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रिकॉर्ड पीई निवेश ने बजट से बढ़ाई रियल एस्टेट की उम्मीदें

अभिषेक पराशर | Updated on: 26 February 2016, 15:23 IST
QUICK PILL
  • कई तरह के दबावों और नीतिगत अड़चनों के बीच पिछला साल पीई (प्राइवेट इक्विटी इंवेस्टमेंट) निवेश के लिहाज से रियल एस्टेट सेक्टर के लिए शानदार रहा है. 2015 में देश के महानगरों में कुल 19,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ.
  • रियल एस्टेट इंडस्ट्री की नजर 2016 के बजट पर हैं. आम बजट से डिवेलपर्स की अपनी उम्मीदें हैं क्योंकि बजट में कोई भी सकारात्मक घोषणा इंडस्ट्री के सेंटीमेंट को मजबूत करने में सहायता करेगी. सेंटीमेंट के मजबूत होने का सीधा फायदा बिक्री के आंकड़ों पर पड़ेगा.

कैपिटल मार्केट गतिविधियों के लिहाज से 2015 रियल एस्टेट के लिए बेहतरीन साल रहा है. 2015 के दौरान देश के महानगरों के रियल एस्टेट में रिकॉर्ड स्तर पर पीई निवेश हुआ. 2015 में देश के महानगरों में कुल 19,500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ.

भारत में रियल एस्टेट उद्योग कई तरह की चुनौतियों से दो-चार है. कानूनी अड़चनें, बढ़ता कर्ज और मांग में बढ़ोत्तरी नहीं होने की वजह से रियल एस्टेट सेक्टर बीते सालों में बहुत दबाव में रहा. फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने 2015 में कराए गए सर्वेक्षण में बताया था कि देश में विदेशी निवेश बढ़ने के बावजूद रियल एस्टेट  में एफडीआई घटा है. 

हालांकि पीई निवेश के लिहाज से 2015 रियल एस्टेट के लिए बेहतरीन रहा है. जेएलएल इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) को सबसे ज्यादा यानी 34 फीसदी पीई निवेश मिला. इसके बाद दूसरे पायदान पर 29 फीसदी पीई निवेश के साथ दिल्ली-एनसीआर रहा. 

बेंगलुरू और पुणे को क्रमश: 14 फीसदी और 5 फीसदी पीई निवेश मिला. वहीं चेन्नई को 14 फीसदी पीई निवेश मिला. हैदराबाद पीई निवेशकों को लुभाने में विफल रहा और यहां कुल निवेश का महज 3 फीसदी ही गया जबकि बाकी के शहरों में 4 फीसदी पीई निवेश गया. 

निवेशकों ने 2015 में बेहतरी ट्रैक रिकॉर्ड वाले डिवेलपर्स के प्रोजेक्ट में निवेश को तरजीह दी

जेएलएल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर शोभित अग्रवाल बताते हैं कि निवेशकों की तरफ से शहरों के चयन का फैसला पिछले अनुभवों के आधार पर किया गया. हालांकि इस बार सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह रही कि इक्विटी और कर्ज का अनुपात कुल निवेश का करीब 50 फीसदी रहा.

निवेशकों ने अन्य एसेट के मुकाबले प्रमुख कमर्शियल एसेट में निवेश को तरजीह दी. इसके अलावा निवेशकों ने बेहतरीन ट्रैक रिकॉर्ड वाले डिवेलपर्स के प्रोजेक्ट में पैसा लगाने को तरजीह दी. रेजिडेंशियल और ऑफिस प्रोजेक्ट्स अभी भी पीई इनवेस्टर्स की पहली पसंद बना हुआ है लेकिन 2015 में एंटिटी लेवल इनवेस्टमेंट्स और प्लेटफॉर्म लेवल डील्स पर निवेशकों ने ध्यान दिया.

पिछले कुछ महीनों में चीन और जापान के निवेशकों ने भारत में पैसा लगाने में दिलचस्पी दिखाई है

निवेश हिस्सेदारी के लिहाज से रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को सबसे ज्यादा फंडिंग मिली और इक्विटी इनवेस्टमेंट भी पहले की तरह जबर्दस्त रहा. वहीं दूसरी तरफ आय की जबर्दस्त संभावना वाले ऑफिस प्रोजेक्ट को सबसे ज्यादा इक्विटी निवेश मिला. आने वाले दिनों में निवेशकों की तरफ से सात शहरों पर ही ध्यान रखे जाने की उम्मीद है.

पिछले कुछ महीनों में चीन और जापान के निवेशकों ने भारत में पैसा लगाने में दिलचस्पी दिखाई है. ऐसे में 2016 इन निवेशकों के लिए बेहतरीन रहने की संभावना है. उन्होंने कहा, '2016 में हमें चौंकने का मौका मिल सकता है जैसा कि 2007 में देखने को मिला था. 2007 में कुल 8 अरब डॉलर का निवेश मिला था.'

2016 की शुरुआत में रियल एस्टेट की नजर मोदी सरकार के  बजट पर होगी. पिछला पूरा साल नीतियों और सुधारों  के मोर्चे पर रियल एस्टेट के लिए ठीक नहीं रहा है. मांग में कोई बहुत अधिक सुधार नहीं देखने को मिला और वहीं आरबीआई की तरफ से ब्याज दरों में राहत नहीं दिए जाने से खरीदारों को राहत नहीं मिली. 

आरबीआई ने ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं कर इंडस्ट्री की चिंताओं को बढ़ा दिया है जहां पहले से ही मांग की समस्या बनी हुई है. ऐसे में नीतिगत स्तर पर रियल एस्टेट की उम्मीदें आने वाले बजट से बढ़ गई हैं. 

बजट से क्या होंगी उम्मीदें

रियल एस्टेट इंडस्ट्री की नजर 2016 के बजट पर हैं. आम बजट से डेवेलपर्स की अपनी उम्मीदें हैं क्योंकि बजट में हुई कोई भी सकारात्मक घोषणा इंडस्ट्री के सेंटीमेंट को मजबूत करेगी. सेेंटीमेंट के मजबूत होने का सीधा फायदा बिक्री के आंकड़ों पर पड़ेगा. बजट से इंडस्ट्री को यह उम्मीद है कि सरकार इसमें कुछ वैसी घोषणा जरूर करेगी जिससे घर खरीदने की योजना बना रहे खरीदारों को बाजार में आने का मौका मिलेगा. 

होम लोन को सस्ता किया जाना

केंद्रीय बजट में होम लोन को लेकर विशेष घोषणा की जानी चाहिए. फिलहाल बैंक होम लोन के लिए महंगे ब्याज पर कर्ज दे रहे हैं और अधिक ब्याज भुगतान की वजह से मध्यवर्गीय परिवारों को अन्य मदों में कटौती करनी पड़ती है. इस वजह से अधिकांश मध्यमवर्गीय परिवार होम लोन से कतराते रहे हैं.

मोदी सरकार ने साफ कहा था कि   उसकी नीति 2022 तक सबको घर देने की है. एईएचएल के सीएमडी किशोर पाटे के मुताबिक, 'कम ब्याज वाले लोन के बिना सबको घर देने की नीति को अमली जामा नहीं पहनाया जा सकता.' 

रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल

रियल एस्टेट के खरीदारों को इस बार के बजट से रियल एस्टेट रेगुलेटरी बिल को अमली जामा पहनाए जाने की उम्मीद है ताकि इंडस्ट्री को एक शीर्ष बॉडी के होने का फायदा मिल सके और इसकी मदद से सभी समस्याओं को पारदर्शी तरीके से सुलझाया जा सके.

प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन टैक्स घटाने की मांग

रियल एस्टेट इंडस्ट्री के लिए सबसे बड़ी मांग प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन टैक्स को घटाने की है. अधिकांश मामलों में स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन कॉस्ट कुल इनवेस्टमेंट का 6 फीसदी तक हो जाता है. इंडस्ट्री रजिस्ट्रेशन टैक्स को घटाए जाने की लंबे समय से मांग करता रहा है ताकि मांग को बढ़ाने में मदद मिल सके.

स्टॉम्प ड्यूटी को तय करने का अधिकार हालांकि राज्य सरकार के पास होता है लेकिन केंद्र सरकार इस मामले में राज्यों को यह टैक्स घटाने का निर्देश दे सकती है.

मल्टीपल टैक्सेशन से राहत

बजट में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की खरीदारी के दौरान कई अलग-अलग करों का भुगतान किए जाने की प्रक्रिया से खरीदारों को राहत दी जानी चाहिए. फिलहाल घर खरीदने पर लोगों को सर्विस टैक्स और वैल्यू ऐडेड टैक्स के अलावा रजिस्ट्रेशन टैक्स का भुगतान करना पड़ता है.

First published: 26 February 2016, 15:23 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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