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नोटबंदी के 50 दिन: तीन सिर वाला राक्षस मारने निकले थे, खाली हाथ लौटे

सुहास मुंशी | Updated on: 1 January 2017, 8:04 IST
(पीटीआई)

8 नवंबर को मोदी ने इस साल का सबसे सख्त आर्थिक फैसला लिया. भारतीय करेंसी का 86 फीसदी रातों-रात अमान्य करने की घोषणा के पीछे उनका मकसद था, ‘आतंकियों के आर्थिक सहयोग पर रोक, काले धन का खुलासा, और भ्रष्टाचार का खात्मा. कांग्रेस के इस मजाक कि, खोदा पहाड़, निकली चुहिया, पर प्रधानमंत्री ने नोटबंदी के 50वें दिन कहा, ‘मैं चूहा ही देख रहा था.’

काले धन और उसके डीलर्स के लिए प्रयोग किया गया मोदी का यह बयान लाक्षणिक है. इसके मायने यह हैं कि एक शख्स जो 50 दिन पहले तीन सिर वाला राक्षस मारने निकला था, वह चूहे के साथ लौटा है, और उसे उस पर गर्व है. आतंक, भ्रष्टाचार, और आभासी अर्थव्यवस्था की सारी चर्चा इलेक्ट्रॉनिक अर्थव्यवस्था और उसकी जादुई खूबियों की ओर मुड़ गई. और आतंक के खिलाफ लड़ाई मेगा लॉटरी स्कीम में तब्दील हो गई.

और भी बहुत सारे राजनीतिक हथकंडे...

शुक्रवार को मोदी ने ई-वॉलेट ऐप-भीम लॉन्च की. भीमराव अंबेडकर के नाम पर ही इस ऐप का नाम रखा गया है. इससे व्यक्ति मात्र अंगूठा लगाकर पैसों का ट्रांजेक्शन कर सकेगा. प्रधानमंत्री ने दो लकी ड्रॉ स्कीम का भी उद्घाटन किया. लकी ग्राहक योजना और डिजिधन व्यापार योजना. इन योजनाओं के अंतर्गत उन लकी ग्राहकों को साप्ताहिक इनाम दिया जाएगा, जो डिजिटल ट्रांजेक्शन करते हैं. एक बंपर ड्रॉ अंबेडकर की जयंती पर 14 अप्रैल को निकाला जाएगा. 

इस ऐप के लिए स्मार्टफोन की आवश्यकता पड़ेगी और इंटरनेट कनेक्शन भी. पर भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहित अन्य कई डिजिटल योजनाओं की तरह यह योजना भी इस बात को अनदेखा कर रही है कि महज 26 फीसदी भारतीयों की इंटरनेट तक पहुंच है. देखना दिलचस्प होगा कि यह जादुई ऐप बेतहाशा तनाव में आए भारत के अनौपचारिक और कृषि सेक्टर्स को किस तरह राहत पहुंचाएगी.

पिछले कुछ हफ्तों में मोदी ने आतंकवाद, भ्रष्टाचार अथवा काले धन का एक बार भी उल्लेख नहीं किया

यह भी साफ़ नहीं है कि भीम जैसी ई-वॉलेट ऐप उन तीन समस्याओं का किस तरह समधान करेगी, जिसके लिए नोटबंदी मूलत: लगाई गई थी. पिछले कुछ हफ्तों में मोदी ने आतंकवाद, भ्रष्टाचार अथवा काले धन का एक बार भी उल्लेख नहीं किया. 22 नवंबर को कश्मीर में मारे गए एक आतंकी के पास मिले 2000 रुपए के नोट के बाद से एक बार भी आतंकियों को आर्थिक मदद नहीं करने के बारे में चर्चा नहीं की गई. 

कहा जा रहा है कि 500 और 1000 के 90 फीसदी अमान्य नोट अब तक बैंकों में जमा हो गए हैं. हैरानी की बात है कि आरबीआई ने इस संबंध में साप्ताहिक जानकारी देना बंद कर दी है. इससे सिद्ध होता है कि मोदी सरकार को काले धन की प्रकृति और मात्रा की जानकारी नहीं है.

जहां तक भ्रष्टाचार के खुलासे का सवाल है, अब तक टैक्स चोरी को लेकर कोई बड़ी गिरप्तारी नहीं हुई है. इसके उलट, भाजपा की नैतिकता पर जरूर सवाल खड़े हुए. नोटबंदी की घोषणा के कुछ दिन पहले ही पार्टी ने कुछ राज्यों में कई करोड़ रुपयों की जमीनें खरीदी थीं.

हो सकता है, हम मोदी का आकलन बहुत जल्दी और बहुत सख्ती से कर रहे हैं. अच्छा तो, अब मोदी नए साल की पूर्व संध्या पर ‘इलैक्ट्रोनिक और कैशलेस अर्थव्यवस्था’ पर कुछ बड़ी घोषणाएं करेंगे.

First published: 1 January 2017, 8:04 IST
 
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