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पिछले साल 705 छात्रों ने छोड़ा आईआईटी और आईआईएम

कैच ब्यूरो | Updated on: 10 August 2016, 14:54 IST

2015-16 में 705 छात्रों ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) में अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. यह जानकारी लोकसभा में मानव संसाधन राज्य मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय ने दी है.

आईआईएम में छात्रों का ड्रॉप आउट रेट 1.3 फीसदी है, जबकि आईआईटी में यह 6.83 फीसदी है. पिछले साल आईआईटी में 656 छात्रों ने जबकि आईआईएम में 49 छात्रों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी.

दिल्‍ली आईआईटी से 256 छात्रों ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी. जबकि आईआईटी खड़गपुर से 198 और आईआईटी कानपुर से 47, आईआईटी मद्रास में 35, आईआईटी मुंबई में 34 और आईआईटी पटना में 22 छात्रों ने पढ़ाई को बीच में ही अलविदा कह दिया.

देश के शीर्ष संस्थानों में शुमार आईआईएम का हाल भी कुछ ऐसा ही है. आईआईएम रोहतक से दस, आईआईएम इंदौर से 9, आईआईएम रायपुर से ‌8 और आईआईएम कोझीकोड़ में सात छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ चुके हैं. इसके अलावा कोलकाता और शिलांग आईआईएम से दो और त्रिची आईआईएम से एक छात्र अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ गया.

हालांकि 2014-15 की तुलना में इस साल ड्रॉप आउट रेट कम रहा है. 2014-15 में देश की 16 आईआईटी में साल 2014-15 में इंजीनियरिंग के कुल 1126 छात्रों ने पढ़ाई बीच में छोड़ दी ‌थी. वहीं 13 आईआईएम के कुल 55 छात्रों ने पढ़़ाई बीच में छोड़ दी.

First published: 10 August 2016, 14:54 IST
 
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