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अल-रहमत, जैश-ए-मोहम्मद और मसूद अजहर का आतंकी त्रिकोण

अभिषेक पराशर | Updated on: 10 February 2017, 1:47 IST
QUICK PILL
  • जैश-ए-मोहम्मद पर पाकिस्तान में प्रतिबंध है लेकिन यह संगठन अल रहमत ट्रस्ट की आड़ में अपना सारा कामकाज चला रहा है. इसी संस्था में पठानकोट हमले की साजिश रची गई. इसका मुखिया रऊफ आतंकवादी मसूद अजहर का भाई है.
  • भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से रुकी बातचीत की प्रक्रिया हाल ही में शुरू हुई है. पंजाब में हुए आतंकी हमले से यह प्रक्रिया टूट सकती है.

पंजाब के पठानकोट में एयरबेस पर हुए हमले के पीछे आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद का नाम सामने आ रहा है. पीटीआई के मुताबिक शनिवार की सुबह पठानकोट वायुसेना स्टेशन पर आतंकी गुट जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों ने हमला किया था. इस हमले में तीन सुरक्षा कर्मियों की जान चली गई. 

शाम तक चले ऑपरेशन में पांचों आतंकियों का मारा जा चुका है. कुछ संदिग्ध आतंकियों के इलाके में छिपे होने की आशंका की वजह से सेना और पुलिस का तलाशी अभियान जारी है.

हालांकि अभी तक किसी आतंकी संगठन ने पठानकोट हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. हमले के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सुरक्षा बलों पर गर्व जताते हुए 'सभी के साथ आने की अपील की.' गृह मंत्रालय इस हमले को सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक मानते हुए स्थिति की गंभीर समीक्षा कर रहा है. 

आतंकी हमलों की आशंका को लेकर जारी चेतावनी के बाद भी पठानकोट में आतंकी हमला करने में सफल रहे. पंजाब में कुछ महीनों के भीतर दूसरी बार आतंकियों ने हमला किया है. 

आईबी के सूत्रों के मुताबिक जैशे मोहम्मद लंबे समय बाद सक्रिय हुआ है. 2005 में अयोध्या स्थित विवादित बाबरी-रामजन्मभूमि ढांचे पर आतंकी हमले के बाद से इस समूह की गतिविधियां ठप्प पड़ गईं थी. इसकी वजह पाकिस्तानी सेना और सरकार के साथ इसके रिश्तों में आई कड़वाहट थी.

2000 में कांधार हाईजैक के बदले में रिहा हुए मसूद अजहर ने उसी साल जैशे मोहम्मद की स्थापना की थी

2000 में कांधार हाईजैक के बदले में रिहा हुए मसूद अजहर ने उसी साल जैशे मोहम्मद की स्थापना की थी. स्थापना के साथ ही ग्रुप ने पहला हमला कश्मीर में किया था जिसमें नौ कश्मीरियों की जान गई थी. इसके बाद 2001 में भारत की संसद पर हमला करके मसूद अजहर ने अपनी भारत विरोधी छवि को पुख्ता किया था.

संसद पर हुए हमले के ठीक बाद मसूद अजहर को पाकिस्तान में एक साल तक हिरासत में रखा गया. हालांकि उसके खिलाफ कभी कोई मुकदमा नहीं चलाया जा सका. आखिरकार लाहौर की एक अदालत के आदेश के बाद उसे 14 दिसंबर 2002 को रिहा कर दिया. भारत ने इसे लेकर चिंता भी जताई थी. भारत ने मसूद अजहर को वांछित आतंकियों की सूची में डाल रखा है.

लेकिन अमेरिका पर हुए 9/11हमले के बाद हालात बदल गए. पाकिस्तान के तमाम आतंकी संगठनों पर वैश्विक दबाव बढ़ गया. अमेरिकी दबाव में पाकिस्तान की सैन्य सरकार (परवेज़ मुशर्रफ) ने जैश पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया.

2003 में जैश और सैन्य सरकार का रिश्ता बुरी तरह खराब हो गया जब परवेज मुशर्रफ के ऊपर हुए जानलेवा हमले में मसूद अजहर का नाम सामने आया. मसूद को नजरबंद कर दिया गया और जैश की गतिविधियां शिथिल पड़ गईं. इस दौरान जैश के ज्यादातर आतंकी कमांडर तहरीके तालिबान पाकिस्तान के साथ जुड़ गए.

Pathankot: A policeman guards near the Indian Air Force base that was attacked by the militants in P

हमले से डरे लोग

अल रहमत की आड़ में काम कर रहा जैश-ए-मोहम्मद

जैश-ए-मोहम्मद पर पाकिस्तान में प्रतिबंध लगा हुआ है. प्रतिबंध की वजह से संगठन का सारा काम सहयोगी संस्था अल रहमत ट्रस्ट की आड़ में किया जाता है. अल रहमत का प्रमुख रऊफ आतंकी मसूद अजहर का भाई है. कहा जा रहा है कि इसी अल रहमत ट्रस्ट में पठानकोट हमले की साजिश रची गई है.

24 दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस के विमान को हाईजैक कर अफगानिस्तान के कंधार ले जाया गया था. विमान में 178 यात्री सवार थे. 

हाल ही में भारत और पाकिस्तान के बीच एनएसए स्तर की बातचीत शुरू हुई है 

आतंकियों ने विमान में सवार यात्रियों की रिहाई के बदले में तीन आतंकियों मौलाना मसूद अजहर, मुश्ताक अहमद जरगर और अहमद उमर सईद शेख को रिहा किए जाने की मांग की थी.

भारत से छोड़े जाने के बाद मौलाना मसूद अजहर ने जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की थी. मसूद अजहर पाक अधिकृत कश्मीर से भारत के खिलाफ आतंकी अभियान को अंजाम देता रहा है. 

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक पठानकोट में हुआ हमला पाकिस्तान के अंदरूनी हालात से उपजी समस्या है. पाकिस्तानी सेना देश के भीतर विरोधी आतंकी समूहों से लड़ाई में उलझी हुई है. पाकिस्तानी सेना ने हाल के दिनों में जैश को इनसे निपटने के लिए आगे बढ़ाया है.

लेकिन छूट पाते ही सबसे पहले जैश ने अपने पुराने निशाने यानी भारत पर हमला किया है. जैश की सक्रियता भारत सरकार और खुफिया एजेंसियों के लिए बड़ी चिंता का विषय है क्योंकि पाकिस्तान के दक्षिणी पंजाब इलाके में जैश की मजबूत पकड़ मानी जाती है.

First published: 3 January 2016, 10:04 IST
 
अभिषेक पराशर @abhishekiimc

चीफ़ सब-एडिटर, कैच हिंदी. पीटीआई, बिज़नेस स्टैंडर्ड और इकॉनॉमिक टाइम्स में काम कर चुके हैं.

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