए के प्रदर्शन पर नाराजगी व्यक्त की है. यह कहा गया कि 25 जून, 2015 को योजनाएं लॉन्च होने के बाद से तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन सरकार परियोजनाओं पर खर्च करने में नाकाम रही है.

इसी  तरह स्मार्ट सिटी मिशन में भी दो प्रतिशत से भी कम का फंड उपयोग किया गया है. इस योजना के लिए स्वीकृत 9,940 करोड़ रुपये में से केवल सरकार 182 करोड़  रुपये खर्च किए गए हैं. 

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First published: 18 May 2018, 15:19 IST
 
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